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👑 अकबर-बीरबल

संसार का केंद्र और आसमान के तारे — बेतुके सवालों का बेतुका जवाब

लोक परंपरा — अकबर-बीरबल5 मिनट का पठन
संसार का केंद्र और आसमान के तारे — बेतुके सवालों का बेतुका जवाब

एक बार बगदाद (इराक) से एक बहुत ही घमंडी और प्रसिद्ध विद्वान आगरा के दरबार में आया। उसे अपने ज्ञान पर बहुत अंहकार था। उसका मानना था कि दुनिया में उसके सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है।

उसने शहंशाह अकबर को प्रणाम किया और कहा: "जहाँपनाह! मैंने सुना है कि आपके दरबार में ऐसे नवरत्न हैं जो संसार के हर रहस्य को सुलझा सकते हैं। मैं आपके दरबारियों से केवल दो सवाल पूछना चाहता हूँ। यदि वे सही जवाब न दे सके, तो मुग़ल सल्तनत को मुझे अपना गुरु मानना पड़ेगा।"

अकबर ने चुनौती स्वीकार कर ली। बगदाद के विद्वान ने अपने दो बेतुके सवाल दरबार में दागे:

पहला सवाल: "इस पूरी पृथ्वी का 'बिल्कुल बीचों-बीच का हिस्सा' कहाँ है?"

दूसरा सवाल: "आसमान में कुल मिलाकर कितने तारे हैं? मुझे बिल्कुल सटीक गिनती चाहिए।"

सवालों का चक्रव्यूह: ये सवाल सुनकर दरबारियों के होश उड़ गए। पृथ्वी का केंद्र खोजना और आसमान के अनगिनत तारों को गिनना किसी भी इंसान के लिए पूरी तरह से नामुमकिन था। राजा टोडरमल और अबुल फज़ल ने हार मान ली। विद्वान मुस्कुराने लगा।

अकबर ने तुरंत बीरबल की ओर इशारा किया। बीरबल अपनी जगह से उठे, उनके हाथ में उनकी छड़ी थी।

बीरबल का पहला जवाब: बीरबल सीधे उस विद्वान के पास गए और अपनी छड़ी को ज़मीन पर ज़ोर से गाड़ दिया। बीरबल ने पूरे आत्मविश्वास से कहा: "विद्वान महोदय! जहाँ मेरी यह छड़ी गड़ी है, यही जगह इस पूरी पृथ्वी का बिल्कुल सटीक केंद्र (Center) है!"

विद्वान ने आंखें तरेर कर कहा, "तुम बिना नापे यह कैसे कह सकते हो? इसका क्या सबूत है?"

बीरबल ने मुस्कुराकर तपाक से जवाब दिया: "यदि आपको मेरी बात पर ज़रा भी संदेह है, तो आप खुद फीता लेकर पूरी पृथ्वी को नाप लीजिए! यदि यह जगह केंद्र से एक इंच भी इधर-उधर निकले, तो मैं हार मान लूँगा।"

विद्वान खिसिया गया। वह पूरी पृथ्वी कैसे नाप सकता था? उसने चिढ़कर कहा, "चलो, यह तो तुमने टाल दिया। अब मेरे दूसरे सवाल का जवाब दो—आसमान में कितने तारे हैं?"

बीरबल का दूसरा जवाब: बीरबल ने तुरंत एक सैनिक को आदेश दिया कि वह शाही बाड़े से एक 'भेड़' को लेकर आए। जब सैनिक एक बहुत ही घने बालों वाली भेड़ लेकर आया, तो बीरबल ने उस भेड़ को विद्वान के सामने खड़ा कर दिया।

बीरबल ने गंभीर होकर कहा: "विद्वान महोदय! आपके दूसरे सवाल का जवाब यह है कि आसमान में ठीक उतने ही तारे हैं, जितने इस भेड़ के शरीर पर बाल हैं!"

विद्वान का मुँह खुला का खुला रह गया। उसने गुस्से में कहा, "यह कैसा बेतुका जवाब है? भेड़ के बाल कौन गिन सकता है?"

बीरबल ने हंसते हुए उसी की भाषा में जवाब दिया: "महोदय! आसमान के तारे गिनने से तो आसान है इस भेड़ के बाल गिनना! यदि आपको मेरी गिनती पर शक है, तो आप आराम से बैठकर पहले इस भेड़ के बाल गिन लीजिए, और फिर आसमान के तारे गिन कर मिलान कर लीजिए। गिनती बिल्कुल एक जैसी ही निकलेगी!"

विद्वान का घमंड चूर-चूर: बगदाद का वह विद्वान समझ गया कि उसने जिन बेतुके और असंभव सवालों से मुग़ल दरबार को हराने की कोशिश की थी, बीरबल ने उतने ही बेतुके और अचूक जवाब देकर उसका सारा घमंड चूर-चूर कर दिया है।

उसने अपना सिर झुका लिया और कहा, "शहंशाह! मैं हार मानता हूँ। आपके वज़ीर बीरबल के पास सचमुच हर सवाल का ऐसा जवाब है, जिसे कोई काट नहीं सकता।"

अकबर ने ज़ोरदार ठहाका लगाया और बीरबल को उनकी इस हाज़िरजवाबी के लिए शानदार इनाम दिया।

🎉 कहानी समाप्त

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