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गोनू झा और झूठा ज्योतिषी

लोक परंपरा — गोनू झा6 मिनट का पठन
गोनू झा और झूठा ज्योतिषी

एक बार मिथिला राज्य में एक बहुत ही ढोंगी और चालाक ज्योतिषी आया। उसने गेरुए रंग के भारी-भरकम कपड़े पहने हुए थे, माथे पर बड़ा सा भस्म का तिलक लगाया हुआ था और गले में रुद्राक्ष की दर्जनों मालाएँ लटकी हुई थीं।

वह बाज़ार में एक ऊँचे आसन पर बैठ गया और लोगों का भविष्य बताने का नाटक करने लगा। वह लोगों को डराकर उनसे पैसे ऐंठता था। "तुम्हारे ऊपर शनि की दशा है! तुम्हारी जान को खतरा है! मुझे सोने का दान करो, मैं शांति पूजा करूँगा।" ढोंगी ज्योतिषी लोगों को बेवकूफ़ बना रहा था।

धीरे-धीरे उस ज्योतिषी के 'चमत्कारों' की झूठी खबरें उड़ते-उड़ते महाराज के कानों तक पहुँच गईं।

महाराज ने उस ज्योतिषी को अपने दरबार में बुलवाया। ज्योतिषी ने दरबार में आते ही अपनी आँखें बंद कीं, कुछ मंतर बुदबुदाए और महाराज से कहा: "महाराज! मैंने अपने 'दिव्य ज्ञान' से देख लिया है कि आने वाले कुछ महीनों में मिथिला राज्य पर एक बहुत बड़ा संकट आने वाला है। एक भयंकर भूकंप आएगा और यह राजमहल गिर सकता है!"

भूकंप की बात सुनकर महाराज और सभी दरबारी बुरी तरह घबरा गए। महाराज ने हाथ जोड़कर पूछा, "हे महात्मन्! इस भयंकर संकट से बचने का कोई तो उपाय होगा?"

ढोंगी ज्योतिषी तो इसी मौके की तलाश में था। उसने तुरंत कहा, "उपाय है महाराज! अगर आप मुझे ग्यारह हज़ार सोने के सिक्के और एक हज़ार गायें दान में दें, तो मैं एक ऐसा 'महायज्ञ' करूँगा जिससे यह भूकंप का संकट टल जाएगा!"

महाराज डर के मारे तुरंत खज़ांची को पैसे लाने का आदेश देने ही वाले थे कि तभी दरबार में बैठे 'गोनू झा' अपनी जगह से खड़े हो गए। गोनू झा को पहली नज़र में ही समझ आ गया था कि यह आदमी एक नंबर का ढोंगी और लुटेरा है।

गोनू झा ने महाराज से कहा, "महाराज! ज़रा रुकिए। यह महाराज बहुत बड़े ज्योतिषी हैं, इन्होंने हमारे राज्य का भविष्य तो देख लिया, लेकिन मैं इनके ज्ञान की एक छोटी सी परीक्षा लेना चाहता हूँ।"

ज्योतिषी ने घमंड से अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए कहा, "पूछो मूर्ख! मैं त्रिकालदर्शी हूँ। मैं हर सवाल का जवाब दे सकता हूँ।"

गोनू झा धीरे-धीरे चलते हुए उस ज्योतिषी के बिल्कुल पास जाकर खड़े हो गए।

गोनू झा ने बहुत ही मासूमियत से पूछा, "महाराज! आप त्रिकालदर्शी हैं। क्या आप अपना ज्ञान लगाकर यह बता सकते हैं कि इस वक्त मेरे (गोनू झा के) दिमाग में क्या चल रहा है? और 'अगले एक सेकंड में' आपके साथ क्या होने वाला है?"

ज्योतिषी ने अपनी आँखें बंद कीं, उँगलियों पर कुछ हिसाब लगाया और बहुत ही आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराते हुए बोला: "बेटा! तुम्हारे दिमाग में मेरे प्रति अपार 'श्रद्धा और भक्ति' चल रही है। और रही बात मेरी, तो अगले ही पल मुझे महाराज से बहुत बड़ा 'दान और सम्मान' मिलने वाला है। मेरे ग्रह बहुत ऊँचाइयों पर हैं!"

ज्योतिषी का यह जवाब खत्म भी नहीं हुआ था कि गोनू झा ने अपना हाथ हवा में उठाया और पूरी ताक़त लगाकर उस ढोंगी ज्योतिषी के गाल पर एक बहुत ही ज़ोरदार 'तमाचा' जड़ दिया— 'चटाक्!'

तमाचा इतना ज़ोरदार था कि ज्योतिषी के सिर की पगड़ी उड़कर दूर जा गिरी और वह चारों खाने चित्त होकर ज़मीन पर औंधे मुँह गिर पड़ा!

दरबार में मौजूद महाराज, मंत्री और सिपाही इस अचानक हुए हमले को देखकर हक्के-बक्के रह गए। "गोनू झा! यह तुमने क्या किया? एक साधु पर हाथ उठा दिया?" महाराज गुस्से से चिल्लाए।

गोनू झा ने अपना हाथ झाड़ते हुए बहुत ही शांति और व्यंग्य भरी मुस्कान के साथ महाराज की तरफ देखा और कहा:

"महाराज! यही तो मैं आपको समझाना चाहता था। जो इंसान इतना बड़ा 'त्रिकालदर्शी' होने का दावा करता है, जो इंसान महीनों बाद आने वाले भूकंप को देख सकता है... वह बेवकूफ़ इंसान यह नहीं देख पाया कि 'अगले ही सेकंड' उसके गाल पर एक ज़ोरदार तमाचा पड़ने वाला है!"

गोनू झा ने ज़मीन पर पड़े उस ज्योतिषी की तरफ इशारा करते हुए आगे कहा, "महाराज! जिसे अपने खुद के भविष्य में पड़ने वाले 'जूते और तमाचे' दिखाई नहीं देते, वह पूरे राज्य का भविष्य क्या खाक बताएगा? यह एक नंबर का ठग है जो आपको लूटने आया था!"

यह सुनते ही महाराज की आँखों से अंधविश्वास की पट्टी खुल गई। पूरी बात का असली मतलब समझ आते ही पूरा दरबार ज़ोर-ज़ोर से ठहाके लगाकर हँसने लगा।

महाराज ने तुरंत सिपाहियों को आदेश दिया, "इस ठग ज्योतिषी को पकड़कर जेल में डाल दो!" और इस तरह, गोनू झा ने अपनी बुद्धि और एक ज़ोरदार 'प्रैक्टिकल तमाचे' से राज्य का खज़ाना लुटने से बचा लिया!

🎉 कहानी समाप्त

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