"खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे"

एक पुराने से घर में एक बहुत ही मोटी और घमंडी 'बिल्ली' रहती थी, जिसका नाम था 'मानो'। मानो बिल्ली को अपनी फुर्ती और शिकार करने के हुनर पर बहुत घमंड था। वह हमेशा घर के दूसरे जानवरों (कुत्ते और गाय) के सामने डिंगें मारती थी कि पूरे इलाके में ऐसा कोई चूहा नहीं है, जो उसके पंजों से बच सके।
उसी घर के रसोईघर के एक छोटे से बिल में एक बहुत ही नन्हा, लेकिन बेहद तेज़ और चालाक 'चूहा' रहता था, जिसका नाम था 'चीकू'।
मानो बिल्ली ने कसम खा रखी थी कि वह चीकू चूहे को पकड़ कर ही रहेगी।
शिकार की कोशिश: एक दोपहर, मानो बिल्ली रसोईघर के दरवाज़े के पीछे घात लगाकर बैठी थी। तभी चीकू चूहा अपने बिल से बाहर निकला। उसे एक कटोरी में रखा ताज़ा मक्खन खाना था।
जैसे ही चीकू मक्खन की कटोरी के पास पहुँचा, मानो बिल्ली ने पूरी ताक़त से उसके ऊपर छलाँग लगाई— "म्याऊँ!"
लेकिन चीकू चूहा बहुत ही फुर्तीला था। उसने बिल्ली को हवा में आते देख लिया। वह एक सेकंड में मक्खन की कटोरी के नीचे से खिसका और दूसरी तरफ भाग गया।
मानो बिल्ली का मुँह सीधे ज़मीन से टकराया। उसने फिर से चीकू के पीछे दौड़ लगाई। दोनों के बीच रसोईघर में एक भयंकर दौड़ शुरू हो गई। बिल्ली चूहे को पकड़ने के लिए डब्बों पर चढ़ती, बर्तनों को गिराती, लेकिन चूहा हर बार उसके पंजों के नीचे से सरक जाता।
झल्लाहट और गुस्सा: अंत में, चीकू चूहा भागते-भागते लकड़ी की एक अलमारी के पीछे बने अपने 'छोटे से बिल' में घुस गया।
मानो बिल्ली ने पूरी रफ़्तार से बिल की तरफ छलाँग लगाई, लेकिन बिल इतना छोटा था कि बिल्ली का सिर दीवार से ज़ोर से टकरा गया— 'ठक्क!'
चूहा अंदर सुरक्षित था और वह बिल के अंदर से झाँककर बिल्ली का मज़ाक उड़ा रहा था— "ची... ची... ची... मोटी बिल्ली मुझे नहीं पकड़ पाई!"
मानो बिल्ली की बहुत बेइज्जती हो गई थी। घर का कुत्ता (शेरू) दूर बैठा यह सब देख रहा था और बिल्ली की इस हार पर ज़ोर-ज़ोर से हँस रहा था।
मानो बिल्ली से अपनी हार और बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई। वह चूहे का तो कुछ बिगाड़ नहीं सकती थी। इसलिए उसने अपनी झल्लाहट निकालने के लिए, पास ही बने लकड़ी के एक मज़बूत 'खंभे' पर अपने तेज़ नाखुन मारना शुरू कर दिया।
वह गुस्से में ज़ोर-ज़ोर से 'म्याऊँ-म्याऊँ' करती और उस बेजान खंभे को अपने पंजों से खुरच-खुरच कर नोचने लगी। खंभे से लकड़ी का बुरादा गिरने लगा।
शेरू कुत्ते ने बिल्ली की यह मज़ेदार हरकत देखकर हँसते हुए कहा: "अरे ओ मानो! तुम्हारा शिकार तो बिल में घुस गया और तुम्हारी सारी फुर्ती धरी की धरी रह गई। अब इस बेजान लकड़ी के खंभे पर अपने नाखुन चलाकर क्या फायदा? जो इंसान या जानवर अपनी हार का गुस्सा किसी बेकसूर या बेजान चीज़ पर निकालता है, उसकी हालत बिल्कुल तुम्हारे जैसी ही होती है। सच ही कहते हैं— 'खिसियानी बिल्ली... खंभा नोचे!'" (यानी शर्मिंदा होकर बेजान खंभे पर गुस्सा निकालना)।
मानो बिल्ली शर्म के मारे अपना मुँह छिपाकर रसोईघर से बाहर भाग गई।
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