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👑 अकबर-बीरबल

मुर्गे का अंडा — शाही हमाम में दरबारियों का षड्यंत्र और बीरबल की हाज़िरजवाबी

लोक परंपरा — अकबर-बीरबल5 मिनट का पठन
मुर्गे का अंडा — शाही हमाम में दरबारियों का षड्यंत्र और बीरबल की हाज़िरजवाबी

गर्मियों का मौसम था और आगरा में भीषण गर्मी पड़ रही थी। शहंशाह अकबर और उनके दरबारियों ने तय किया कि आज का दरबार 'शाही हमाम' में लगेगा। ठंडे पानी के कुंड के चारों ओर महकते हुए गुलाब के फूल बिखेरे गए थे।

परंतु हमाम में जाने से पहले, मुल्ला दो प्याज़ा और कुछ अन्य ईर्ष्यालु दरबारियों ने बीरबल को नीचा दिखाने के लिए एक बहुत ही चतुर और गुप्त षड्यंत्र रचा।

दरबारियों ने शहंशाह अकबर को भी अपनी इस मज़ेदार साज़िश में शामिल कर लिया। योजना के अनुसार, हमाम में उतरने से पहले, अकबर सहित सभी दरबारियों ने अपने-अपने कपड़ों के भीतर एक-एक मुर्गी का अंडा छिपा लिया। केवल बीरबल को इस बात की कोई भनक नहीं थी।

शाही हमाम का रहस्यमयी खेल: सभी दरबारी और शहंशाह हमाम के ठंडे पानी में उतरे। बीरबल भी पानी में डुबकी लगाकर गर्मी से राहत पा रहे थे।

तभी अकबर ने अचानक पानी के बीच खड़े होकर एक गंभीर आवाज़ में कहा: "मेरे अज़ीज़ वज़ीरों! कल रात मुझे सपने में एक फरिश्ते ने दर्शन दिए। उसने कहा कि जो दरबारी मुग़ल सल्तनत और मेरे प्रति पूरी तरह वफादार और सच्चा है, यदि वह इस पवित्र कुंड में डुबकी लगाएगा, तो उसे पानी के भीतर से एक 'अंडा' प्राप्त होगा। और जो वफादार नहीं होगा, वह खाली हाथ लौटेगा।"

बीरबल यह सुनकर हैरान रह गए कि भला पानी के कुंड में अंडे कहाँ से आ गए?

अकबर ने आदेश दिया, "तो चलिए, अपनी-अपनी वफादारी साबित कीजिए! डुबकी लगाइए!"

अंडों की बारिश और बीरबल की उलझन: शहंशाह के आदेश पर सबसे पहले मुल्ला दो प्याज़ा ने पानी में डुबकी लगाई। वह कुछ सेकंड पानी के भीतर रहा और जब बाहर आया, तो उसके हाथ में एक सफेद अंडा था! मुल्ला ने गर्व से कहा, "जहाँपनाह! मैं आपका सच्चा वफादार हूँ।"

इसके बाद राजा टोडरमल, अबुल फज़ल और बाकी सभी दरबारियों ने एक-एक करके डुबकी लगाई, और चमत्कारिक रूप से, हर कोई पानी के भीतर से एक अंडा निकालकर बाहर ले आया। अंत में स्वयं शहंशाह अकबर ने भी डुबकी लगाई और वे भी एक अंडा निकाल लाए।

अब केवल बीरबल बचे थे। पूरे हमाम की नज़रें बीरबल पर टिकी थीं। दरबारी अपनी मुस्कान छिपा रहे थे। वे जानते थे कि पानी में कोई अंडा नहीं है, और जब बीरबल खाली हाथ लौटेंगे, तो उनकी 'वफादारी' पर सवाल उठेगा और भारी बेइज़्ज़ती होगी।

अकबर ने मुस्कुराते हुए कहा, "क्या बात है बीरबल? क्या तुम डुबकी लगाने से डर रहे हो? जाओ और अपनी वफादारी का अंडा लेकर आओ।"

बीरबल का अकल्पनीय दांव: बीरबल समझ गए कि यह एक सोची-समझी साज़िश है और सभी दरबारी पहले से ही अंडे छिपाकर लाए थे।

बीरबल ने पानी में डुबकी लगाई। वे कुछ पल पानी के भीतर रहे। उन्होंने देखा कि हमाम के तल पर कोई अंडा नहीं है। अब यदि वे खाली हाथ बाहर आते, तो हार जाते। बीरबल का दिमाग बिजली की गति से दौड़ा। उन्होंने पानी के भीतर ही इस समस्या का एक अत्यंत हास्यपूर्ण और अचूक हल निकाल लिया।

अगले ही पल, बीरबल पानी से बाहर आए। उनके हाथ में कोई अंडा नहीं था। परंतु अंडे के बजाय, बीरबल ने अपने दोनों हाथों को अपने कानों के पास रखा, उन्हें मुर्गे के पंखों की तरह फड़फड़ाया और पूरे शाही हमाम में ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ लगाने लगे: "कुकड़ूँ-कूँ! कुकड़ूँ-कूँ! कुकड़ूँ-कूँ!"

षड्यंत्र की हार और बादशाह का अट्टहास: बीरबल की यह अजीबोगरीब हरकत देखकर अकबर और सभी दरबारी हक्के-बक्के रह गए। किसी को समझ नहीं आया कि बीरबल को अचानक क्या हो गया है?

अकबर ने चकित होकर पूछा, "बीरबल! यह तुम क्या कर रहे हो? तुम्हारा अंडा कहाँ है और तुम यह मुर्गे की तरह बांग क्यों दे रहे हो?"

बीरबल ने पानी के बीच खड़े होकर, दोनों हाथ जोड़कर अत्यंत गर्व के साथ कहा: "जहाँपनाह! आप सभी के हाथों में अंडे देखकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई। परंतु हुज़ूर, क्या आप नहीं जानते कि अंडे तो केवल 'मुर्गियां' देती हैं? इस शाही हमाम में आप सभी ने अंडे दिए हैं, इसका अर्थ है कि आप सब 'मुर्गियां' हैं! और हुज़ूर, मुर्गियों के इस पूरे झुंड में मैं इकलौता 'मुर्गा' हूँ! और मुर्गे कभी अंडे नहीं देते, वे तो केवल 'कुकड़ूँ-कूँ' करते हैं!"

हमाम में हंसी की लहर: बीरबल का यह हाज़िरजवाबी से भरा जवाब सुनते ही हमाम में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया और फिर शहंशाह अकबर का गगनभेदी अट्टहास फूट पड़ा। वे हंसते-हंसते पानी में लोटपोट हो गए।

अकबर ने हंसते हुए कहा, "वाह बीरबल वाह! हम सबने मिलकर तुम्हारे लिए एक जाल बिछाया था, परंतु तुमने अपनी एक ही छलांग में हम सबको 'मुर्गी' बना दिया!"

ईर्ष्यालु दरबारियों के चेहरे शर्म से लाल हो गए। उन्होंने बीरबल की बेइज़्ज़ती करने के लिए अपनी ही फज़ीहत करवा ली थी। बीरबल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि साज़िशें कितनी भी गहरी क्यों न हों, तेज़ दिमाग उन्हें हमेशा मात दे सकता है।

(यह कहानी 'बुराई पर हास्य और बुद्धि की जीत' का एक क्लासिक उदाहरण है।

🎉 कहानी समाप्त

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