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गोनू झा और चोरों की खेती

लोक परंपरा — गोनू झा6 मिनट का पठन
गोनू झा और चोरों की खेती

गोनू झा बहुत ही अक्लमंद इंसान थे, लेकिन वे शारीरिक मेहनत करने से थोड़ा कतराते थे। उनके पास गाँव के बाहर एक बहुत बड़ा खेत था। बरसात का मौसम आने वाला था और खेत की जुताई (Plowing) करने का समय हो गया था।

खेत जोतने के लिए बैलों और मज़दूरों की ज़रूरत थी, जिसमें काफी पैसा और मेहनत लगनी थी। गोनू झा अपनी चारपाई पर लेटे-लेटे सोच रहे थे कि बिना पैसा खर्च किए खेत की जुताई कैसे करवाई जाए।

उन्हीं दिनों गाँव में 'चोरों' का एक बहुत ही खतरनाक गिरोह सक्रिय था। वे चोर रात के अँधेरे में किसी भी अमीर घर में घुसते और सारा माल साफ कर देते थे।

एक दिन गोनू झा को भनक लग गई कि आज रात वे चोर उनके (गोनू झा के) घर में डाका डालने वाले हैं।

कोई आम इंसान होता तो डर के मारे पुलिस या पड़ोसियों को बुला लेता। लेकिन यह गोनू झा थे। उनका दिमाग चोरों से भी दो कदम आगे चलता था। उन्हें अपना खेत जुतवाने का एक बहुत ही 'शानदार और मुफ्त' तरीका मिल गया था।

रात हुई। गोनू झा जानते थे कि चोर उनके घर के बाहर झाड़ियों में छिपे हुए हैं और उनके सोने का इंतज़ार कर रहे हैं।

गोनू झा ने अपनी पत्नी को ज़ोर से आवाज़ लगाई ताकि बाहर छिपे चोर भी सुन सकें। "अरी भाग्यवान! ज़रा यहाँ तो आना। एक बहुत ही ज़रूरी और गुप्त बात करनी है।"

पत्नी पास आई, तो गोनू झा ने जानबूझकर थोड़ी ऊँची आवाज़ में (लेकिन फुसफुसाने के नाटक के साथ) कहना शुरू किया: "सुनो! आजकल गाँव में चोरों का बहुत आतंक है। मुझे अपने घर में रखे 'सोने के ज़ेवरों और अशर्फियों' की बहुत फिक्र हो रही है। अगर चोर आ गए तो हमारी ज़िंदगी भर की कमाई लुट जाएगी।"

पत्नी ने घबराकर पूछा, "तो फिर हम क्या करें? सारा सोना कहाँ छिपाएँ?"

गोनू झा ने बहुत ही चालाकी से कहा, "तुम बिल्कुल फिक्र मत करो! मैंने आज दोपहर को ही एक बहुत बड़ी अक्लमंदी का काम कर दिया है। मैंने घर का सारा सोना, जेवर और चाँदी के सिक्के एक 'बड़े से पीतल के घड़े' में बंद किए और उसे ले जाकर 'अपने उस बड़े वाले खेत के बिल्कुल बीचों-बीच ज़मीन में गहरा गाड़ दिया है!' अब किसी चोर के बाप की भी हिम्मत नहीं है कि वह पूरे खेत की मिट्टी खोदकर हमारा खज़ाना ढूँढ सके!"

बाहर झाड़ियों में छिपे चोरों के सरदार ने जब यह बात सुनी, तो उसकी आँखें लालच से चमक उठीं। उसने अपने साथियों को इशारा किया, "अरे बेवकूफ़ो! घर में घुसने का कोई फायदा नहीं है। सारा माल तो खेत में गड़ा है। चलो, सीधे खेत में चलते हैं!"

गोनू झा और उनकी पत्नी आराम से सो गए, और इधर चारों चोर कुदाल (Spades) और फावड़े लेकर गोनू झा के उस सूखे खेत में पहुँच गए।

रात का घुप अँधेरा था। चोरों को यह नहीं पता था कि 'घड़ा' खेत में किस जगह गड़ा है। सरदार ने कहा, "खज़ाना बहुत बड़ा है। खेत के एक-एक चप्पे की मिट्टी खोद डालो, लेकिन वह घड़ा हमें सूरज निकलने से पहले चाहिए!"

चोरों ने पूरी ताक़त से ज़मीन खोदनी शुरू कर दी। खज़ाने के लालच में उन्होंने न तो प्यास देखी और न ही थकावट। वे पूरी रात पसीना बहाते रहे और कुदाल चलाते रहे।

"यहाँ नहीं है... आगे खोदो!" "दाएँ खोदो, बाएँ खोदो!"

सुबह की पहली किरण फूटने तक, उन चारों लालची चोरों ने खज़ाने की तलाश में गोनू झा के 'पूरे के पूरे खेत' की मिट्टी को बहुत गहराई तक खोद डाला था! पूरे खेत की शानदार और गहरी जुताई हो चुकी थी।

लेकिन उन्हें खेत में कोई पीतल का घड़ा या खज़ाना नहीं मिला।

सूरज निकलते ही चोर समझ गए कि गोनू झा ने उन्हें अपनी बातों के जाल में फँसाकर बहुत बड़ा बेवकूफ़ बनाया है। अगर वे अब वहाँ रुकते, तो गाँव वाले उन्हें पकड़ लेते। चोर थके-हारे, पसीने से लथपथ और गालियाँ बकते हुए वहाँ से भाग खड़े हुए।

सुबह-सुबह गोनू झा दातुन चबाते हुए अपने खेत पर पहुँचे। उन्होंने देखा कि उनका पूरा खेत किसी 'मँजे हुए किसान' की तरह बहुत ही गहराई से जोता गया था। मिट्टी एकदम मुलायम हो चुकी थी।

गोनू झा ने हँसते हुए आसमान की तरफ देखा और बोले, "वाह रे मेरे मज़दूरों! तुम तो बहुत ही ईमानदार निकले। रात भर में ही मेरा सारा काम मुफ्त में कर दिया!"

उसी दिन गोनू झा ने उस मुफ्त में जुते हुए खेत में बीज बो दिए और उस साल उनके खेत में पूरे गाँव में सबसे शानदार फसल हुई।

🎉 कहानी समाप्त

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