शेर और मच्छर — झूठा अहंकार और छोटी सूई

गर्मियों की एक दोपहर थी। जंगल का राजा शेर एक पेड़ की घनी छांव में आराम से सो रहा था।
तभी वहां एक 'मच्छर' भिनभिनाता हुआ आया और शेर के कानों के पास आकर गाने लगा— "भिनन... भिनन..."
मच्छर की आवाज़ से शेर की नींद टूट गई। शेर ने गुस्से में अपना भारी पंजा कान पर मारा, लेकिन मच्छर उड़ गया। थोड़ी देर बाद मच्छर फिर आया और शेर की नाक पर बैठ गया।
शेर ने दहाड़ते हुए मच्छर से कहा: "अरे ओ तुच्छ जीव! मेरी नज़रों से दूर हो जा, वरना मैं तुझे एक झटके में मसल दूँगा। तू नहीं जानता कि मैं जंगल का सबसे ताक़तवर राजा हूँ!"
मच्छर की चुनौती: मच्छर बिल्कुल नहीं डरा। वह हंसा और बोला: "तुम राजा होगे अपने घर के! मुझे तुमसे कोई डर नहीं लगता। तुम में ताक़त होगी, लेकिन मेरे पास भी हथियार है। अगर हिम्मत है तो मुझसे लड़कर दिखाओ!"
मच्छर की यह बात सुनकर शेर का घमंड जाग उठा। उसने कहा: "तू इतना सा होकर मुझे चुनौती दे रहा है? आजा!"
घमंड का खून: मच्छर ने तुरंत शेर पर हमला कर दिया। वह तेज़ी से उड़ता और सीधा शेर की 'नाक' पर डंक मारता। शेर गुस्से में अपने ही पंजे अपनी नाक पर मारता, जिससे मच्छर तो उड़ जाता, लेकिन शेर के अपने ही तेज़ 'नाखूनों' से उसकी नाक छिल जाती।
मच्छर कभी शेर के कान के अंदर घुसता, कभी उसकी आंखों पर डंक मारता और कभी उसकी पीठ पर काटता।
शेर मच्छर को मारने के चक्कर में बार-बार अपने ही शरीर पर पंजे मारता रहा। कुछ ही देर में शेर का पूरा चेहरा और शरीर अपने ही पंजों की खरोंचों से लहुलुहान हो गया। शेर दर्द और थकान से चूर-चूर हो गया।
अंततः शेर ने ज़मीन पर गिरकर हार मान ली: "भाई मच्छर! मुझे माफ़ कर दो। तुम जीत गए और मैं हार गया।"
शेर को हराने के बाद मच्छर का घमंड भी सातवें आसमान पर पहुँच गया। वह अपनी जीत के गीत गाता हुआ खुशी से बिना देखे उड़ने लगा।
परंतु उड़ते-उड़ते वह पास ही एक पेड़ पर लगे 'मकड़ी के जाले' में जा फंसा! मच्छर ने निकलने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह निकल नहीं पाया। एक छोटी सी मकड़ी ने उसे पकड़ा और खा गई।
नीति / सीख: कभी भी किसी को उसके आकार से 'कमज़ोर' नहीं समझना चाहिए। अहंकार बड़े-बड़ों को मिट्टी में मिला देता है, फिर चाहे वह शेर का अहंकार हो या शेर को हराने वाले मच्छर का।
📜 पंचतंत्र की और कहानियाँ
बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम
एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।
पढ़ें →सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत
एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।
पढ़ें →बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी
एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।
पढ़ें →चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई
एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।
पढ़ें →खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत
एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।
पढ़ें →नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश
एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।
पढ़ें →