गिलास के पेंदे का तेल

शेख चिल्ली जब भी कोई काम करता, तो उसमें अपनी ऐसी अद्भुत 'अक्ल' लगाता कि देखने वालों का सिर चकरा जाता।
एक दिन शेख चिल्ली की अम्मी (माँ) रसोई में खाना बना रही थीं। अचानक सरसों का तेल खत्म हो गया। अम्मी ने शेख चिल्ली को आवाज़ दी और उसे एक 'कांच का गिलास' और 'आठ आने' (50 पैसे) देते हुए कहा, "बेटा शेख! दौड़कर बाज़ार जा और बनिए की दुकान से पूरे आठ आने का सरसों का तेल इस गिलास में डलवा कर ले आ।"
शेख चिल्ली गिलास और पैसे लेकर बनिए की दुकान पर पहुँचा।
बनिए ने आठ आने लिए और एक बड़े से पीपे में से तेल निकालकर शेख चिल्ली के गिलास में डालने लगा। आठ आने का तेल थोड़ा ज़्यादा था, इसलिए गिलास ऊपर तक छक-छक भर गया, लेकिन बनिए के नापने वाले बर्तन में अभी भी 'थोड़ा सा तेल' (एक-दो चम्मच के बराबर) बच गया।
बनिए ने कहा, "अरे शेख! तेरा गिलास तो पूरा भर गया है, लेकिन मेरे पास अभी थोड़ा सा तेल और बचा है। अब इस बचे हुए तेल का मैं क्या करूँ? तेरे पास कोई दूसरा बर्तन है क्या?"
शेख चिल्ली ने अपना खुराफाती दिमाग दौड़ाया। उसने गिलास को ध्यान से देखा। गिलास का 'पेंदा' नीचे से थोड़ा गहरा और कटोरीनुमा था।
शेख ने बहुत ही खुशी से कहा, "अरे बनिए काका! इसमें परेशानी की क्या बात है? अगर गिलास ऊपर से भर गया है, तो यह नीचे से तो खाली है ना! तुम बाकी का बचा हुआ तेल इसके नीचे डाल दो!"
यह कहते ही, शेख चिल्ली ने तेल से लबालब भरे हुए उस गिलास को एकदम से 'उल्टा' कर दिया!
गिलास को उल्टा करते ही, उसके अंदर भरा हुआ सारा का सारा तेल ज़मीन पर गिरकर मिट्टी में बह गया— 'छन्न!'
अब शेख चिल्ली ने बनिए के सामने गिलास का खाली पेंदा (नीचे वाला गहरा हिस्सा) कर दिया। बनिए ने अपना सिर पीट लिया, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और चुपचाप वह बचा हुआ दो चम्मच तेल उस उल्टे गिलास के पेंदे में डाल दिया।
शेख चिल्ली बहुत खुश हुआ कि उसने अपनी अक्ल से सारा तेल ले लिया है। वह उस उल्टे गिलास (जिसके पेंदे में ज़रा सा तेल था) को बड़ी सावधानी से पकड़े हुए अपनी अम्मी के पास रसोई में पहुँचा।
अम्मी ने जब शेख चिल्ली के हाथ में उल्टा गिलास और उसमें सिर्फ दो चम्मच तेल देखा, तो वे गुस्से से भड़क उठीं।
"अरे बेवकूफ़! यह क्या है? मैं तुझे आठ आने देकर पूरा गिलास भरकर तेल लाने को भेजा था। तू बस इतना सा तेल लेकर आया है? बाकी का तेल कहाँ गया?" अम्मी ने डांटते हुए पूछा।
शेख चिल्ली ने बहुत ही गर्व से मुस्कुराते हुए कहा, "अरे अम्मी जान! आप गुस्सा क्यों कर रही हैं? मैं पूरा आठ आने का ही तेल लाया हूँ। यह तो बस 'बचा हुआ तेल' है। असली और ज़्यादा तेल तो मैंने इस गिलास के 'दूसरी तरफ' रखा हुआ है। ज़रा ये देखिए!"
और अपनी बात साबित करने के लिए, शेख चिल्ली ने उस उल्टे गिलास को झटके से फिर से 'सीधा' कर दिया!
गिलास सीधा करते ही, जो दो चम्मच तेल पेंदे में रखा था, वह भी ज़मीन पर गिर गया और गिलास पूरी तरह से खाली हो गया।
अम्मी खाली गिलास और शेख चिल्ली का मुँह देखती रह गईं। शेख चिल्ली ने अपनी महान 'अक्ल' के चक्कर में घर का सारा तेल ज़मीन पर बहा दिया था।
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