हिन्दी कहानियाँ
📜 पंचतंत्र

शेर और भेड़िया — चोर के घर चोरी और न्याय का नाटक

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
शेर और भेड़िया — चोर के घर चोरी और न्याय का नाटक

एक भेड़िया बहुत ही चालाक और बेईमान था। एक रात उसने एक गड़रिए के बाड़े में चुपके से घुसकर एक बहुत ही मोटे-ताज़े 'भेड़ के बच्चे' को चुरा लिया।

भेड़िया उस भेड़ को अपने मुँह में दबाकर अपने घर की तरफ बहुत ही खुशी-खुशी जा रहा था। वह मन ही मन सोच रहा था कि आज तो शानदार दावत होगी।

रास्ते में जंगल का राजा 'शेर' आ गया। शेर ने देखा कि भेड़िए के मुँह में एक ताज़ा और स्वादिष्ट शिकार है।

शेर का हमला और चोरी: शेर तो शेर था! उसने बिना कुछ सोचे-समझे भेड़िए पर झपट्टा मारा और उसके मुँह से वह भेड़ छीन ली। भेड़िया डर के मारे पीछे हट गया। शेर ने भेड़ को अपने पैरों के नीचे दबा लिया और आराम से खाने की तैयारी करने लगा।

भेड़िया यह देखकर बहुत ही खफा हुआ, लेकिन वह शेर से लड़ नहीं सकता था। वह सुरक्षित दूरी पर खड़ा हो गया और बहुत ही 'दुखी और नाराज़' आवाज़ में बड़बड़ाने लगा।

चोर का न्याय: भेड़िए ने शेर से कहा: "महाराज! यह बहुत ही गलत बात है! यह घोर अन्याय है। आपने 'मेरी जायज़ संपत्ति' मुझसे बिना किसी कारण के छीन ली है। क्या जंगल के राजा को चोरी करना शोभा देता है?"

भेड़िए के मुँह से 'अन्याय' और 'संपत्ति' जैसे शब्द सुनकर शेर ज़ोर से ठहाका लगाकर हँसने लगा।

शेर ने भेड़िए की आँखों में देखकर बहुत ही करारा व्यंग्य किया: "तेरी जायज़ संपत्ति? क्या बात है! ज़रा मुझे यह बता कि यह भेड़ तुझे कहाँ से मिली? क्या यह भेड़ तेरे 'पिताजी' ने तुझे विरासत में दी थी? या तूने इसे बाज़ार में पैसे देकर 'खरीदा' था? या फिर गड़रिए ने इसे तुझे 'उपहार' में दिया था?"

भेड़िए की बोलती बंद हो गई, क्योंकि उसने खुद इसे चुराया था।

शेर ने आगे कहा: "तूने इसे बेईमानी से चुराया था, और मैंने इसे अपनी ताक़त से तुझसे छीन लिया! जो चीज़ चोरी की होती है, उस पर हक़ कैसा? अब यहाँ से चुपचाप भाग जा, वरना मैं इस भेड़ के साथ-साथ तुझे भी खा जाऊँगा।" भेड़िया दुम दबाकर वहाँ से भाग गया।

नीति / सीख: चोर को चोरी की शिकायत करने का कोई अधिकार नहीं होता। जो चीज़ बेईमानी या गलत तरीके से हासिल की जाती है, वह कभी इंसान के पास टिकती नहीं है; वह किसी न किसी रास्ते से (या किसी और बेईमान के हाथों) छिन ही जाती है।

🎉 कहानी समाप्त

📜 पंचतंत्र की और कहानियाँ

📜 पंचतंत्र4 मिनट

बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम

एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत

एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी

एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई

एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत

एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश

एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।

पढ़ें →