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"गागर में सागर भरना"

लोक परंपरा5 मिनट का पठन
"गागर में सागर भरना"

'रतनगढ़' राज्य के 'महाराजा सूर्य प्रताप' अपनी प्रजा की भलाई को लेकर बहुत चिंतित थे। राज्य में अकाल और गरीबी बढ़ रही थी। इस समस्या का हल निकालने के लिए महाराजा ने अपने महल में एक बहुत बड़ी 'राज सभा' बुलाई। राज्य के सभी बड़े-बड़े विद्वान, मंत्री और अमीर सेठ उस सभा में मौजूद थे।

महाराजा ने अपने राजसिंहासन से पूछा: "विद्वानो! हमारे राज्य की गरीबी कैसे दूर होगी? मुझे कोई ठोस उपाय बताइए।"

उबाऊ और लंबे भाषण: सबसे पहले राज्य के मुख्य मंत्री खड़े हुए। उन्होंने मोटे-मोटे ग्रंथ खोले और लगातार 'दो घंटे' तक भारी-भरकम शब्दों में अर्थशास्त्र और राजनीति पर भाषण दिया। उनके शब्द इतने मुश्किल थे कि किसी को कुछ समझ नहीं आया।

उसके बाद एक अमीर सेठ उठा। उसने भी अपनी बात को इतना घुमा-फिरा कर कहा कि सभा में बैठे लोग उबासी लेने लगे। किसी ने दो पन्नों का भाषण दिया, तो किसी ने चार पन्नों का। सब सिर्फ अपना ज्ञान बघार रहे थे, लेकिन काम की बात कोई नहीं कर रहा था।

महाराजा सूर्य प्रताप बोरियत से अपना सिर पकड़ कर बैठ गए।

किसान का ज्ञान: तभी सभा के बिल्कुल पीछे खड़े एक बहुत ही गरीब और साधारण से किसान, 'रामलाल' ने अपना हाथ उठाया। रामलाल के कपड़े फटे हुए थे और पैरों में चप्पल भी नहीं थी।

दरबारियों ने उसका मज़ाक उड़ाया: "अरे अनपढ़ किसान! जब हम जैसे बड़े विद्वान महाराज को उपाय नहीं बता पाए, तो तू क्या बोलेगा? बैठ जा!"

लेकिन महाराजा ने रामलाल को बोलने की अनुमति दी। रामलाल बिना किसी हिचकिचाहट के आगे आया। उसने महाराजा को प्रणाम किया और बिना कोई लंबा भाषण दिए, केवल 'एक लाइन' में अपनी पूरी बात कह दी:

"महाराज! अगर किसान के खेत में 'पसीना' गिरेगा, तभी आपके खज़ाने में 'सोना' बरसेगा। बस किसानों के लिए पानी का इंतज़ाम कर दीजिए, बाकी गरीबी हम खुद दूर कर देंगे।"

पूरे दरबार में एकदम सन्नाटा छा गया। रामलाल की इस एक छोटी सी लाइन में इतना गहरा मतलब था जो घंटों के भाषणों में नहीं था। रामलाल ने बताया कि राज्य की असली ताक़त किसान की मेहनत है, न कि राजनेताओं की नीतियाँ।

महाराजा सूर्य प्रताप रामलाल की इस बात से इतने प्रभावित हुए कि वे अपनी गद्दी से उठ खड़े हुए और ज़ोर से तालियाँ बजाने लगे।

महाराजा के मुख्य सलाहकार ने सिर झुकाते हुए कहा: "महाराज! हम लोग तो व्यर्थ ही घंटों से शब्दों का जाल बुन रहे थे। इस साधारण किसान ने तो कमाल कर दिया। इसकी केवल एक लाइन में राज्य की पूरी अर्थव्यवस्था का सार छिपा है। इसने तो सचमुच— 'गागर में सागर भर दिया!'"

(यानी एक छोटे से मटके में पूरा समंदर समा जाना, कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह देना)। महाराजा ने रामलाल को भारी इनाम दिया और राज्य में नहरें बनवाने का आदेश दे दिया।

🎉 कहानी समाप्त

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