रंगा हुआ ज़ेबरा

शेख चिल्ली के पास एक बहुत ही बूढ़ा, आलसी और सफेद रंग का 'गधा' था। वह गधा इतना आलसी था कि एक कदम चलने में भी उसे मौत आती थी।
शेख चिल्ली को अपने गधे से चिढ़ होने लगी थी। एक दिन गाँव में किसी मुसाफिर ने बताया कि विदेशों में एक खास तरह का जानवर होता है जिसे 'ज़ेबरा' कहते हैं। ज़ेबरा घोड़े जैसा होता है, उसके शरीर पर काली-सफेद धारियाँ होती हैं और वह बहुत महँगा बिकता है।
शेख चिल्ली की आँखों में लालच आ गया। उसने सोचा कि अगर वह अपने इस बेकार से सफेद गधे को 'ज़ेबरा' बना दे, तो बाज़ार में उसे इसके बहुत सारे पैसे मिल सकते हैं।
उसने एक बाल्टी में बहुत सारा 'काला कोयला और कालिख' घोला। फिर उसने एक ब्रश लिया और अपने उस सफेद गधे के पूरे शरीर पर बहुत ही ध्यान से काली-काली 'धारियाँ' रंग दीं।
कुछ ही घंटों में वह आलसी गधा एक बहुत ही अजीबोगरीब 'ज़ेबरा' जैसा दिखने लगा।
शेख चिल्ली बहुत खुश हुआ। उसने गधे के गले में एक सुंदर सी घंटी बाँधी और उसे लेकर शहर के सबसे बड़े पशु बाज़ार में पहुँच गया।
बाज़ार में शेख चिल्ली ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ें लगाने लगा, "आइए सेठ जी! आइए! अरब देश का एक बहुत ही दुर्लभ और जादुई जानवर 'ज़ेबरा' खरीदिए! जो इसे खरीदेगा, उसकी किस्मत चमक जाएगी!"
कुछ अमीर व्यापारी उस अजीब से जानवर को देखने के लिए इकट्ठा हो गए। गधे का रंग-रूप देखकर लोग सच में धोखा खा गए। एक सेठ ने उस 'ज़ेबरा' को एक हज़ार रुपये में खरीदने का सौदा पक्का कर लिया।
शेख चिल्ली खुशी से फूला नहीं समा रहा था। वह सेठ से पैसे लेने ही वाला था कि तभी...
आसमान में अचानक घने काले बादल छा गए और ज़ोरदार 'बारिश' शुरू हो गई!
बाज़ार में भगदड़ मच गई। शेख चिल्ली का 'ज़ेबरा' भी उसी बारिश में भीगने लगा। पानी की तेज़ बौछारों ने अपना काम कर दिया। कुछ ही मिनटों में गधे के शरीर पर लगा हुआ वह सारा 'काला कोयला' धुलकर पानी के साथ नीचे ज़मीन पर बहने लगा।
काली धारियाँ मिट गईं और वह जादुई ज़ेबरा वापस उसी आलसी और भद्दे 'सफेद गधे' में बदल गया!
गधे ने बारिश से घबराकर अपनी असली आवाज़ में ज़ोर-ज़ोर से रेंकना शुरू कर दिया— "ढेंचू! ढेंचू!"
सेठ और बाज़ार के लोगों ने जब यह नज़ारा देखा, तो वे सब हक्के-बक्के रह गए और फिर उनकी ज़ोरदार हँसी फूट पड़ी।
"अरे ओ धोखेबाज़ शेख चिल्ली! तू हमें चूना लगा रहा था? एक गधे पर कोयला पोतकर उसे ज़ेबरा बता रहा था?" सेठ ने गुस्से में अपना जूता निकाल लिया।
शेख चिल्ली के पास कोई बहाना नहीं बचा था। वह अपनी जान बचाने के लिए अपने उस 'रंगे हुए गधे' को वहीं छोड़कर ऐसी तेज़ दौड़ लगाकर भागा कि फिर कभी उस बाज़ार में उसकी शक्ल नहीं दिखी।
😄 शेखचिल्ली की और कहानियाँ
शेख चिल्ली और अंडों की टोकरी (सपनों का महल)
शेख चिल्ली बाज़ार में अंडों की टोकरी सिर पर रखकर खयाली पुलाव पकाने लगा। सपनों में उसने मुर्गियों से लेकर महल तक बना लिया, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि...
पढ़ें →जिस डाल पर बैठा, उसी को काटना
शेख चिल्ली पेड़ की सूखी डाल काटने गया, लेकिन अपनी बेवकूफी में उसी डाल के आखिरी सिरे पर बैठकर कुल्हाड़ी चलाने लगा।
पढ़ें →कौवा कान ले गया!
जब कुछ शरारती लड़कों ने शेख चिल्ली से कहा कि कौवा उसका कान ले गया है, तो शेख बिना अपना कान चेक किए कौवे के पीछे भागने लगा।
पढ़ें →गधों की गिनती का चक्कर
शेख चिल्ली ने 10 गधे खरीदे। जब वह गधे पर बैठकर गधों को गिनता तो 9 निकलते, और नीचे उतरकर गिनता तो 10! उसे लगा कोई जादू है।
पढ़ें →शेख चिल्ली और तेल का मटका
शेख चिल्ली सिर पर तेल का मटका रखकर मज़दूरी के दो रुपयों से अमीर बनने के सपने देखने लगा और ख्यालों में लाठी चलाते हुए मटका फोड़ दिया।
पढ़ें →अँधेरे की चीज़ उजाले में ढूँढना
शेख चिल्ली का सिक्का एक अँधेरी गली में गिर गया, लेकिन वह उसे वहाँ ढूँढने के बजाय लालटेन की रोशनी में ढूँढने लगा क्योंकि वहाँ उजाला था!
पढ़ें →