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लोमड़ी और कौवा — पनीर का टुकड़ा और झूठी तारीफ का नुकसान

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लोमड़ी और कौवा — पनीर का टुकड़ा और झूठी तारीफ का नुकसान

एक दिन एक कौवा भोजन की तलाश में भटक रहा था। तभी उसे एक घर की खिड़की पर रखा हुआ एक बहुत ही स्वादिष्ट और बड़ा 'पनीर का टुकड़ा' मिल गया।

कौवा बहुत खुश हुआ। उसने जल्दी से उस पनीर के टुकड़े को अपनी चोंच में दबाया और उड़कर जंगल के एक बहुत ऊँचे पेड़ की डाल पर जा बैठा, ताकि वह आराम से अपना भोजन खा सके।

उसी समय एक बहुत ही भूखी और चालाक लोमड़ी उस पेड़ के नीचे से गुज़री। उसकी नज़र ऊपर पेड़ पर बैठे कौवे पर पड़ी। लोमड़ी ने कौवे की चोंच में वह पीला और स्वादिष्ट पनीर का टुकड़ा देखा, तो उसके मुँह में पानी आ गया।

चूँकि लोमड़ी पेड़ पर नहीं चढ़ सकती थी और न ही कौवे से लड़कर पनीर छीन सकती थी, इसलिए उसने अपनी अक्ल और 'कूटनीति' का इस्तेमाल करने का फैसला किया।

लोमड़ी की झूठी तारीफ: लोमड़ी पेड़ के नीचे खड़ी होकर बहुत ही मीठी और प्यार भरी आवाज़ में बोली: "अरे वाह! कितना सुंदर पक्षी है! कौवे भाई, आज तुम कितने शानदार लग रहे हो। तुम्हारे ये काले पंख सूरज की रोशनी में कितने चमक रहे हैं। तुम्हारी आँखें कितनी तेज़ और सुंदर हैं। सचमुच, तुम तो जंगल के सभी पक्षियों के राजा लगने लायक हो!"

कौवा, जिसे हमेशा उसके काले रंग और कर्कश आवाज़ के लिए ताने मिलते थे, अपनी इतनी ज़्यादा तारीफ सुनकर फूला नहीं समाया। उसका सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

लोमड़ी ने देखा कि कौवा उसकी बातों में आ गया है। लोमड़ी ने अपना आखिरी और अचूक दाँव फेंका।

उसने कहा: "कौवे भाई! तुम्हारा रूप तो इतना सुंदर है, तो मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारी 'आवाज़' भी इस जंगल में सबसे ज़्यादा सुरीली और मीठी होगी। क्या तुम मुझे अपना एक मधुर 'गाना' सुना सकते हो? प्लीज, एक बार गाकर दिखाओ!"

अपनी आवाज़ की तारीफ सुनकर कौवा पूरी तरह से अहंकार में अंधा हो गया। वह भूल गया कि उसकी चोंच में क्या है।

वह दुनिया को अपनी "सुरीली" आवाज़ सुनाने के लिए बेताब हो गया। जैसे ही उस मूर्ख कौवे ने गाना गाने के लिए अपनी चोंच खोली और ज़ोर से "काँव-काँव" किया...

चोंच खुलते ही वह स्वादिष्ट 'पनीर का टुकड़ा' सीधा नीचे गिर पड़ा!

नीचे खड़ी चालाक लोमड़ी तो इसी इंतज़ार में थी। उसने हवा में ही लपककर उस पनीर के टुकड़े को अपने मुँह में पकड़ लिया।

लोमड़ी ने पनीर को चबाते हुए हँसकर कौवे से कहा: "कौवे भाई! तुम्हारी आवाज़ तो सच में है, लेकिन तुम्हारे पास बिल्कुल 'दिमाग' नहीं है। यह पनीर मेरी झूठी तारीफों की फीस है!" यह कहकर लोमड़ी जंगल में भाग गई और मूर्ख कौवा भूखा ही पछताता रह गया।

🎉 कहानी समाप्त

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