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🎭 तेनाली राम

बर्तनों का जन्म और मृत्यु — लालच का अचूक इलाज

लोक परंपरा — तेनालीराम5 मिनट का पठन
बर्तनों का जन्म और मृत्यु — लालच का अचूक इलाज

विजयनगर में रामदास नाम का एक सेठ रहता था। वह शहर का सबसे अमीर लेकिन सबसे लालची इंसान था। वह लोगों को ज़रूरत के समय बर्तन या पैसे उधार देता था और बदले में उनसे भारी किराया वसूलता था। तेनालीरामा ने उस सेठ के लालच का इलाज करने की सोची।

एक दिन तेनालीरामा रामदास के पास गए और बोले: "सेठ जी! मेरे घर कल कुछ खास मेहमान आ रहे हैं। मुझे खाना बनाने के लिए आपके दो बड़े तांबे के बर्तन उधार चाहिए।"

रामदास ने किराए के लालच में बर्तन दे दिए। दो दिन बाद, तेनालीरामा वे दोनों बड़े बर्तन वापस लौटाने गए। परंतु उन बड़े बर्तनों के अंदर दो 'छोटे-छोटे तांबे के कटोरे' भी रखे हुए थे।

रामदास ने हैरान होकर पूछा: "तेनाली! ये छोटे कटोरे तो मेरे नहीं हैं। ये तुमने बर्तनों के अंदर क्यों रखे हैं?"

तेनालीरामा ने बड़ी ही मासूमियत से कहा: "सेठ जी! कल रात एक चमत्कार हो गया। आपके इन दोनों बर्तनों ने मेरे घर में 'बच्चों को जन्म दिया' है! चूँकि ये आपके बर्तनों के बच्चे हैं, इसलिए इन पर भी आप ही का हक है।"

सेठ रामदास का लालची दिमाग यह सुनकर बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि तेनालीरामा मूर्ख है। सेठ ने खुशी-खुशी अपने बड़े बर्तन और वे छोटे कटोरे (बच्चे) रख लिए।

लालच का दूसरा चरण: कुछ दिनों बाद, तेनालीरामा फिर रामदास के पास पहुँचे। उन्होंने कहा: "सेठ जी! कल महाराज मेरे घर भोजन पर आ रहे हैं। मुझे आपके सबसे कीमती और बड़े सोने और चांदी के 10 बर्तन चाहिए।"

रामदास ने सोचा कि अगर पिछली बार तांबे के बर्तनों ने बच्चे दिए थे, तो इस बार सोने-चांदी के बर्तन भी बच्चे देंगे और उसे भारी फायदा होगा। सेठ ने बिना सोचे-समझे अपने सबसे कीमती 10 बर्तन तेनालीरामा को दे दिए।

बर्तनों का 'निधन': एक हफ्ता बीत गया, परंतु तेनालीरामा बर्तन लौटाने नहीं आए। सेठ रामदास घबराकर तेनालीरामा के घर पहुँचा।

जैसे ही तेनालीरामा ने दरवाज़ा खोला, वे ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे। उन्होंने अपनी आँखें पोंछते हुए कहा: "सेठ जी! बहुत बड़ा अनर्थ हो गया! मुझे आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि आपके वे सोने-चांदी के सभी 10 बर्तन कल रात एक भयंकर बीमारी के कारण 'मर गए'!"

यह सुनकर सेठ रामदास के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह गुस्से से आगबबूला हो गया और चिल्लाया: "क्या बकवास कर रहे हो? क्या कभी बर्तन भी मरते हैं? तुम मेरे कीमती बर्तन हड़पना चाहते हो। चलो महाराज के दरबार में, मैं तुम्हारी शिकायत करूँगा!"

दरबार में तेनालीरामा का अचूक तर्क: दोनों महाराज कृष्णदेवराय के दरबार में पहुँचे। सेठ ने रोते हुए महाराज को पूरी बात बताई। महाराज ने सख्ती से तेनालीरामा से पूछा: "तेनाली! यह क्या मज़ाक है? तुमने सेठ के बर्तन क्यों नहीं लौटाए? क्या कभी निर्जीव बर्तन भी मर सकते हैं?"

तेनालीरामा ने हाथ जोड़कर और मुस्कुराते हुए महाराज से कहा: "महाराज! इस सेठ से ही पूछिए। जब कुछ दिन पहले मेरे घर में इसके तांबे के बर्तनों ने 'बच्चों को जन्म दिया' था, तब तो इसने खुशी-खुशी मान लिया था कि बर्तन बच्चे पैदा कर सकते हैं। तो महाराज, न्याय का सीधा सा नियम है— 'जो चीज़ जन्म ले सकती है, उसकी मृत्यु भी तो निश्चित है!' जब बर्तन बच्चे पैदा कर सकते हैं, तो वे मर क्यों नहीं सकते?"

यह अचूक और व्यंग्यात्मक तर्क सुनकर पूरा दरबार ठहाकों से गूंज उठा। महाराज भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। सेठ रामदास अपने ही लालच के जाल में ऐसा फंसा कि वह कोई जवाब नहीं दे सका। उसे अपना सिर झुकाकर दरबार से खाली हाथ लौटना पड़ा।

🎉 कहानी समाप्त

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