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मुल्ला नसरुद्दीन और आसमान के तारे

लोक परंपरा — मुल्ला नसरुद्दीन5 मिनट का पठन
मुल्ला नसरुद्दीन और आसमान के तारे

गर्मियों की एक बहुत ही सुहावनी रात थी। मुल्ला नसरुद्दीन खाना खाने के बाद अपने गाँव की चौपाल पर एक चारपाई पर लेटे हुए थे। आसमान बिल्कुल साफ़ था और लाखों तारे चमक रहे थे। चाँद की रोशनी ने पूरे गाँव को नहला दिया था।

मुल्ला के आस-पास गाँव के कुछ और लोग भी बैठे हुए हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे और गपशप कर रहे थे।

गाँव के लोग मुल्ला नसरुद्दीन को बहुत ज्ञानी मानते थे। उनका मानना था कि मुल्ला के पास दुनिया के हर मुश्किल सवाल का जवाब है।

तभी गाँव के एक बहुत ही सीधे-सादे और जिज्ञासु आदमी ने आसमान की तरफ देखा और मुल्ला नसरुद्दीन से एक बहुत ही गहरा खगोलीय (Astronomical) सवाल पूछ लिया।

उसने पूछा, "मुल्ला जी! आप तो बहुत पढ़े-लिखे और ज्ञानी इंसान हैं। मुझे एक बात बताइए। हर महीने आसमान में एक नया चाँद निकलता है। वह धीर-धीरे बड़ा होता है, और महीने के बीच में बिल्कुल गोल और 'पूरा चाँद' बन जाता है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद वह पूरा चाँद गायब हो जाता है और फिर से एक नया छोटा सा चाँद आ जाता है।"

वह आदमी मुल्ला के और करीब आया और बड़ी उत्सुकता से बोला, "मुल्ला जी! आखिर ये पुराने 'पूरे चाँद' जाते कहाँ हैं? आसमान में इतनी जगह तो है नहीं कि हज़ारों पुराने चाँद रखे जा सकें। भगवान उन पुराने और एक्सपायर हो चुके चाॅंदों का क्या करता है?"

चौपाल पर बैठे सभी लोग शांत हो गए। यह सवाल सच में बहुत बड़ा था। सब लोग मुल्ला नसरुद्दीन के चेहरे की तरफ देखने लगे कि देखें आज मुल्ला जी अपने ज्ञान के खज़ाने से क्या जवाब निकालते हैं।

मुल्ला नसरुद्दीन ने कोई जल्दबाज़ी नहीं की। उन्होंने एक महान वैज्ञानिक की तरह अपनी आँखें बंद कीं, अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरा और गहरी सोच में डूबने का नाटक किया।

कुछ देर बाद मुल्ला ने अपनी आँखें खोलीं। उनके चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे उन्होंने अभी-अभी ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य सुलझा लिया हो।

मुल्ला ने आसमान की तरफ उँगली उठाते हुए बहुत ही गंभीर और रहस्यमयी आवाज़ में कहना शुरू किया:

"भाइयो! यह बहुत ही गहरा सवाल है, जिसका जवाब सिर्फ कुछ ही ज्ञानियों को पता है। बात यह है कि ऊपर वाला (भगवान) बहुत ही समझदार और किफ़ायती है। वह अपनी बनाई किसी भी चीज़ को बेकार नहीं जाने देता।"

गाँव वाले साँसें रोके सुन रहे थे। "तो फिर वह पुराने चाँद का क्या करता है मुल्ला जी?"

मुल्ला ने आसमान में चमकते हुए तारों की तरफ इशारा किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ बोले:

"जब एक 'पूरा चाँद' पुराना हो जाता है और उसकी तारीख खत्म हो जाती है, तो आसमान में जगह बनाने के लिए भगवान अपनी एक बहुत बड़ी और जादुई 'कैंची' निकालते हैं। भगवान उस पुराने और बड़े चाँद को अपनी कैंची से काट-काट कर उसके लाखों 'छोटे-छोटे टुकड़े' कर देते हैं!"

मुल्ला ने अपने दोनों हाथों से हवा में टुकड़े बिखेरने का नाटक करते हुए आगे कहा: "और फिर भगवान उन छोटे-छोटे चमकदार टुकड़ों को पूरे आसमान में बिखेर देते हैं। और भाइयो! उन्हीं पुराने चाँद के काटे हुए छोटे-छोटे टुकड़ों को दुनिया वाले 'तारे' कहते हैं!"

यह महान वैज्ञानिक स्पष्टीकरण सुनकर चौपाल पर बैठे सभी गाँव वालों के मुँह आश्चर्य से खुले रह गए।

"सुभान अल्लाह! क्या बात कही है मुल्ला जी!" एक बुज़ुर्ग ने ताली बजाते हुए कहा। "वाह! तो ये तारे असल में 'पुराने चाँद की कतरनें' हैं! आज तक दुनिया का कोई विद्वान हमें इतनी आसान भाषा में यह बात नहीं समझा पाया था!" दूसरा आदमी खुशी से उछल पड़ा।

मुल्ला नसरुद्दीन ने बहुत ही गर्व से अपनी पगड़ी ठीक की और दोबारा चारपाई पर लेट गए। गाँव वालों को ब्रह्मांड का सबसे बड़ा 'तार्किक ज्ञान' मिल गया था और मुल्ला नसरुद्दीन अपनी इस हाज़िरजवाबी से एक बार फिर पूरे गाँव के सबसे बड़े 'वैज्ञानिक और दार्शनिक' साबित हो गए थे!

🎉 कहानी समाप्त

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