"उल्टा चोर कोतवाल को डांटे"

'शांतिनगर' कस्बे में 'लाला धनीराम' नाम के एक बहुत ही शरीफ़ और डरपोक सेठ रहते थे। लाला जी ने हाल ही में शहर से एक नया ताला खरीदा था और उसे अपने घर के मुख्य दरवाज़े पर लगाया था।
उसी कस्बे में 'चंगू' नाम का एक बहुत ही ढीठ और बेशरम चोर रहता था। चंगू चोरी तो करता ही था, लेकिन उसकी ज़ुबान बहुत तेज़ थी।
एक रात, जब पूरा कस्बा सो रहा था, चंगू अपने हाथ में लोहे की एक 'सब्बल' (Crowbar) लेकर लाला धनीराम के दरवाज़े पर पहुँचा। उसने ताले पर एक ज़ोरदार प्रहार किया— 'खटाक्!' ताला थोड़ा कमज़ोर था, इसलिए वह एक ही झटके में टूटकर नीचे गिर गया।
चोर की घुसपैठ: चंगू घर के अंदर घुस गया। उसने लाला जी की तिजोरी खोली और सोने-चाँदी के ज़ेवर अपनी एक बड़ी सी लाल पोटली में भरने लगा।
लेकिन ताला टूटने की आवाज़ से लाला धनीराम की नींद खुल गई थी। लाला जी ने चुपके से खिड़की से देखा कि घर में चोर घुसा है। उन्होंने बिना कोई आवाज़ किए, अपनी छत से सीधे 'कोतवाल' के घर की तरफ छलाँग लगा दी और उन्हें बुला लाए।
जैसे ही चंगू अपनी पोटली बाँधकर बाहर निकलने लगा, कोतवाल ने अपने सिपाहियों के साथ उसे रंगे हाथों पकड़ लिया!
ढीठ चोर का ड्रामा: रंगे हाथों पकड़े जाने पर आमतौर पर चोर रोने लगते हैं, गिड़गिड़ाते हैं और माफ़ी माँगते हैं। लेकिन चंगू कोई आम चोर नहीं था, वह बहुत ही 'ढीठ' था।
कोतवाल ने चंगू का कॉलर पकड़ा और डांटते हुए कहा: "क्यों रे चंगू! तू लाला जी के घर चोरी कर रहा है? तुझे शर्म नहीं आती?"
चंगू ने बिल्कुल भी डरने का नाटक नहीं किया। उसने झटके से अपना कॉलर छुड़ाया और कोतवाल से डरने के बजाय, वह उल्टे 'लाला धनीराम' पर ही ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने और उन्हें डांटने लगा!
चंगू ने ज़मीन पर पड़ा हुआ वह टूटा ताला उठाया और लाला जी को डांटते हुए बोला: "शर्म तो इन लाला जी को आनी चाहिए कोतवाल साहब! आप मुझे क्यों पकड़ रहे हैं? इस लाला को गिरफ्तार कीजिए! इतना बड़ा सेठ है और दरवाज़े पर दो कौड़ी का सड़ा हुआ ताला लगा रखा है। मैंने तो बस हल्का सा धक्का दिया और यह टूट गया। अगर लाला ने मज़बूत ताला लगाया होता, तो क्या मैं अंदर आ पाता? यह लाला हम जैसे मासूम चोरों को चोरी करने के लिए उकसाता है। सारा दोष इस लाला के कमज़ोर ताले का है!"
लाला धनीराम यह सुनकर हक्के-बक्के रह गए। जो चोर उनके जेवर चुरा रहा था, वही उन्हें डांट रहा था कि उन्होंने ताला कमज़ोर क्यों लगाया!
कोतवाल साहब चंगू की इस बेशरमी पर अपनी हँसी नहीं रोक पाए। उन्होंने चंगू के सिर पर एक हलका सा डंडा मारा और हँसते हुए कहा: "वाह रे चंगू! चोरी तूने की, ताला तूने तोड़ा, और डांट तू लाला जी को रहा है? तेरी इस हरकत को देखकर तो बस एक ही कहावत याद आती है— 'उल्टा चोर... कोतवाल को डांटे!'" (यानी मुजरिम खुद पुलिस या मालिक पर ही रौब झाड़ रहा है)।
कोतवाल ने उस ढीठ चंगू को हथकड़ी पहनाई और उसे खींचते हुए थाने ले गए, और पूरा मोहल्ला चंगू की इस अजीबोगरीब हरक़त पर ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा।
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