कुत्ते की पूँछ सीधी करना

शेख चिल्ली ने गाँव में एक कहावत सुन रखी थी कि 'कुत्ते की पूँछ कभी सीधी नहीं होती'। उसे लगा कि यह कोई बहुत बड़ा काम है और अगर वह इसे कर दे, तो पूरे गाँव में उसका नाम हो जाएगा।
एक दिन उसने गाँव वालों के सामने चुनौती दे दी कि वह कुत्ते की पूँछ को बिल्कुल सीधा करके दिखाएगा। गाँव वाले हँसने लगे, लेकिन शेख चिल्ली अपने काम में जुट गया।
उसने एक सड़क के कुत्ते को पकड़ा और बाँस का एक बिल्कुल 'सीधा पाइप' लिया। शेख चिल्ली ने बहुत ही मेहनत से उस कुत्ते की मुड़ी हुई पूँछ को खींचकर उस सीधे पाइप के अंदर डाल दिया और उसे कसकर बाँध दिया ताकि पूँछ पाइप के अंदर सीधी रहे।
शेख चिल्ली ने तय किया कि वह इस पाइप को पूरे 'छह महीने' तक ऐसे ही बँधा रहने देगा, ताकि पूँछ हमेशा के लिए सीधी हो जाए।
बेचारा कुत्ता छह महीने तक अपनी पूँछ में वह बाँस का पाइप लिए गाँव में घूमता रहा। छह महीने बीत जाने के बाद, शेख चिल्ली ने पूरे गाँव को चौपाल पर इकट्ठा किया।
शेख चिल्ली ने सीना तानकर कहा, "भाइयो! आज मैं दुनिया की वह कहावत गलत साबित करने वाला हूँ। मैंने कुत्ते की पूँछ को छह महीने तक इस सांचे में रखा है। अब देखिए, यह बिल्कुल सीधी हो चुकी होगी!"
गाँव वालों की भीड़ के बीच, शेख चिल्ली ने बहुत ही शान से कुत्ते की पूँछ पर बँधी रस्सी खोली और वह बाँस का पाइप बाहर निकाल लिया।
जैसे ही पाइप बाहर आया... 'स्प्रिंग' की तरह कुत्ते की पूँछ वापस गोल घूमकर उसी पुरानी टेढ़ी हालत में आ गई! वह एक इंच भी सीधी नहीं हुई थी।
गाँव वाले पेट पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से ठहाके लगाकर हँसने लगे।
शेख चिल्ली झेंप गया, लेकिन उसने अपनी गलती मानने के बजाय कुत्ते को डांटते हुए एक बहुत ही अजीब तर्क दिया: "अरे भाइयो! इसमें मेरी या मेरे इलाज की कोई गलती नहीं है। मेरा तरीका तो बिल्कुल सही था, यह कुत्ता ही बहुत 'ज़िद्दी' और 'बदमाश' है! जैसे ही मैंने पाइप निकाला, इसने जानबूझकर अपनी पूँछ वापस टेढ़ी कर ली ताकि मेरी इज़्ज़त खराब हो सके!"
गाँव वालों को उसकी इस हाज़िरजवाबी और बेवकूफी पर और भी ज़्यादा हँसी आ गई।
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