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🎭 तेनाली राम

भारी हाथी को तौलने की तरकीब — नाव, पत्थर और विज्ञान का जादू

लोक परंपरा — तेनालीराम5 मिनट का पठन
भारी हाथी को तौलने की तरकीब — नाव, पत्थर और विज्ञान का जादू

विजयनगर साम्राज्य में महाराजा कृष्णदेवराय के पास एक अत्यंत विशाल और शानदार हाथी था। वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था। एक दिन पड़ोसी राज्य के एक राजा ने विजयनगर को एक चुनौती भरा संदेश भेजा।

संदेश में लिखा था: "महाराज! हमने सुना है कि आपका मुख्य हाथी पूरे दक्षिण भारत में सबसे विशाल है। हमारी चुनौती यह है कि क्या आपके राज्य में कोई ऐसा विद्वान है जो उस विशाल हाथी का 'बिल्कुल सटीक वज़न' बता सके? यदि आप ऐसा कर पाए, तो हम उस हाथी के वज़न के बराबर सोना विजयनगर को भेंट करेंगे!"

वज़न तौलने की समस्या: महाराज को यह चुनौती बहुत पसंद आई, परंतु समस्या बहुत बड़ी थी। उस ज़माने में अनाज या लोहे को तौलने के लिए तराज़ू तो होते थे, परंतु एक पूरे के पूरे ज़िंदा और विशालकाय हाथी को तौलने के लिए इतना बड़ा तराज़ू पूरे विजयनगर में क्या, पूरे भारतवर्ष में नहीं था।

महाराज ने अपने सेनापतियों और इंजीनियरों को बुलाया। किसी ने कहा कि हाथी को टुकड़ों में तो तौला नहीं जा सकता। किसी ने कहा कि एक बहुत बड़ा तराज़ू बनाने में ही कई महीने लग जाएंगे।

जब किसी को कोई उपाय नहीं सूझा, तो महाराज ने तेनालीरामा को बुलवाया। तेनालीरामा ने समस्या सुनी और मुस्कुराते हुए बोले, "महाराज! आप हाथी और सोने को तैयार रखिए। कल सुबह हम उस हाथी का सटीक वज़न निकाल लेंगे, वह भी बिना किसी बड़े तराज़ू के!"

नदी के किनारे का प्रयोग: अगली सुबह, तेनालीरामा पूरे दरबार और उस हाथी को लेकर तुंगभद्रा नदी के किनारे पहुँच गए। नदी के किनारे एक बहुत बड़ी और खाली 'नाव' बंधी हुई थी।

तेनालीरामा ने महावत से कहा कि वह हाथी को सावधानी से उस नाव पर चढ़ा दे।

जैसे ही वह विशाल हाथी नाव पर चढ़ा, उसके भारी वज़न के कारण नाव पानी में काफी नीचे की ओर दब गई (डूबने लगी)। तेनालीरामा ने एक लाल रंग का पेंट लिया और नाव के बाहरी हिस्से पर, जहाँ तक पानी का स्तर पहुँच गया था, वहाँ एक 'लाल निशान' लगा दिया।

इसके बाद तेनालीरामा ने हाथी को नाव से नीचे उतार लिया। हाथी के उतरते ही नाव वापस ऊपर आ गई और वह लाल निशान पानी के स्तर से काफी ऊपर दिखने लगा।

पत्थरों और विज्ञान का जादू: अब तेनालीरामा ने मज़दूरों को बुलाया और उन्हें आदेश दिया: "नदी के किनारे पड़े इन बड़े-बड़े भारी पत्थरों को उठाओ और इस नाव के अंदर भरना शुरू कर दो!"

मज़दूर नाव में पत्थर भरने लगे। जैसे-जैसे नाव में पत्थरों का वज़न बढ़ता गया, नाव धीरे-धीरे वापस पानी में नीचे जाने लगी। तेनालीरामा नदी के किनारे खड़े होकर ध्यान से उस 'लाल निशान' को देख रहे थे।

जैसे ही नाव का वह लाल निशान वापस बिल्कुल पानी की सतह से जा टकराया, तेनालीरामा ने ज़ोर से चिल्लाकर कहा: "बस! अब और पत्थर मत डालना! रुक जाओ!"

पूरा दरबार हैरानी से यह सब देख रहा था। तेनालीरामा ने महाराज की ओर पलटकर गर्व से कहा: "महाराज! काम पूरा हो गया। विज्ञान के नियमानुसार, नाव में रखे इन 'सारे पत्थरों का कुल वज़न' ठीक उस 'हाथी के वज़न' के बराबर है! क्योंकि दोनों ने नाव को पानी में एक ही निशान तक डुबाया है।"

तेनालीरामा ने आगे कहा: "अब हमें किसी विशाल तराज़ू की आवश्यकता नहीं है। हम इन पत्थरों को नाव से बाहर निकालकर, छोटे-छोटे साधारण तराज़ुओं पर आसानी से तौल सकते हैं। उन सभी पत्थरों के वज़न का जोड़ ही आपके हाथी का बिल्कुल सटीक वज़न होगा!"

महाराज की प्रसन्नता: पड़ोसी राज्य का दूत और विजयनगर के सभी दरबारी तेनालीरामा की इस अद्भुत वैज्ञानिक सोच (Archimedes' Principle की लोककथात्मक शैली) को देखकर सन्न रह गए। बिना किसी मशीन या आधुनिक उपकरण के, तेनाली ने अपनी कुशाग्र बुद्धि से एक असंभव काम को बिल्कुल संभव बना दिया था।

पड़ोसी राजा को अपनी हार माननी पड़ी और उसने वादे के अनुसार उस हाथी के वज़न के बराबर सोना विजयनगर के खज़ाने में भिजवा दिया। महाराज ने उस सोने में से एक बड़ा हिस्सा तेनालीरामा को उनकी इस चतुराई के लिए इनाम के रूप में दिया।

🎉 कहानी समाप्त

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