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👑 अकबर-बीरबल

धोबी और कुम्हार — काले हाथी को सफेद करने की साज़िश और बीरबल का अचूक दांव

लोक परंपरा — अकबर-बीरबल5 मिनट का पठन
धोबी और कुम्हार — काले हाथी को सफेद करने की साज़िश और बीरबल का अचूक दांव

आगरा शहर में दो अत्यंत कुशल कारीगर रहते थे—एक था शहर का सबसे प्रसिद्ध 'धोबी' जिसका नाम रामू था, और दूसरा था एक बहुत ही धूर्त और ईर्ष्यालु 'कुम्हार' जिसका नाम सोहन था।

रामू धोबी इतनी सफाई से कपड़े धोता था कि उसके धोए हुए कपड़ों की चमक शाही महल तक मशहूर थी। उसकी बढ़ती लोकप्रियता और धन-दौलत देखकर सोहन कुम्हार रामू से मन ही मन बहुत जलता था। वह हमेशा रामू को नीचा दिखाने और उसे बर्बाद करने की साज़िशें रचता रहता था।

कुम्हार की खौफनाक साज़िश: एक दिन सोहन कुम्हार को रामू को फंसाने की एक भयंकर तरकीब सूझी। वह सीधा दीवान-ए-खास में शहंशाह अकबर के पास पहुँचा।

सोहन ने शहंशाह के सामने सिर झुकाकर एक बहुत ही मीठी और चापलूसी भरी आवाज़ में कहा, "जहाँपनाह! आपके शाही हाथीखाने में एक से बढ़कर एक शानदार और विशाल 'काले' हाथी हैं। परंतु मुझे लगता है कि मुग़ल सल्तनत की शान एक 'सफेद हाथी' से और अधिक बढ़ जाएगी।"

अकबर ने हैरानी से कहा, "सफेद हाथी? परंतु वे तो केवल बर्मा या थाईलैंड जैसे देशों में पाए जाते हैं। हम यहाँ सफेद हाथी कहाँ से लाएं?"

सोहन ने अपनी चाल चलते हुए कहा, "हुज़ूर! आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है। हमारे शहर का रामू धोबी कोई मामूली धोबी नहीं है। उसके हाथों में जादू है! वह इतना महान है कि यदि वह आपके सबसे विशाल और काले हाथी को साबुन और मेहनत से धो दे, तो वह हाथी बिल्कुल बर्फ जैसा 'सफेद' हो जाएगा! आप बस उसे आदेश दे दीजिए।"

धोबी की मौत का फरमान: अकबर (जो कभी-कभी बेतुकी बातों में आ जाते थे) इस विचार से अत्यंत रोमांचित हो गए। उन्होंने तुरंत रामू धोबी को दरबार में बुलवाया और उसे अपना सबसे बड़ा 'काला हाथी' सौंपते हुए हुक्म दिया: "रामू! तुम्हें इस काले हाथी को धोकर बिल्कुल सफेद करना है। यदि तुम सात दिन के भीतर इसे सफेद हाथी न बना सके, तो तुम्हारा सिर कलम कर दिया जाएगा!"

रामू धोबी के तो होश ही उड़ गए। दुनिया का कोई भी साबुन या पानी किसी काले हाथी की चमड़ी को सफेद नहीं कर सकता था। वह रोता-बिलखता हुआ सीधा बीरबल के घर पहुँचा और उनके पैरों में गिरकर अपनी जान की भीख मांगने लगा। बीरबल ने पूरी साज़िश सुनी और समझ गए कि यह सब उस ईर्ष्यालु कुम्हार सोहन का किया-धरा है। बीरबल ने रामू को एक तरकीब समझाई और उसे वापस दरबार भेज दिया।

धोबी का पलटवार (बीरबल की तरकीब): अगले दिन रामू धोबी पूरे आत्मविश्वास के साथ दरबार में हाज़िर हुआ।

अकबर ने पूछा, "क्या बात है रामू? क्या तुमने हाथी को धोने की तैयारी कर ली है?"

रामू ने हाथ जोड़कर कहा, "जहाँपनाह! मैं आपके हाथी को धोकर बिल्कुल सफेद कर दूँगा। पानी और साबुन का इंतज़ाम हो गया है। बस एक छोटी सी समस्या है।"

अकबर: "क्या समस्या है?"

रामू: "हुज़ूर! जब मैं इतने बड़े हाथी को साबुन लगाऊँगा और रगड़ूँगा, तो उसे खड़ा करने के लिए मुझे एक बहुत ही विशालकाय 'मिट्टी के टब' की आवश्यकता होगी। और यह मिट्टी का टब इतना बड़ा और मज़बूत होना चाहिए कि जब हाथी उसमें पैर रखे, तो वह टूटे नहीं!"

रामू ने आगे कहा, "जहाँपनाह! पूरे आगरा में सोहन कुम्हार से बेहतर मिट्टी के बर्तन कोई नहीं बना सकता। कृपया आप सोहन को आदेश दें कि वह मुझे जल्दी से हाथी को नहलाने के लिए एक बहुत बड़ा और मज़बूत मिट्टी का टब बनाकर दे दे!"

कुम्हार अपने ही बिछाए जाल में: अकबर को यह बात बिल्कुल तार्किक लगी। उन्होंने तुरंत सोहन कुम्हार को बुलाया और उसे एक विशालकाय मिट्टी का टब बनाने का आदेश दे दिया।

सोहन कुम्हार बुरी तरह फंस चुका था। वह जानता था कि इतना बड़ा मिट्टी का टब बनाना और उसे आग में पकाना लगभग असंभव है, और यदि वह बन भी गया, तो हाथी के एक ही पैर रखते वह टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। परंतु वह शहंशाह के आदेश को मना नहीं कर सकता था।

कई दिनों की कड़ी मेहनत और भारी खर्चे के बाद, सोहन ने किसी तरह एक बहुत बड़ा मिट्टी का टब तैयार किया।

टब का टूटना और साज़िश का अंत: टब को शाही बाग में रखा गया। रामू धोबी ने हाथी को नहलाने के लिए टब के पास लाया। जैसे ही हाथी ने पानी से भरे उस मिट्टी के टब में अपना पहला भारी पैर रखा— 'कड़ाक!'

टब के हज़ारों टुकड़े हो गए और सारा पानी बह गया!

रामू ने तुरंत शहंशाह के सामने हाथ जोड़कर कहा, "जहाँपनाह! मैंने तो कहा था कि मैं हाथी सफेद कर दूँगा, परंतु सोहन कुम्हार का बनाया हुआ यह टब तो बिल्कुल कच्चा और कमज़ोर निकला। इसमें मेरी क्या गलती है?"

अकबर क्रोधित हो गए। उन्होंने सोहन कुम्हार को बुलाया। सोहन अब तक समझ चुका था कि बीरबल ने उसकी साज़िश को उसी पर भारी कर दिया है। वह कांपता हुआ शहंशाह के पैरों में गिर पड़ा और उसने अपनी ईर्ष्या और साज़िश कबूल कर ली।

अकबर ने सोहन कुम्हार को उसकी इस धूर्तता के लिए भारी जुर्माना लगाया और रामू धोबी को इज़्ज़त के साथ घर भेज दिया गया।

(यह कहानी सिखाती है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह अक्सर खुद ही उसमें गिर जाता है।

🎉 कहानी समाप्त

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