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😄 शेखचिल्ली

आसमान का रास्ता

लोक परंपरा4 मिनट का पठन
आसमान का रास्ता

शेख चिल्ली एक दिन अपनी खटिया पर लेटा आसमान में बादलों को देख रहा था।

उसने सोचा: "ये बादल कितने सुंदर हैं। काश! इंसान के पास आसमान तक जाने का कोई रास्ता होता, तो हम रोज़ ऊपर जाकर परियों से मिल सकते और बादलों की सवारी कर सकते।"

उसने तय किया कि वह पूरे गाँव की भलाई के लिए ज़मीन से लेकर आसमान तक एक 'रास्ता' बनाएगा।

शेख चिल्ली ने गाँव से बहुत सारी ईंटें और मिट्टी इकट्ठा की। वह अपने घर के आँगन में खड़ा हो गया और ईंटों के ऊपर ईंटें रखकर एक सीधा और ऊँचा खंभा बनाने लगा।

"एक के ऊपर एक ईंट रखता जाऊँगा, और एक दिन यह खंभा आसमान को छू लेगा! फिर मैं इसके ऊपर चढ़कर सीधा बादलों में पहुँच जाऊँगा।" शेख चिल्ली खुशी-खुशी अपनी इमारत बना रहा था।

उसने दिन-रात मेहनत की। कुछ ही दिनों में वह खंभा काफी ऊँचा हो गया। लेकिन चूँकि शेख चिल्ली को कोई इंजीनियरिंग या घर बनाने का ज्ञान नहीं था, उसने ईंटों को बिना किसी मज़बूत सहारे के एक सीधी लाइन में रख दिया था।

खंभा बहुत कमज़ोर हो चुका था और हवा के झोंकों से हिलने लगा था।

एक दिन जब शेख चिल्ली उस खंभे को और ऊँचा करने के लिए सबसे ऊपर एक ईंट रखने की कोशिश कर रहा था, तो अचानक तेज़ हवा का एक झोंका आया।

वह बिना सहारे का ईंटों का खंभा अपना संतुलन खो बैठा और एक बहुत बड़े धमाके के साथ 'भरभरा कर ज़मीन पर गिर पड़ा!'

ईंटें चारों तरफ बिखर गईं और शेख चिल्ली भी उनके साथ नीचे धूल में जा गिरा।

धमाके की आवाज़ सुनकर गाँव के लोग इकट्ठा हो गए। उन्होंने जब शेख चिल्ली को धूल में सना हुआ देखा, तो एक आदमी ने हँसते हुए पूछा: "अरे शेख! यह तू क्या कर रहा था? यह ईंटों का पहाड़ क्यों बना रहा था?"

शेख चिल्ली ने अपने कपड़े झाड़ते हुए और बिल्कुल निराश हुए बिना बहुत ही शानदार जवाब दिया: "अरे भाइयो! मैं तो तुम्हारे लिए आसमान तक जाने का रास्ता बना रहा था। मेरा रास्ता तो बिल्कुल सही और सीधा बन रहा था। लेकिन लगता है कि ऊपर बैठे 'देवताओं' और 'परियों' को यह पसंद नहीं आया कि हम इंसान उनके घर में घुसें! उन्होंने ही ऊपर से लात मारकर मेरा यह रास्ता तोड़ दिया है। भगवान की मर्ज़ी के आगे हम क्या कर सकते हैं!"

शेख चिल्ली का यह अटूट आत्मविश्वास और बेतुका तर्क सुनकर गाँव वाले हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। वे समझ गए कि शेख चिल्ली चाहे आसमान से गिर जाए, लेकिन उसकी 'बहानेबाज़ी' और खयाली पुलाव की आदत कभी ज़मीन पर नहीं आएगी!

🎉 कहानी समाप्त

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