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"नाच न जाने आँगन टेढ़ा"

लोक परंपरा5 मिनट का पठन
"नाच न जाने आँगन टेढ़ा"

एक राज्य में 'चमेली' नाम की एक नर्तकी रहती थी। वह बहुत सुंदर थी और महंगे-महंगे रेशमी कपड़े पहनती थी। उसके पास गहनों का भंडार था। अपनी सुंदरता के कारण चमेली को यह घमंड हो गया था कि पूरे राज्य में उससे अच्छा नाच कोई नहीं सकता। वह हमेशा बाकी नर्तकियों का मज़ाक उड़ाती और खुद को सबसे महान बताती थी।

हालाँकि, सच तो यह था कि चमेली को 'सुर और ताल' की बिल्कुल भी समझ नहीं थी। वह केवल सज-धज कर मंच पर खड़ी हो जाती थी और लोगों की वाह-वाही लूटने की कोशिश करती थी।

एक बार उस राज्य के राजा ने एक बहुत बड़ी 'नृत्य प्रतियोगिता' का आयोजन किया। शर्त थी कि जो भी नर्तकी सबसे बेहतरीन नाच दिखाएगी, उसे राजा की तरफ से 'स्वर्ण मुद्राएँ' और 'राज्य नर्तकी' का खिताब मिलेगा।

चमेली भी सज-धज कर, पैरों में भारी घुँघरू बाँधकर राजमहल पहुँच गई। वह बहुत घमंड से मंच पर गई। संगीतकारों ने ढोल, तबला और सारंगी बजाना शुरू किया।

ताल से बेताल: जैसे ही संगीत तेज़ हुआ, चमेली ने नाचना शुरू किया। लेकिन कुछ ही पलों में सब कुछ गड़बड़ हो गया!

तबला 'धिन-धिन' बज रहा था, और चमेली के पैर हवा में कहीं और जा रहे थे। सारंगी की धुन तेज़ होती, तो वह धीमी हो जाती। वह न तो सही समय पर चक्कर ले पा रही थी और न ही उसके घुँघरू संगीत के साथ बज रहे थे। वह बार-बार लड़खड़ा रही थी और उसके पैर एक-दूसरे में उलझ रहे थे।

दरबार में बैठे लोग चमेली का यह 'बेताल' नाच देखकर अपनी हँसी नहीं रोक पाए। राजा के माथे पर भी सिलवटें पड़ गईं।

झूठा बहाना: जब चमेली ने देखा कि सब उस पर हँस रहे हैं और वह बुरी तरह हारने वाली है, तो उसने अचानक नाचना बंद कर दिया। वह गुस्से में पैर पटकती हुई राजा के सामने गई।

राजा ने पूछा: "क्या हुआ चमेली? तुम रुक क्यों गईं? तुम्हारे पैरों में तो कोई ताल ही नहीं है।"

अपनी बेइज्जती और अपनी 'कमी' को छिपाने के लिए चमेली ने तुरंत एक झूठा बहाना बनाया। उसने बहुत ही घमंड और गुस्से से कहा: "महाराज! मेरे पैरों में कोई कमी नहीं है, मैं तो दुनिया की सबसे बेहतरीन नर्तकी हूँ! लेकिन मैं नाचूँ कैसे? आपके इस दरबार का 'आँगन ही टेढ़ा है'! मंच की ज़मीन ऊँची-नीची है, इसी वजह से मेरे पैर लड़खड़ा रहे हैं। ऐसे खराब आँगन में तो कोई भी नहीं नाच सकता!"

चमेली का यह बेतुका बहाना सुनकर पूरा दरबार ठहाकों से गूँज उठा।

तब राजा के बुद्धिमान मंत्री ने खड़े होकर मुस्कुराते हुए कहा: "चमेली! इसी मंच पर तुमसे पहले चार नर्तकियों ने बहुत ही शानदार नाच दिखाया है, तब तो ज़मीन टेढ़ी नहीं थी। सच तो यह है कि तुम्हारे अंदर 'हुनर' ही नहीं है और तुम अपनी नाकामी का दोष इस बेजान ज़मीन पर मढ़ रही हो। तुम्हारे लिए तो वही कहावत सच है— 'नाच न जाने आँगन टेढ़ा!'"

चमेली शर्म के मारे पानी-पानी हो गई और अपना मुँह छिपाकर दरबार से भाग गई।

🎉 कहानी समाप्त

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