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📜 पंचतंत्र

ऊंट, सियार और कौवा — दुष्टों का षड्यंत्र और झूठा बलिदान

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा5 मिनट का पठन
ऊंट, सियार और कौवा — दुष्टों का षड्यंत्र और झूठा बलिदान

एक जंगल में 'मदोत्कट' नाम का एक शेर रहता था। उसके दरबार में तीन चापलूस सेवक हमेशा उसके पीछे-पीछे घूमते थे— एक सियार, एक कौवा और एक तेंदुआ।

एक दिन एक 'ऊंट' अपने झुंड से बिछड़ कर उस जंगल में आ गया। शेर ने ऊंट को अभयदान (सुरक्षा का वचन) दिया और उसे अपना मित्र बना लिया। ऊंट खुशी-खुशी उनके साथ रहने लगा।

कुछ समय बाद, एक जंगली हाथी के साथ युद्ध में शेर बुरी तरह घायल हो गया। वह शिकार करने लायक नहीं रहा। शेर के भूखे रहने के कारण उसके तीनों सेवक (सियार, कौवा और तेंदुआ) भी भूखे मरने लगे, क्योंकि वे शेर के छोड़े हुए शिकार पर ही पलते थे।

तीनों ने मिलकर योजना बनाई कि किसी तरह इस मोटे-ताज़े 'ऊंट' को मारा जाए। परंतु शेर ने ऊंट को सुरक्षा का वचन दिया था, इसलिए शेर उसे सीधे नहीं मार सकता था।

चापलूसों का नाटक: सियार ने एक बहुत ही शातिर योजना बनाई। वे तीनों शेर के पास गए।

सबसे पहले 'कौवे' ने हाथ जोड़कर कहा: "महाराज! आप भूखे हैं। आप मुझे खाकर अपनी भूख मिटा लीजिए।" सियार ने तुरंत कहा: "अरे कौवे! तू तो बहुत छोटा है, तुझसे महाराज का क्या पेट भरेगा? महाराज, आप मुझे खा लीजिए!" तेंदुए ने आगे बढ़कर कहा: "सियार भाई, तुम्हारा मांस स्वादिष्ट नहीं है। महाराज, आप मुझे खाकर अपनी जान बचाइए!"

शेर ने तीनों के प्रेम को देखकर मना कर दिया।

सीधे-सादे ऊंट की बेवकूफी: ऊंट यह सब तमाशा देख रहा था। उसने सोचा कि जब ये तीनों अपना बलिदान दे रहे हैं और शेर इन्हें नहीं खा रहा है, तो मुझे भी स्वामी-भक्ति दिखानी चाहिए। शेर मुझे भी नहीं खाएगा।

सीधे-सादे ऊंट ने आगे बढ़कर कहा: "महाराज! इन सबका शरीर छोटा है। आप मुझे मारकर अपना और अपने सेवकों का पेट भरिए।"

ऊंट के मुँह से यह बात निकलते ही, योजना के अनुसार सियार और तेंदुए ने तुरंत उस पर छलांग लगा दी! इससे पहले कि ऊंट कुछ समझ पाता, उन्होंने उसके गले को फाड़ डाला। शेर ने भी अपनी भूख मिटाने के लिए अपने वचन को भुला दिया और तीनों ने मिलकर उस बेकसूर ऊंट को खा लिया।

नीति / सीख: दुष्ट और चापलूस लोगों की संगति हमेशा जानलेवा होती है। वे मीठी बातें और नाटक करके सीधे-सादे इंसान को फंसा देते हैं। ताकतवर लोगों के 'चापलूस सेवकों' से हमेशा दूर रहना चाहिए।

🎉 कहानी समाप्त

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