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👑 अकबर-बीरबल

बैंगन की वफादारी — शहंशाह की चापलूसी या वज़ीर का सच?

लोक परंपरा — अकबर-बीरबल5 मिनट का पठन
बैंगन की वफादारी — शहंशाह की चापलूसी या वज़ीर का सच?

मुग़ल दरबार में अक्सर केवल राजनीति और कूटनीति की ही बातें नहीं होती थीं, बल्कि कभी-कभी भोजन, कला और रोज़मर्रा की चीज़ों पर भी बड़ी दिलचस्प चर्चाएं हुआ करती थीं। शहंशाह अकबर को तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन खाने का बहुत शौक था और शाही बावर्चीखाने में देश-विदेश के बेहतरीन रसोइये तैनात थे।

एक दिन दोपहर के समय, शहंशाह अकबर अपने नवरत्नों के साथ शाही दस्तरख्वान पर बैठे थे। उस दिन शाही बावर्ची ने 'बैंगन' का एक बहुत ही लज़ीज़ और मसालेदार भर्ता बनाया था।

अकबर ने जैसे ही बैंगन का एक निवाला खाया, उन्हें उसका स्वाद बहुत पसंद आया। शहंशाह का मिजाज़ खुश हो गया। उन्होंने बैंगन की तारीफ करते हुए कहा: "सुभानल्लाह! क्या ज़ायका है! बीरबल, तुमने देखा, बैंगन कितनी लाजवाब सब्ज़ी है। मुझे तो लगता है कि यह सब्ज़ियों का राजा है।"

बीरबल की 'हाँ में हाँ': बीरबल तुरंत शहंशाह की बात का समर्थन करते हुए बोले: "बिल्कुल जहाँपनाह! आपने सौ टके की बात कही है। बैंगन तो सचमुच सब्ज़ियों का सरताज (राजा) है। आप खुद ही देखिए हुज़ूर, खुदा ने भी बैंगन के सिर पर एक 'हरा ताज' पहनाकर भेजा है। इसे खाने से खून साफ होता है, दिमाग तेज़ होता है और यह शाही दस्तरख्वान की शान बढ़ाता है।"

अकबर बीरबल के मुँह से बैंगन की इतनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुए। उस दिन बैंगन को शाही सब्ज़ी का दर्ज़ा मिल गया।

कुछ दिनों बाद (तस्वीर का दूसरा पहलू): कुछ हफ्ते बीत गए। एक दिन शाही बावर्ची ने फिर से बैंगन की कोई सब्ज़ी बनाई। परंतु उस दिन शायद सब्ज़ी ठीक से पकी नहीं थी या उसमें मसाले कम थे।

अकबर ने जैसे ही उसे खाया, उनका मुँह कड़वा हो गया। ऊपर से उसी दिन सुबह शहंशाह का पेट भी कुछ खराब था। अकबर को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने सब्ज़ी की थाली दूर खिसका दी।

शहंशाह ने चिढ़कर कहा: "यह कैसी वाहियात सब्ज़ी है! बैंगन से ज्यादा बेस्वाद और घटिया सब्ज़ी मैंने आज तक नहीं देखी। इसका तो रंग भी एकदम मनहूस (काला-बैंगनी) है। इसे खाने से इंसान बीमार पड़ जाए।"

बीरबल वहीं पास खड़े थे। उन्होंने बिना एक पल की देरी किए, शहंशाह के सुर में सुर मिलाते हुए कहा: "सत्य वचन जहाँपनाह! आप बिल्कुल सही फरमा रहे हैं। बैंगन तो दुनिया की सबसे मनहूस और निकम्मी सब्ज़ी है। इसका स्वाद भी मिट्टी जैसा है। इसे खाने से पेट में दर्द और वात (गैस) की बीमारी हो जाती है। इसके सिर पर ताज नहीं, बल्कि यह तो कीलों का एक गुच्छा है। इसे तो गधे भी न खाएं!"

अकबर का सवाल और बीरबल की फज़ीहत की कोशिश: बीरबल के मुँह से बैंगन की इतनी भयानक बुराई सुनकर शहंशाह अकबर अचानक चौंक गए। उन्हें कुछ दिन पहले की बात याद आ गई।

अकबर ने अपनी आंखें तरेरते हुए बीरबल को देखा और कहा: "ठहरो बीरबल! यह तुम क्या कह रहे हो? मुझे अच्छी तरह याद है, कुछ ही दिन पहले इसी दस्तरख्वान पर तुमने कहा था कि बैंगन सब्ज़ियों का राजा है और इसके सिर पर ताज है। और आज तुम कह रहे हो कि यह सबसे घटिया सब्ज़ी है! तुम एक वज़ीर होकर अपनी ही बात से पलट रहे हो? तुम्हारी बातों का कोई मोल है या तुम सिर्फ एक 'चापलूसी' करने वाले इंसान हो?"

पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। मुल्ला दो प्याज़ा मुस्कुराने लगे कि आज तो बीरबल अपनी ही चापलूसी के जाल में बुरी तरह फंस गया है।

बीरबल का अचूक और अमर जवाब: बीरबल ज़रा भी नहीं घबराए। उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई। उन्होंने अत्यंत विनम्रता से अपना सिर झुकाया और एक ऐसा जवाब दिया जिसने मुग़ल सल्तनत के इतिहास में एक कहावत का रूप ले लिया।

बीरबल ने कहा: "गुस्ताखी माफ़ जहाँपनाह! मेरी बात का मोल बिल्कुल है और मैं अपनी बात से पलटा नहीं हूँ।"

अकबर: "तो फिर इस दोगलेपन का क्या मतलब है?"

बीरबल ने शहंशाह की आंखों में देखते हुए कहा: "हुज़ूर! बात बहुत सीधी सी है। मैं आपका नमक खाता हूँ, बैंगन का नहीं! इसलिए, जहाँपनाह, मैं आपकी नौकरी करता हूँ, बैंगन की नहीं। जब आप बैंगन की तारीफ करेंगे, तो मैं भी करूँगा, और जब आप उसे बुरा कहेंगे, तो मैं भी उसे बुरा ही कहूँगा। मेरी वफादारी मेरी सल्तनत और मेरे शहंशाह के प्रति है, किसी सब्ज़ी के प्रति नहीं!"

बादशाह का अट्टहास: बीरबल का यह हाज़िरजवाबी से भरा और अत्यंत व्यावहारिक जवाब सुनकर शहंशाह अकबर अपनी हंसी नहीं रोक पाए। वे ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे।

अकबर समझ गए कि एक राजा के सेवक को किस तरह अपनी बात रखनी चाहिए और बीरबल ने किस चतुराई से अपनी 'चापलूसी' को 'वफादारी' का नाम दे दिया था। अकबर ने खुश होकर बीरबल को सोने की एक अंगूठी इनाम में दी।

(यह कहानी केवल हास्य नहीं है, बल्कि कूटनीति और व्यावहारिक जीवन का एक बहुत बड़ा सबक है कि एक सेवक की प्राथमिकता हमेशा उसका स्वामी होता है।

🎉 कहानी समाप्त

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