"एक अनार सौ बीमार"

'बेरोज़गारपुर' नाम का एक गाँव था। इस गाँव में पढ़े-लिखे नौजवान बहुत थे, लेकिन काम-धंधे की बहुत कमी थी। गाँव के सरपंच जी बहुत परेशान थे क्योंकि पंचायत का हिसाब-किताब रखने वाला पुराना मुंशी रिटायर हो गया था।
सरपंच जी ने गाँव के बीचों-बीच ढिंढोरा पिटवा दिया: "सुनो-सुनो-सुनो! पंचायत घर में 'मुंशी' की एक सरकारी नौकरी खाली है। जिसे थोड़ा-बहुत हिसाब-किताब आता हो, वह कल सुबह पंचायत घर आ जाए। वेतन मिलेगा महीने के 500 रुपये!"
500 रुपये और वह भी सरकारी नौकरी! यह खबर गाँव में जंगल की आग की तरह फैल गई।
उम्मीदवारों की फौज: अगली सुबह, सरपंच जी आराम से चाय पीते हुए पंचायत घर पहुँचे। लेकिन वहाँ का नज़ारा देखकर उनके हाथ से चाय का कुल्हड़ छूटकर गिर पड़ा— 'छन्न!'
पंचायत घर के बाहर कोई दस-बीस लोग नहीं, बल्कि पूरे 'सौ लोगों की एक विशाल भीड़' खड़ी थी! क्या जवान, क्या बूढ़े, और तो और कुछ बच्चे भी अपनी नकली मूँछें लगाकर लाइन में खड़े थे।
सरपंच जी पसीना पोंछते हुए कुर्सी पर बैठे। उन्होंने इंटरव्यू शुरू किया। सरपंच ने पहले लड़के से पूछा: "तुम्हें हिसाब-किताब आता है?" लड़के ने अपनी अजीबोगरीब डिग्री दिखाते हुए कहा: "जी सरपंच जी! मैं आसमान के तारे गिन सकता हूँ, तो पंचायत के पैसे गिनना कौन सी बड़ी बात है!"
दूसरे ने कहा: "सरपंच जी, मैं मक्खियाँ बहुत अच्छी मारता हूँ, आपके पंचायत घर में एक भी मच्छर नहीं फड़केगा।" तीसरे ने अपना एक पुराना फटा हुआ कागज़ दिखाया और बोला: "मैंने शहर से 'कुश्ती' में डिग्री ली है, कोई हिसाब में गड़बड़ करेगा तो उसे धोबी-पछाड़ दूँगा।"
सरपंच की झल्लाहट: सरपंच जी का सिर चकरा गया। नौकरी केवल 'एक' थी, जो हिसाब-किताब के लिए थी, लेकिन बाहर सौ लोग अपनी अजीबोगरीब डिग्रियां लेकर एक-दूसरे को धक्का मार रहे थे और आपस में लड़ रहे थे।
भीड़ बेकाबू होने लगी। सब चिल्ला रहे थे— "नौकरी मुझे चाहिए! नौकरी मुझे चाहिए!"
सरपंच जी अपनी कुर्सी पर खड़े हो गए और उन्होंने अपना सिर पकड़कर ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा: "अरे भाइयो! चुप हो जाओ! मेरे पास कोई खज़ाना नहीं बँट रहा है। नौकरी केवल 'एक' है, 'एक' मुंशी की ज़रूरत है! और तुम पूरे सौ लोग यहाँ अजीब-अजीब डिग्रियां लेकर मेरी जान खाने आ गए हो। तुम लोगों ने तो वही हालत कर दी है जैसे— 'एक अनार... और सौ बीमार!'" (यानी जब हकीम के पास केवल एक ही अनार हो और उसे खाने वाले सौ मरीज़ आ जाएँ, तो हकीम अपना सिर ही पीट सकता है)।
सरपंच जी ने डर के मारे पंचायत घर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और वह नौकरी का विज्ञापन ही रद्द कर दिया!
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