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🎭 तेनाली राम

सबसे बड़ा सच और सबसे बड़ा झूठ — सच और झूठ के बीच की दूरी

लोक परंपरा — तेनालीराम5 मिनट का पठन
सबसे बड़ा सच और सबसे बड़ा झूठ — सच और झूठ के बीच की दूरी

महाराजा कृष्णदेवराय का दरबार केवल न्याय और राजनीति का ही नहीं, बल्कि गहरी दार्शनिक चर्चाओं का भी केंद्र था। एक दिन महाराज एक गंभीर सोच में डूबे हुए थे। उन्होंने अपने दरबारियों की ओर देखते हुए एक बहुत ही गूढ़ सवाल पूछा:

"मेरे विद्वान दरबारियों! संसार में सच और झूठ का खेल हमेशा चलता रहता है। मैं आपसे यह जानना चाहता हूँ कि 'सच और झूठ के बीच की वास्तविक दूरी' कितनी होती है?"

दरबारियों के दार्शनिक जवाब: यह सवाल सुनकर दरबार में सन्नाटा छा गया। राजपुरोहित ने उठकर कहा, "महाराज! सच और झूठ के बीच धरती और आसमान जितनी दूरी होती है। सच प्रकाश है और झूठ अंधकार।" सेनापति ने कहा, "हुज़ूर! इन दोनों के बीच जीवन और मृत्यु जितनी दूरी है।"

किसी ने कहा उत्तर और दक्षिण ध्रुव जितनी दूरी, तो किसी ने इसे ईश्वर और शैतान की दूरी बताया। महाराज इन सभी जवाबों को सुन रहे थे, परंतु उन्हें ये सब बातें केवल किताबी और हवा-ह हवाई लग रही थीं। उन्हें कोई ऐसा व्यावहारिक जवाब नहीं मिल रहा था जिसे आम इंसान भी समझ सके।

अंततः महाराज ने अपनी नज़रें तेनालीरामा की ओर घुमाईं और कहा, "तेनाली! तुम शांत क्यों हो? तुम्हारे हिसाब से सच और झूठ के बीच कितनी दूरी है?"

तेनालीरामा का यथार्थवादी जवाब: तेनालीरामा अपनी जगह से उठे, महाराज के करीब गए और अपने दाहिने हाथ की चार उंगलियों को एक साथ जोड़कर महाराज के सामने हवा में उठाया।

तेनालीरामा ने बड़ी ही सहजता से कहा: "महाराज! धरती-आसमान या जीवन-मृत्यु की बातें तो बहुत बड़ी हैं। यदि आप यथार्थ में देखें, तो सच और झूठ के बीच केवल 'चार अंगुल' की ही दूरी होती है!"

यह सुनकर महाराज और सभी दरबारी हैरान रह गए। महाराज ने पूछा, "चार अंगुल? यह तुम कैसी पहेली बुझा रहे हो तेनालीरामा? ज़रा इसे विस्तार से समझाओ।"

चेहरे पर छिपा रहस्य: तेनालीरामा ने मुस्कुराते हुए अपने चेहरे पर हाथ रखा और कहा: "महाराज! इंसान के शरीर पर ही इसका सबसे बड़ा सबूत है। कृपया मेरी 'आंखों' और मेरे 'कानों' के बीच की दूरी नाप कर देखिए... यह ठीक चार अंगुल की दूरी है!"

तेनालीरामा ने इस बात का गहरा मनोवैज्ञानिक अर्थ समझाते हुए कहा: "हुज़ूर! दुनिया में जो कुछ भी हम अपने 'कानों' से सुनते हैं—जैसे अफ़वाहें, चुगलियां और दूसरों की बातें—वह अक्सर 'झूठ' होता है। परंतु जो कुछ हम अपनी 'आंखों' से खुद देखते हैं, वह हमेशा 'सच' होता है। इसलिए, दुनिया का सबसे बड़ा झूठ (सुनी-सुनाई बातें) हमारे कानों में होता है, और सबसे बड़ा सच (देखी हुई सच्चाई) हमारी आंखों में होता है। और इन दोनों के बीच की दूरी बस इन चार अंगुलियों के बराबर ही है!"

महाराज की प्रसन्नता: तेनालीरामा का यह अचूक और व्यावहारिक तर्क सुनकर पूरा दरबार तालियों से गूंज उठा। महाराज कृष्णदेवराय इस बात से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत अपने गले से मोतियों की माला उतारी और तेनालीरामा को पहना दी।

उन्होंने पूरे दरबार से कहा: "तेनालीरामा ने आज हमें न्याय का सबसे बड़ा नियम सिखाया है। एक राजा या न्यायाधीश को कभी भी कानों से सुनी बातों (झूठ) पर विश्वास नहीं करना चाहिए, बल्कि हमेशा अपनी आंखों से देखे गए प्रमाण (सच) पर ही भरोसा करना चाहिए।"

🎉 कहानी समाप्त

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