'ईंट का जवाब पत्थर से देना'

'अँधेरी गली' में दो पड़ोसियों के बीच हमेशा झगड़ा रहता था। एक का नाम था 'गुस्सेल' और दूसरे का 'बदला'। दोनों एक-दूसरे की जान के दुश्मन थे।
एक दिन गुस्सेल ने गलती से अपना कचरे का थैला बदला के घर के सामने फेंक दिया। बदला ने देखा, तो गुस्से से लाल-पीला हो गया।
बदला ने बिना कुछ सोचे, तुरंत गुस्से से अपना कचरे का थैला उठाया और सीधा गुस्सेल के घर के दरवाज़े पर पटक दिया!
गुस्सेल बाहर निकला, उसने थैला देखा और चिल्लाया, 'बदला, तूने हिम्मत कैसे की?'
बदला ने भी चिल्लाकर जवाब दिया, 'तूने कचरा फेंका, इसलिए मैंने पलटकर फेंका।'
दोनों के बीच लड़ाई शुरू हो गई। पड़ोसियों ने आकर बीच में मुश्किल से छुड़ाया।
(यह मुहावरा बताता है कि जब कोई हमारे साथ बुरा करे, तो हम भी पलटकर उसे उतना ही बुरा जवाब देते हैं)।
📖 मुहावरों की कहानियाँ की और कहानियाँ
"नाच न जाने आँगन टेढ़ा"
अपनी कमी छिपाने के लिए दूसरों पर या परिस्थितियों पर दोष मढ़ना।
पढ़ें →"अंधों में काना राजा"
मूर्खों के बीच थोड़ा सा पढ़ा-लिखा या ज्ञानी इंसान भी बहुत महान माना जाता है।
पढ़ें →"अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत"
समय निकल जाने के बाद पछताने से या रोने से कोई फायदा नहीं होता, इसलिए हर काम समय पर करना चाहिए।
पढ़ें →"जिसकी लाठी उसकी भैंस"
जिसके पास ताक़त या सत्ता होती है, जीत उसी की होती है और उसी का कब्ज़ा मान लिया जाता है।
पढ़ें →"बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद"
मूर्ख या अज्ञानी इंसान किसी मूल्यवान या गुणवान चीज़ की कद्र नहीं कर सकता, क्योंकि उसे उसकी परख नहीं होती।
पढ़ें →"थोथा चना बाजे घना"
'थोथा' मतलब खाली। जिस इंसान में गुण या ज्ञान कम होता है, वह अपनी अहमियत दिखाने के लिए दिखावा बहुत ज़्यादा करता है और बहुत बड़ी-बड़ी डिंगें मारता है।
पढ़ें →