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📖 मुहावरों की कहानियाँ

"अंत भला तो सब भला"

लोक परंपरा5 मिनट का पठन
"अंत भला तो सब भला"

'रामपुर' गाँव में 'हरिराम' नाम का एक बहुत ही मेहनती किसान रहता था। हरिराम के लिए यह साल बहुत ही मनहूस और परेशानियों से भरा साबित हो रहा था।

साल की शुरुआत में, हरिराम ने अपने खेत में बहुत महँगे बीज बोए थे। लेकिन उस साल बारिश बिल्कुल नहीं हुई। भयंकर 'सूखा' पड़ गया। चिलचिलाती धूप में हरिराम के खेत की सारी फसल जलकर राख हो गई। उसकी महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल गई।

मुसीबतों का पहाड़: फसल बर्बाद होने के कारण हरिराम पर गाँव के ज़मींदार का बहुत बड़ा कर्ज़ा चढ़ गया। ज़मींदार ने धमकी दी कि अगर एक महीने में कर्ज़ा नहीं चुकाया, तो वह हरिराम का घर और ज़मीन नीलाम कर देगा।

हरिराम ने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपनी पत्नी के कुछ बचे हुए ज़ेवर गिरवी रखे और फिर से नए बीज खरीदे। इस बार उसने दिन-रात कुएँ से पानी खींच-खींच कर खेत की सिंचाई की। फसल थोड़ी बड़ी हुई ही थी कि अचानक खेत में 'टिड्डियों के दल' ने हमला कर दिया और फसल को आधा चट कर गए।

हरिराम की पत्नी रोने लगी: "हे भगवान! हमारे ही नसीब में इतने दुख क्यों लिखे हैं? अब हमारा घर भी छिन जाएगा।" हरिराम पूरी तरह टूट चुका था, लेकिन फिर भी उसने रात-रात भर जागकर खेत में आग जलाई और बची हुई फसल को कीड़ों से बचाया।

मेहनत का सुखद परिणाम: कटाई का समय आ गया। हरिराम की बची हुई फसल पक कर तैयार थी। उसी दौरान एक चमत्कार हुआ। आस-पास के सभी गाँवों में फसल किसी न किसी बीमारी से खराब हो गई थी, लेकिन हरिराम की वह बची हुई 'गेहूँ की फसल' बहुत ही शानदार और दानेदार निकली।

चूँकि पूरे इलाके में अनाज की बहुत कमी थी, इसलिए शहर के व्यापारी अनाज खरीदने गाँव में आए। अनाज कम होने के कारण गेहूँ के दाम 'चार गुना' बढ़ गए थे!

हरिराम ने जब अपनी फसल बाज़ार में बेची, तो उसे इतने पैसे मिले जितने उसने पिछले पाँच सालों में भी नहीं कमाए थे।

उसने खुशी-खुशी ज़मींदार के मुँह पर पैसे मारे और अपना सारा कर्ज़ा उतार दिया। उसने अपनी पत्नी के गिरवी रखे ज़ेवर भी छुड़ा लिए और बच्चों के लिए नए कपड़े और मिठाइयाँ लेकर घर पहुँचा।

रात को हरिराम का पूरा परिवार आँगन में बैठकर खुशी-खुशी खीर खा रहा था। हरिराम की पत्नी ने मुस्कुराते हुए कहा: "जी! यह साल हमारे लिए बहुत भारी रहा। पहले सूखा पड़ा, फिर कीड़े लगे और ज़मींदार की धमकियाँ सुननी पड़ीं। हम तो रो-रो कर पागल हो गए थे।"

हरिराम ने हँसते हुए अपनी पत्नी और बच्चों को देखा और कहा: "अरे भाग्यवान! वो सारी मुश्किलें और रोना-धोना अब किसे याद है? जब आज हमारा घर सुरक्षित है, हमारे सिर पर कोई कर्ज़ा नहीं है और हमारे सामने मीठी खीर रखी है, तो पिछला सारा दुख हवा हो गया। सच ही कहा गया है कि जब परिणाम इतना सुखद हो, तो बीच की तकलीफें कोई मायने नहीं रखतीं। हमारे लिए तो बस यही बात सच है— 'अंत भला, तो सब भला!'"

पूरा परिवार ज़ोर से हँस पड़ा और उन्होंने अपनी सारी पुरानी परेशानियों को हमेशा के लिए भुला दिया।

🎉 कहानी समाप्त

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