हिन्दी कहानियाँ
😄 हास्य कहानियाँ

मुल्ला नसरुद्दीन और सोने का सिक्का

लोक परंपरा — मुल्ला नसरुद्दीन5 मिनट का पठन
मुल्ला नसरुद्दीन और सोने का सिक्का

सर्दियों की एक बहुत ही ठंडी और अँधेरी रात थी। मुल्ला नसरुद्दीन के घर के बाहर वाली गली में एक 'सड़क की बत्ती' जल रही थी।

मुल्ला नसरुद्दीन अपने घर से बाहर निकले और उस लैंप पोस्ट की पीली रोशनी के ठीक नीचे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गए। वे मिट्टी में अपने दोनों हाथों से कुछ टटोल रहे थे और बहुत ही बेचैनी से कुछ ढूँढ रहे थे।

तभी उनका पड़ोसी 'रहीम' वहाँ से गुज़रा। रहीम ने देखा कि मुल्ला जी इतनी ठंड में ज़मीन पर बैठकर कुछ ढूँढ रहे हैं।

रहीम ने पास आकर पूछा, "अस्सलाम वालेकुम मुल्ला जी! इतनी रात गए आप इस रोशनी के नीचे ज़मीन पर क्या ढूँढ रहे हैं?"

मुल्ला नसरुद्दीन ने बिना ऊपर देखे, मिट्टी खँगालते हुए कहा, "वालेकुम अस्सलाम रहीम भाई! मैं बर्बाद हो गया। मेरा एक बहुत ही कीमती 'सोने का सिक्का' कहीं गिर गया है। मैं उसी को ढूँढ रहा हूँ।"

रहीम बहुत ही नेक इंसान था। उसने सोचा कि मुल्ला जी की मदद करनी चाहिए। रहीम भी मुल्ला नसरुद्दीन के साथ उस लैंप पोस्ट की रोशनी के नीचे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया और मिट्टी टटोलने लगा।

"आप फिक्र मत कीजिए मुल्ला जी, हम दोनों मिलकर ढूँढेंगे तो सिक्का जल्दी मिल जाएगा," रहीम ने दिलासा दिया।

दोनों आदमी पूरी लगन से उस रोशनी वाले गोल घेरे के अंदर चप्पा-चप्पा छानने लगे। उन्होंने एक-एक पत्थर हटाया, धूल छानी, लेकिन सोने का सिक्का कहीं नज़र नहीं आया।

एक घंटा बीत गया। दोनों के कपड़े मिट्टी से सन गए थे और घुटनों में दर्द होने लगा था।

रहीम पसीने से लथपथ होकर खड़ा हुआ और अपनी कमर सीधी करते हुए बोला: "मुल्ला जी! हमने इस रोशनी के नीचे एक-एक इंच ज़मीन छान मारी है। सिक्का यहाँ बिल्कुल नहीं है। ज़रा याद करके बताइए कि आखिर वह सोने का सिक्का 'गिरा कहाँ था'? अगर हम ठीक उसी जगह ढूँढें जहाँ वह गिरा था, तो शायद मिल जाए।"

मुल्ला नसरुद्दीन ने भी खड़े होकर अपने घुटनों से धूल झाड़ी और बहुत ही आराम से, एक बहुत ही सामान्य बात की तरह जवाब दिया: "अरे रहीम भाई! सिक्का यहाँ सड़क पर थोड़ी गिरा था। वह सोने का सिक्का तो 'मेरे घर के अंदर, मेरे तहखाने वाले अँधेरे कमरे में' गिरा था!"

यह सुनते ही रहीम का दिमाग सुन्न हो गया। उसे लगा कि शायद उसने गलत सुना है।

रहीम ने अपनी आँखें फाड़ते हुए ज़ोर से पूछा: "क्या कहा? सिक्का आपके घर के अंदर वाले अँधेरे कमरे में गिरा था? मुल्ला जी, क्या आप पागल हो गए हैं? जब सिक्का आपके घर के अंदर गिरा है, तो आप उसे यहाँ बाहर 'सड़क पर' क्यों ढूँढ रहे हैं? हम पिछले एक घंटे से यहाँ बाहर मिट्टी क्यों छान रहे हैं?"

