मुल्ला नसरुद्दीन और बच्चा देने वाला पतीला

मुल्ला नसरुद्दीन के पड़ोस में 'कादिर' नाम का एक बहुत ही अमीर और लालची व्यापारी रहता था। कादिर इतना कंजूस था कि वह अपने पड़ोसियों को ज़रूरत पड़ने पर एक सुई तक उधार नहीं देता था। अगर देता भी, तो उसके बदले में कुछ न कुछ फायदा ज़रूर निकालता था।
एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन के घर कुछ खास मेहमान आने वाले थे। दावत के लिए मुल्ला को एक बहुत बड़े 'पतीले' की ज़रूरत पड़ी। मुल्ला के घर में इतना बड़ा बर्तन नहीं था, इसलिए वे अपने लालची पड़ोसी कादिर के दरवाज़े पर गए।
मुल्ला ने दरवाज़ा खटखटाया और कहा, "कादिर भाई! मेरे घर कुछ मेहमान आ रहे हैं। क्या आप एक दिन के लिए अपना वह बड़ा वाला ताँबे का पतीला मुझे उधार दे सकते हैं? कल सुबह होते ही मैं उसे धो-पोंछ कर वापस लौटा दूँगा।"
कादिर पहले तो मना करने लगा, लेकिन फिर उसने सोचा कि मुल्ला एक इज़्ज़तदार आदमी है, वह बर्तन वापस तो कर ही देगा। कादिर ने अपना वह बड़ा सा ताँबे का पतीला मुल्ला को दे दिया।
अगले दिन सुबह, मुल्ला नसरुद्दीन कादिर का वह बड़ा पतीला वापस करने आए। लेकिन जब मुल्ला ने वह पतीला कादिर के हाथों में दिया, तो कादिर ने देखा कि उस बड़े पतीले के अंदर एक बहुत ही सुंदर और नया 'छोटा सा ताँबे का पतीला' भी रखा हुआ है।
कादिर ने हैरानी से पूछा, "मुल्ला जी! यह बड़ा पतीला तो मेरा है, लेकिन इसके अंदर रखा यह छोटा पतीला किसका है? यह मेरा नहीं है।"
मुल्ला नसरुद्दीन ने बहुत ही मासूमियत और खुशी भरे लहज़े में जवाब दिया: "कादिर भाई! आपको बहुत-बहुत मुबारक हो! कल रात जब आपका यह बड़ा पतीला मेरे घर के चूल्हे पर चढ़ा हुआ था, तो इसने एक बहुत ही सुंदर 'छोटे पतीले को जन्म दिया है'! चूँकि यह बड़ा पतीला आपका है, इसलिए इसका बच्चा (छोटा पतीला) भी कानूनन आपका ही हुआ। इसलिए मैं माँ और बच्चे, दोनों को आपके पास ले आया हूँ।"
कादिर को यह बात बिल्कुल बेतुकी और असंभव लगी कि कोई बर्तन भी बच्चा दे सकता है। लेकिन लालच बुरी बला है! कादिर ने सोचा कि मुफ्त में एक नया और महँगा बर्तन मिल रहा है, तो बेवकूफी भरी बात मान लेने में क्या हर्ज़ है?
कादिर ने लालच में आँखें चमकाते हुए कहा, "अरे वाह! सुभान अल्लाह! मेरा पतीला तो बहुत भाग्यशाली निकला। शुक्रिया मुल्ला जी, शुक्रिया!" कादिर ने खुशी-खुशी दोनों पतीले अंदर रख लिए।
कुछ हफ्तों बाद, मुल्ला नसरुद्दीन फिर से कादिर के दरवाज़े पर गए। "कादिर भाई! आज फिर कुछ मेहमान आ गए हैं। क्या आप अपना वह बड़ा वाला पतीला दोबारा दे सकते हैं?"
कादिर को पिछली बार की घटना याद आ गई। उसे लगा कि शायद इस बार पतीला किसी 'कड़ाही' या 'चम्मचों' को जन्म दे दे! कादिर ने तुरंत दौड़कर अपना सबसे बड़ा और सबसे महँगा पतीला मुल्ला नसरुद्दीन को दे दिया।
मुल्ला पतीला लेकर चले गए। एक दिन बीता... दो दिन बीते... पूरा एक हफ्ता बीत गया, लेकिन मुल्ला नसरुद्दीन पतीला लौटाने नहीं आए।
कादिर का सब्र टूट गया। वह गुस्से में मुल्ला नसरुद्दीन के घर पहुँचा और दरवाज़ा खटखटा कर बोला: "मुल्ला जी! यह क्या बात हुई? एक हफ्ता हो गया, आपने मेरा वह बड़ा पतीला अभी तक वापस क्यों नहीं किया?"
मुल्ला नसरुद्दीन ने दरवाज़ा खोला। उनके चेहरे पर बहुत ही गहरा दुख और मातम छाया हुआ था। मुल्ला ने अपने हाथ से झूठे आँसू पोंछे और बहुत ही दर्द भरी आवाज़ में कहा:
"हाय कादिर भाई! मैं आपको कैसे बताऊँ... मुझे आपको यह दुखद खबर देते हुए बहुत अफसोस हो रहा है। आपके उस बेचारे बड़े पतीले का 'इंतकाल' (मौत) हो गया! कल रात प्रसव-पीड़ा के दौरान वह बेचारा पतीला टूट कर मर गया। मैंने उसे घर के पीछे दफना दिया है।"
यह सुनते ही कादिर का खून खौल उठा। उसका लालची दिमाग गुस्से से फटने लगा।
कादिर ज़ोर से चिल्लाया, "अरे मुल्ला! क्या तू मुझे बेवकूफ़ समझता है? क्या तू पागल हो गया है? दुनिया में कभी किसी 'पतीले की भी मौत' होती है क्या? लोहे और ताँबे के बर्तन भी कभी मरते हैं?"
मुल्ला नसरुद्दीन ने अपना दुखभरा नाटक तुरंत खत्म किया। वे सीधे तन कर खड़े हुए और कादिर की आँखों में आँखें डालकर बहुत ही करारा और तार्किक जवाब दिया:
"अरे कादिर भाई! इसमें इतना गुस्सा होने और हैरान होने की क्या बात है? जब आप यह खुशी-खुशी मान सकते हैं कि एक पतीला 'बच्चा पैदा कर सकता है', तो फिर आपको यह भी मान लेना चाहिए कि जो जन्म ले सकता है, वह 'मर भी सकता है'! जब पतीला बच्चा देते समय सच्चा था, तो मरते समय झूठा कैसे हो गया?"
कादिर का मुँह खुला का खुला रह गया। उसका अपना ही लालच उसके गले की फाँस बन गया था। उसके पास मुल्ला के इस तर्क का कोई जवाब नहीं था। लालच के चक्कर में कादिर अपना सबसे महँगा पतीला गँवा चुका था, और मुल्ला नसरुद्दीन मुस्कुराते हुए अपने घर के अंदर चले गए।
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