"आसमान से गिरा खजूर में अटका"

'भोलू' नाम का एक बहुत ही डरपोक और सीधा-सादा व्यापारी था। एक दिन वह व्यापार के सिलसिले में पास के शहर जा रहा था। शहर का रास्ता एक बहुत ही घने और भयानक जंगल से होकर गुज़रता था।
भोलू अपने सिर पर सामान की गठरी रखे, राम-राम जपता हुआ पसीने से लथपथ जंगल के रास्ते पर तेज़-तेज़ कदम बढ़ा रहा था। सूरज ढलने लगा था और जंगल में अँधेरा छाने लगा था।
तभी अचानक पीछे की झाड़ियों से एक बहुत ही भयानक और खून जमा देने वाली 'दहाड़' सुनाई दी। भोलू ने पलटकर देखा तो उसके होश उड़ गए! एक बहुत ही खूँखार और भूखा 'शेर' अपनी लाल आँखें गड़ाए उसकी तरफ आ रहा था।
जान बचाने की जद्दोजहद: भोलू के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसने अपनी गठरी वहीं फेंकी और पूरी ताक़त लगाकर अपनी जान बचाने के लिए अंधाधुंध भागने लगा। शेर भी उसके पीछे दौड़ पड़ा।
भोलू हाँफ रहा था, उसके पैर काँप रहे थे। उसे लगा कि अब उसका बचना नामुमकिन है। तभी भागते-भागते उसकी नज़र एक बहुत ही ऊँचे और सीधे 'खजूर के पेड़' पर पड़ी।
भोलू ने बिना कुछ सोचे-समझे उस खजूर के पेड़ के खुरदरे तने को पकड़ लिया और अपनी बची-खुची ताक़त लगाकर बंदर की तरह तेज़ी से ऊपर चढ़ गया।
शेर पेड़ के नीचे पहुँचकर ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ने लगा और पेड़ के तने पर अपने पंजे मारने लगा। लेकिन भोलू बहुत ऊपर एक मज़बूत टहनी पर बैठ चुका था। शेर उस सीधे खजूर के पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था।
नई मुसीबत: भोलू ने राहत की एक बहुत लंबी साँस ली। उसने अपना पसीना पोंछा और मुस्कुराते हुए नीचे खड़े शेर को चिढ़ाने लगा: "हा हा! अब क्या कर लेगा शेर? मैं तो बहुत ऊपर आ गया हूँ। जा यहाँ से, आज मैं बच गया!"
शेर से अपनी जान बचा लेने की खुशी में भोलू ने आराम से बैठने के लिए पेड़ पर थोड़ा और ऊपर खिसकने की कोशिश की। जैसे ही उसने अपना हाथ एक ऊपरी डाल पर रखा, उसे कुछ बहुत ही 'ठंडा और रेंगता हुआ' महसूस हुआ।
भोलू ने जैसे ही अपनी गर्दन ऊपर उठाई, उसकी चीख गले में ही अटक गई और उसकी साँसें रुक गईं!
ठीक उसके सिर के ऊपर, खजूर की पत्तियों के बीच एक बहुत ही विशाल और ज़हरीला 'अजगर' फन फैलाए बैठा था। अजगर अपनी जीभ लपलपा रहा था और भोलू को डसने के लिए बिल्कुल तैयार था।
भोलू बुरी तरह फँस चुका था। अगर वह शेर से बचने के लिए पेड़ के ऊपर जाता है, तो ज़हरीला अजगर उसे डस लेगा। और अगर वह अजगर से बचने के लिए नीचे उतरता है, तो भूखा शेर उसे फाड़ खाएगा। ऊपर मौत, नीचे मौत!
भोलू ने पेड़ की डाल से लटकते हुए, रोते हुए कहा: "हे भगवान! यह मेरे साथ क्या हो गया? मैं शेर की मौत (आसमान जैसी बड़ी मुसीबत) से बचकर भागा तो था, लेकिन अब इस पेड़ पर इस अजगर के पास फँस गया। मेरी हालत तो बिल्कुल वैसी हो गई है— 'आसमान से गिरा, और खजूर में अटका!'"
भोलू बीच हवा में लटका रोता रहा, क्योंकि वह एक मुसीबत से निकलकर दूसरी और भी भयानक मुसीबत में फँस चुका था।
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