मुल्ला नसरुद्दीन ने रहीम की तरफ ऐसे देखा जैसे रहीम दुनिया का सबसे बड़ा बेवकूफ़ हो।

मुल्ला ने अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए एक ऐसा जवाब दिया जिसने 'तर्क' की धज्जियाँ उड़ा दीं: "अरे रहीम! तुम कैसी बेवकूफों वाली बातें कर रहे हो? मेरे घर के अंदर वाले उस कमरे में बहुत घुप अँधेरा है। वहाँ कुछ भी दिखाई नहीं देता। अगर मैं वहाँ अँधेरे में सिक्का ढूँढता, तो मुझे कैसे मिलता? यहाँ बाहर सड़क पर 'रोशनी' है! यहाँ सब कुछ साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है। इसलिए मैं अपना सिक्का यहाँ रोशनी में ढूँढ रहा हूँ!"

रहीम ने मुल्ला का यह महान 'वैज्ञानिक और तार्किक' जवाब सुना तो वह अपना सिर पकड़ कर वहीं ज़मीन पर बैठ गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह अपने खराब हुए समय पर रोए या मुल्ला नसरुद्दीन की इस विश्व-प्रसिद्ध मूर्खता पर हँसे।

(यह कहानी असल में उन इंसानों पर एक बहुत बड़ा व्यंग्य है, जो अपनी समस्याओं का समाधान वहाँ ढूँढते हैं जहाँ ढूँढना 'आसान' होता है, न कि वहाँ जहाँ समस्या 'असल' में होती है!)

🎉 कहानी समाप्त

😄 हास्य कहानियाँ की और कहानियाँ

😄 हास्य कहानियाँ10 मिनट

अंधेर नगरी चौपट राजा

भारतेंदु हरिश्चंद्र जी की अमर व्यंग्य कथा — जहाँ सब कुछ 'टके सेर' मिलता था। एक लालची चेला मिठाई के लालच में रुक गया और जब फाँसी की बारी आई, तो गुरु की चतुराई ने उसे बचाया और उस मूर्ख राजा को उसके अपने जाल में फँसा दिया।

पढ़ें →
😄 हास्य कहानियाँ7 मिनट

हर कण में भगवान

हाथी और महावत की मशहूर और गुदगुदाने वाली कथा — एक भोले शिष्य ने गुरु का ज्ञान इतना शाब्दिक रूप से लिया कि पागल हाथी के सामने से हटने से मना कर दिया। काँटों में फेंके जाने के बाद गुरु जी का जवाब सुनकर उसका मुँह खुला का खुला रह गया।

पढ़ें →
😄 हास्य कहानियाँ8 मिनट

भोलाराम का जीव

हरिशंकर परसाई जी का सरकारी दफ्तरों पर करारा व्यंग्य — भोलाराम मर गया पर उसका जीव स्वर्ग नहीं पहुँचा। नारद मुनि उसे ढूँढने पृथ्वी पर आए तो पता चला कि आत्मा पेंशन की धूल भरी सरकारी फाइलों में अटकी हुई है!

पढ़ें →
😄 हास्य कहानियाँ8 मिनट

इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर

हरिशंकर परसाई जी का पुलिस व्यवस्था पर अद्भुत व्यंग्य — भारत सरकार ने चाँद पर वैज्ञानिक नहीं, इंस्पेक्टर मातादीन को भेजा। मातादीन ने चाँद पर पृथ्वी की पुलिस व्यवस्था लागू की और चाँद वालों ने उन्हें वापस भेजने के लिए भारत से गुहार लगाई।

पढ़ें →
😄 हास्य कहानियाँ9 मिनट

बड़े भाई साहब

मुंशी प्रेमचंद की बचपन और पढ़ाई की मीठी नोकझोंक पर आधारित क्लासिक कथा — बड़े भाई साहब दिन-रात पढ़कर भी फेल होते थे और छोटा भाई खेलकर भी पास। फिर भी भाई साहब की डांट में जो प्यार और अनुभव की गहराई थी, वह किताबों में नहीं मिलती।

पढ़ें →
😄 हास्य कहानियाँ7 मिनट

निमंत्रण — पंडित मोटेराम शास्त्री का पेटूपन

मुंशी प्रेमचंद का दावत और ब्राह्मणों के पेटूपन पर ज़बरदस्त व्यंग्य — पंडित मोटेराम शास्त्री ने सेठ जी की दावत में इतने रसगुल्ले खा लिए कि झुककर दक्षिणा भी नहीं उठा सके। फिर पैरों के अँगूठों से सोने का सिक्का उठाने की जो तरकीब निकाली, वह देखने वाली थी।

पढ़ें →