कपड़ों का पेड़ (रेशमी कुरते की खेती)

शेख चिल्ली ने किसानों को खेती करते हुए देखा था। उसने देखा कि किसान ज़मीन में बस एक छोटा सा बीज बोते हैं और कुछ ही महीनों में उसमें से एक बड़ा पेड़ निकल आता है, जो सैकड़ों फल देता है।
शेख चिल्ली का दिमाग दौड़ा। उसने सोचा: "खेती करना तो बहुत ही फायदे का सौदा है। मैं भी खेती करूँगा। लेकिन मैं कोई आम अनाज या फल नहीं उगाऊँगा। मैं ऐसी चीज़ उगाऊँगा जिससे मैं रातों-रात अमीर हो जाऊँ!"
शेख चिल्ली के पास उसके ससुर जी का दिया हुआ एक बहुत ही महँगा और चमचमाता हुआ 'रेशमी कुरता' था।
शेख ने सोचा, "अगर मैं इस एक रेशमी कुरते को ज़मीन में बो दूँ, तो कुछ ही महीनों में यहाँ 'रेशमी कुरतों का एक बहुत बड़ा पेड़' उग आएगा! उस पेड़ पर रोज़ नए-नए रंग-बिरंगे रेशमी कुरते लगेंगे। मैं उन्हें पहनूँगा और बाज़ार में बेचकर बहुत सारा पैसा कमाऊँगा।"
यह 'महान योजना' सोचकर शेख चिल्ली ने अपने घर के पिछवाड़े बागीचे में एक गहरा गढ्ढा खोदा। उसने अपने उस इकलौते और महँगे रेशमी कुरते को बड़े प्यार से उस गढ्ढे में दबा दिया, ऊपर से मिट्टी डाली और खूब सारा पानी दे दिया।
शेख चिल्ली हर रोज़ सुबह उठता और उस 'कुरते के पेड़' की देखभाल करता। वह वहाँ पानी डालता और बैठकर सपनों की दुनिया में खो जाता कि कब कुरतों की फसल तैयार होगी।
एक महीना बीत गया, लेकिन ज़मीन से एक पत्ता तक बाहर नहीं आया।
शेख चिल्ली को फिक्र होने लगी। उसने सोचा कि शायद कुरतों की जड़ें नीचे गहराई में फैल रही होंगी, मुझे ज़रा खोदकर देखना चाहिए।
शेख चिल्ली ने कुदाल ली और उस जगह की मिट्टी हटाई। जब उसने ज़मीन के अंदर देखा, तो उसके होश उड़ गए!
ज़मीन की नमी और कीड़े-मकोड़ों (दीमकों) ने उस रेशमी कुरते को पूरी तरह से कुतर-कुतर कर खा लिया था। वहाँ कुरते की जगह सिर्फ कीचड़ से सने हुए कुछ फटे हुए धागे बचे थे।
शेख चिल्ली ने जब अपने महँगे कुरते की यह हालत देखी, तो वह फूट-फूट कर रोने लगा।
तभी उसकी अम्मा वहाँ आईं। उन्होंने जब यह तमाशा देखा, तो माथा पीटकर बोलीं, "अरे मूर्ख! कपड़ों का भी कहीं पेड़ उगता है? तूने अपना सबसे महँगा कुरता मिट्टी में सड़ा दिया!"
शेख चिल्ली ने रोते हुए बहुत ही अजीब सा जवाब दिया, "अम्मा! मेरा तरीका बिल्कुल सही था। पेड़ तो उगने ही वाला था। लेकिन मेरी 'रेशमी कुरते की फसल' इतनी ज़्यादा मीठी और स्वादिष्ट थी कि पेड़ बनने से पहले ही ज़मीन के सारे कीड़े-मकोड़े उसे खा गए! अगली बार मैं इसमें मिर्ची मिलाकर बोऊँगा!"
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