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📖 मुहावरों की कहानियाँ

"आगे कुआँ पीछे खाई"

लोक परंपरा5 मिनट का पठन
"आगे कुआँ पीछे खाई"

'शेरगढ़' नाम के एक इलाके में एक बहुत ही घना और भयानक जंगल था। उसी जंगल के पास से शहर जाने का एक शॉर्टकट रास्ता गुज़रता था।

'राका' नाम का एक चोर शहर के एक बड़े व्यापारी का सोने का हार चुराकर भाग रहा था। पुलिस राका के पीछे लगी हुई थी। पुलिस से बचने के लिए राका ने मुख्य सड़क छोड़ दी और उस 'भयानक जंगल' के कच्चे रास्ते पर दौड़ लगा दी।

राका हाँफते हुए जंगल के बहुत अंदर पहुँच गया। अँधेरा होने लगा था और जंगल में अजीब-अजीब सी डरावनी आवाज़ें गूँज रही थीं। राका ने सोचा कि अब वह सुरक्षित है।

तभी... पास की झाड़ियों में बहुत ज़ोर की सरसराहट हुई।

मौत का आमना-सामना: राका के पैरों के निशान सूंघते हुए एक बहुत ही विशाल और खूँखार 'भूखा बाघ' वहाँ आ पहुँचा। बाघ ने राका को देखा और एक दिल दहला देने वाली 'दहाड़' मारी।

राका के खून का कतरा-कतरा जम गया। उसने सोने का हार अपनी जेब में ठूँसा और अपनी जान बचाने के लिए पूरी ताक़त से जंगल के एकदम सीधे रास्ते पर अंधाधुंध भागने लगा।

बाघ भी उसका शिकार करने के लिए उसके पीछे-पीछे दौड़ पड़ा। राका दौड़ता जा रहा था। उसे लगा कि वह आगे जाकर किसी पेड़ पर चढ़ जाएगा या कोई गाँव आ जाएगा। लेकिन धुंधलके में उसे रास्ता ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था।

खौफनाक दुविधा: अचानक भागते-भागते राका के पैर फिसलने लगे। उसने ज़ोर से ब्रेक लगाया। जैसे ही उसने अपने सामने देखा, उसकी चीख हवा में ही जम गई।

वह जंगल का किनारा था। राका के ठीक कदम के आगे एक बहुत ही गहरी और खौफनाक 'खाई' थी। खाई इतनी गहरी थी कि उसका तल दिखाई नहीं दे रहा था, और नीचे तेज़ धार वाली नदी बह रही थी। अगर राका एक कदम भी आगे बढ़ाता, तो वह हज़ारों फीट नीचे गिरकर अपनी जान से हाथ धो बैठता।

राका पसीने से नहा गया। उसने सोचा कि वह वापस पीछे की तरफ भाग जाए।

लेकिन जैसे ही उसने पीछे मुड़कर देखा, वह विशाल 'बाघ' अपने नुकीले दाँत निकाले और मुँह से लार टपकाते हुए ठीक उसके सामने खड़ा था। बाघ धीरे-धीरे अपने कदम राका की तरफ बढ़ा रहा था।

राका के हाथ-पैर काँपने लगे। वह एक इंच भी हिल नहीं सकता था। अगर वह अपनी जान बचाने के लिए 'आगे' कूदता है, तो उस गहरी 'खाई' में गिरकर चकनाचूर हो जाएगा। और अगर वह बाघ से बचने के लिए 'पीछे' भागने की कोशिश करता है, तो वह खूँखार बाघ (जो मौत के कुएँ जैसा है) उसे फाड़ खाएगा।

राका ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया। वह फूट-फूट कर रोने लगा और आसमान की तरफ देखकर बोला: "हे भगवान! यह मैंने लालच में आकर क्या कर दिया? मैंने चोरी की और अब मेरी मौत पक्की है। न मैं आगे जा सकता हूँ, न मैं पीछे मुड़ सकता हूँ। मेरी हालत तो बिल्कुल वैसी ही हो गई है— 'आगे कुआँ... और पीछे खाई!'" (यानी दोनों तरफ मौत और बचने का कोई रास्ता नहीं)।

इससे पहले कि वह कुछ और सोच पाता, बाघ ने छलाँग लगा दी और राका को अपने लालच और चोरी की बहुत भयानक सज़ा मिल गई।

🎉 कहानी समाप्त

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