असली माँ की पहचान — ममता की परीक्षा और अचूक न्याय

एक दिन महाराज कृष्णदेवराय के दरबार में दो औरतें (राधा और कमला) रोती-चिल्लाती हुई आईं। उनके साथ एक बहुत ही सुंदर और छोटा सा नवजात शिशु था। दोनों औरतें उस बच्चे को अपनी गोद में खींचने की कोशिश कर रही थीं।
राधा रोते हुए बोली: "महाराज! यह मेरा बच्चा है। मैंने इसे जन्म दिया है। यह औरत झूठ बोल रही है और मेरा बच्चा चुराना चाहती है।" कमला ने चिल्लाते हुए कहा: "नहीं हुज़ूर! यह मेरा लाल है। राधा बांझ है, इसका कोई बच्चा नहीं है। यह मेरे बच्चे को अपना बता रही है।"
मामला बहुत पेचीदा था। उस समय खून की जांच तो होती नहीं थी। दोनों औरतों के पास कोई गवाह भी नहीं था, क्योंकि बच्चा रात के समय एक सराय में पैदा हुआ था।
महाराज ने कई सवाल पूछे, परंतु दोनों ही औरतें बच्चे के शरीर के हर जन्म-निशान को सही-सही बता रही थीं। महाराज उलझन में पड़ गए। उन्होंने न्याय का यह भारी काम तेनालीरामा को सौंप दिया।
तेनालीरामा का खौफनाक फैसला: तेनालीरामा अपनी जगह से उठे। उन्होंने दोनों औरतों की आँखों में गहराई से देखा। फिर उन्होंने अपने म्यान से एक बड़ी और तेज़ धार वाली तलवार निकाली!
तलवार देखकर पूरा दरबार सहम गया। तेनालीरामा ने अत्यंत कठोर और निर्दयी आवाज़ में कहा: "चूँकि तुम दोनों ही इस बच्चे पर अपना बराबर का हक जता रही हो और हमारे पास यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि असली माँ कौन है... इसलिए मैं न्याय का सबसे सीधा रास्ता अपनाऊँगा।"
तेनालीरामा ने तलवार को हवा में उठाते हुए कहा: "मैं इस बच्चे के बीचों-बीच से 'दो टुकड़े' कर दूँगा! एक टुकड़ा (आधा बच्चा) राधा को दे दिया जाएगा और दूसरा आधा टुकड़ा कमला को। इस तरह तुम दोनों को अपना-अपना हिस्सा मिल जाएगा और झगड़ा खत्म हो जाएगा!"
यह सुनकर दरबारियों की साँसें अटक गईं। क्या तेनालीरामा सचमुच उस मासूम बच्चे को काट देंगे?
ममता की चीख: जैसे ही तेनालीरामा ने बच्चे को काटने के लिए अपनी तलवार नीचे की ओर की...
कमला (झूठी माँ) बिल्कुल शांत खड़ी रही और उसने कहा: "हाँ, यह फैसला बिल्कुल सही है। यदि यह बच्चा मेरा नहीं हो सकता, तो इसका भी नहीं होगा। इसे आधा-आधा काट दीजिए।"
परंतु राधा (असली माँ) के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह ज़ोर से चीख मारते हुए तेनालीरामा के पैरों पर गिर पड़ी और फूट-फूट कर रोने लगी।
राधा ने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए कहा: "नहीं! भगवान के लिए मेरे बच्चे को मत काटिए! मैं अपना दावा वापस लेती हूँ। आप यह बच्चा कमला को ही सौंप दीजिए। कम से कम मेरा लाल ज़िंदा तो रहेगा! मैं उसे दूर से देखकर ही जी लूँगी, बस मेरे बच्चे को मत मारिए!"
न्याय की जीत: तेनालीरामा ने तुरंत अपनी तलवार म्यान में रख ली। उनके चेहरे पर एक कोमल मुस्कान आ गई।
उन्होंने बच्चे को उठाकर राधा (असली माँ) की गोद में सौंप दिया और महाराज से कहा: "महाराज! न्याय हो चुका है। संसार की कोई भी असली 'माँ' अपने बच्चे को अपनी आँखों के सामने कटता हुआ नहीं देख सकती। वह अपने बच्चे की जान बचाने के लिए अपना सबसे बड़ा हक भी खुशी-खुशी छोड़ सकती है। राधा ही इस बच्चे की असली माँ है!"
तेनालीरामा ने कमला की ओर इशारा करते हुए आगे कहा: "परंतु कमला, जो इस बच्चे को कटते हुए देखने के लिए तैयार हो गई, वह केवल ईर्ष्या और लालच से भरी एक झूठी औरत है।"
महाराज कृष्णदेवराय और सभी दरबारी तेनालीरामा के इस मनोवैज्ञानिक और भावनापूर्ण न्याय को देखकर भावविभोर हो गए। महाराज ने झूठी कमला को कालकोठरी की सज़ा सुनाई और तेनालीरामा की इस अद्वितीय बुद्धिमत्ता के लिए उन्हें मोतियों का हार पहनाया।
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