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🎭 तेनाली राम

तेनालीरामा का जादुई संदूक — चोरों की मेहनत और मुफ़्त की सिंचाई

लोक परंपरा — तेनालीराम5 मिनट का पठन
तेनालीरामा का जादुई संदूक — चोरों की मेहनत और मुफ़्त की सिंचाई

विजयनगर में एक बार बहुत ही शातिर चोरों का एक गिरोह आया। उन्होंने शहर के कई अमीर लोगों के घरों में चोरी की। एक दिन उन चोरों ने योजना बनाई कि महाराज के सबसे चहेते मंत्री, तेनालीरामा के घर में बहुत सारा धन और सोने के सिक्के होंगे। इसलिए अगली चोरी तेनालीरामा के घर ही की जानी चाहिए।

गर्मियों के दिन थे। तेनालीरामा के घर के पीछे एक बहुत बड़ा फलों और सब्जियों का बगीचा था, जो पानी की कमी के कारण सूख रहा था। रात के समय जब चोर तेनालीरामा के घर के पिछवाड़े की दीवाल फांद कर अंदर घुसे, तो तेनालीरामा ने आहट सुन ली। वे तुरंत समझ गए कि आज उनके घर चोर आए हैं।

तेनालीरामा ने अपनी पत्नी को ज़ोर से आवाज़ लगाई (इतनी ज़ोर से कि बाहर छिपे चोर भी सुन सकें): "अजी सुनती हो! आजकल शहर में चोरों का बहुत आतंक है। मैंने सुना है कि वे किसी का धन नहीं छोड़ रहे हैं। इसलिए हमें अपना सारा खज़ाना और सोने के सिक्के सुरक्षित करने होंगे।"

दीवार के पीछे छिपे चोर खुश हो गए कि अब उन्हें खज़ाने का पता आसानी से चल जाएगा।

खज़ाने का संदूक और कुआँ: तेनालीरामा ने फिर ज़ोर से कहा: "मैंने एक योजना बनाई है। हम अपने सारे सोने-चांदी के गहने और सिक्के इस 'लोहे के भारी संदूक' में भर देते हैं और इस संदूक को अपने बगीचे के 'गहरे कुएं' में डाल देते हैं। पानी के अंदर चोर कभी नहीं पहुँच पाएंगे और हमारा धन सुरक्षित रहेगा!"

यह सुनकर चोर खुशी से नाचने लगे कि उन्हें बिना मेहनत किए सारा खज़ाना एक ही संदूक में मिल जाएगा।

इधर घर के अंदर, तेनालीरामा और उनकी पत्नी ने चुपके से उस बड़े से लोहे के संदूक में भारी-भारी पत्थर, ईंटें और पुराने बर्तन भर दिए और उस पर एक बड़ा ताला लगा दिया। इसके बाद तेनालीरामा संदूक को घसीटते हुए कुएं तक ले गए और ज़ोर की आवाज़ ('छपाक!') के साथ उसे कुएं में धकेल दिया। इसके बाद तेनालीरामा वापस कमरे में गए और खर्राटे लेकर सोने का नाटक करने लगे।

चोरों की 'सिंचाई' वाली मेहनत: जब चोरों को यकीन हो गया कि तेनाली सो चुके हैं, तो वे कुएं के पास आए। उन्होंने कुएं में झांका, परंतु कुआँ पानी से लबालब भरा था और संदूक बहुत गहराई में था।

चोरों के सरदार ने कहा: "भाइयों! अगर यह खज़ाना चाहिए, तो हमें बाल्टियों से इस कुएं का सारा पानी बाहर निकालना होगा। जब कुआँ खाली हो जाएगा, तब हम नीचे उतर कर संदूक निकाल लेंगे।"

चोरों ने बाल्टियां उठाईं और कुएं से पानी खींच-खींच कर बाहर फेंकना शुरू कर दिया। तेनालीरामा ने कुएं के पास पहले से ही छोटी-छोटी क्यारियां (नालियां) बना रखी थीं, जिनका मुँह उनके सूखे हुए बगीचे की ओर था। चोर रात भर पसीना बहा-बहा कर पानी निकालते रहे, और वह सारा पानी क्यारियों के रास्ते तेनालीरामा के सूखते हुए पौधों और पेड़ों की जड़ में पहुँचता रहा।

सुबह का नज़ारा और चोरों की हार: पूरी रात की कमर-तोड़ मेहनत के बाद, सुबह होने के करीब कुएं का पानी कम हुआ। एक चोर नीचे उतरा और रस्सी से बांधकर उस भारी संदूक को ऊपर खींचा।

जैसे ही उन्होंने बड़ी उत्सुकता से ताला तोड़ा और संदूक खोला... उनके होश उड़ गए! संदूक में सोने-चांदी की जगह सिर्फ भारी पत्थर और ईंटें भरी हुई थीं।

तभी उनके पीछे से एक ज़ोरदार ठहाका गूंजा। तेनालीरामा अपने घर के दरवाज़े पर खड़े मुस्कुरा रहे थे। तेनालीरामा ने हाथ जोड़कर कहा: "भाइयों! रात भर इतनी कड़ी मेहनत करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! मेरे बगीचे के पौधे पानी के बिना सूख रहे थे और मेरे पास सिंचाई करने का समय नहीं था। आप लोगों ने रात भर जागकर मेरे पूरे बगीचे की मुफ़्त में सिंचाई कर दी। इसके लिए मैं हमेशा आपका आभारी रहूँगा! अब आप जा सकते हैं।"

चोर समझ गए कि वे दुनिया के सबसे चतुर इंसान के हाथों बेवकूफ बन गए हैं। वे डर के मारे वहाँ से ऐसे भागे कि फिर कभी विजयनगर में अपनी शक्ल नहीं दिखाई!

🎉 कहानी समाप्त

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