लोमड़ी और भालू — बर्फ की नदी और कटी हुई पूंछ

कहा जाता है कि बहुत पुराने समय में भालुओं की पूंछ बहुत लंबी और सुंदर हुआ करती थी।
सर्दियों का मौसम था। एक चतुर लोमड़ी ने कहीं से कुछ मछलियाँ चुराई थीं और वह उन्हें मजे से खा रही थी। तभी वहाँ से एक भालू गुज़रा। मछलियों को देखकर भालू के मुँह में पानी आ गया।
भालू ने लोमड़ी से पूछा: "लोमड़ी बहन! ये ताज़ा मछलियाँ तुमने कहाँ से पकड़ीं? मुझे भी मछली पकड़ने का तरीका सिखा दो।"
लोमड़ी की शरारत: लोमड़ी को भालू की बेवकूफी का मज़ाक उड़ाने की सूझी। उसने पास की एक 'जमी हुई बर्फ की झील' की तरफ इशारा करते हुए कहा: "भालू भाई, यह बहुत आसान है! तुम उस झील पर जाओ। बर्फ में एक छोटा सा गड्ढा बनाओ और अपनी यह लंबी और सुंदर 'पूंछ' पानी के अंदर डाल दो। मछलियाँ तुम्हारी पूंछ को काँटा समझकर उसे पकड़ लेंगी।"
भालू ने पूछा: "फिर मैं उन्हें बाहर कैसे निकालूँगा?"
लोमड़ी ने अपनी चालाकी दिखाते हुए कहा: "जब मछलियाँ तुम्हारी पूंछ को पकड़ेंगी, तो तुम्हें थोड़ा 'दर्द' होगा। जितना ज़्यादा दर्द हो, समझ लेना उतनी ही ज़्यादा मछलियाँ फँस गई हैं। जब दर्द बर्दाश्त के बाहर हो जाए, तो एक झटके में पूंछ बाहर खींच लेना!"
मूर्खता का परिणाम: मूर्ख भालू को लोमड़ी की बात पर पूरा विश्वास हो गया। वह जमी हुई झील पर गया, बर्फ में गड्ढा किया और अपनी लंबी पूंछ पानी के अंदर डालकर बैठ गया।
सर्दी बहुत भयंकर थी। धीरे-धीरे गड्ढे का पानी 'जमने' लगा और भालू की पूंछ पूरी तरह बर्फ में जम गई। पानी जमने के कारण भालू की पूंछ में तेज़ 'दर्द' होने लगा।
भालू ने सोचा: "वाह! लोमड़ी ने सच कहा था। दर्द हो रहा है, इसका मतलब बहुत सारी मछलियाँ मेरी पूंछ से चिपक गई हैं।"
जब दर्द बिल्कुल बर्दाश्त के बाहर हो गया, तो भालू ने अपनी पूरी ताक़त लगाई और एक ज़ोरदार झटके से अपनी पूंछ को बाहर की तरफ खींचा!
परंतु पूंछ तो बर्फ में बुरी तरह जम चुकी थी। झटके के कारण मछली तो एक भी बाहर नहीं आई, बल्कि भालू की वह लंबी और सुंदर पूंछ बीच से ही 'टूट गई'! भालू दर्द से चीख पड़ा और लोमड़ी दूर खड़ी ज़ोर-ज़ोर से हँसती रही।
कहते हैं कि उसी दिन से भालुओं की पूंछ हमेशा के लिए छोटी हो गई।
नीति / सीख: दूसरों की बातों पर बिना सोचे-समझे (आँख मूंदकर) विश्वास करना हमेशा नुकसानदायक होता है। जो इंसान किसी धूर्त व्यक्ति की सलाह पर बिना अपनी अक्ल लगाए काम करता है, वह हमेशा अपना ही नुकसान करता है।
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