हिन्दी कहानियाँ
📖 मुहावरों की कहानियाँ

"मुँह में राम बगल में छुरी"

लोक परंपरा5 मिनट का पठन
"मुँह में राम बगल में छुरी"

'धर्मपुर' नाम का एक बहुत ही सीधा-सादा और शांतिप्रिय गाँव था। गाँव वाले पूजा-पाठ में बहुत विश्वास रखते थे।

एक दिन गाँव में एक 'साधु बाबा' पधारे। उनका नाम था 'बाबा ढोंगीदास'। बाबा जी का भेष बहुत ही शानदार था— उन्होंने चमचमाते भगवा कपड़े पहने थे, गले में रुद्राक्ष की बड़ी-बड़ी मालाएँ थीं, माथे पर लंबा तिलक था और उनके हाथ में हमेशा एक माला रहती थी, जिसे वे फेरते हुए लगातार "राम-राम, सीता-राम" का जाप करते रहते थे।

बाबा ढोंगीदास ने गाँव के बाहर बरगद के पेड़ के नीचे अपना डेरा जमाया। वे बहुत ही 'मीठी आवाज़' में बातें करते थे।

मीठी बातों का जाल: बाबा ने गाँव वालों को प्रवचन देना शुरू किया: "बच्चो! यह दुनिया मोह-माया है। लालच बुरी बला है। इंसान को अपना सारा धन-धान्य गरीबों और साधु-संतों की सेवा में लगा देना चाहिए। मैं तो एक तपस्वी हूँ, मुझे धन-दौलत से कोई लगाव नहीं है।"

गाँव वाले बाबा की इन मीठी और धार्मिक बातों से इतने प्रभावित हुए कि वे उन्हें 'पहुँचा हुआ संत' मान बैठे। गाँव की औरतें रोज़ बाबा के लिए बढ़िया पकवान, फल और दूध लातीं। गाँव के सेठ और ज़मींदार बाबा के चरणों में 'चाँदी के सिक्के और रेशमी कपड़े' चढ़ाते।

बाबा हर किसी के सिर पर हाथ फेरते और "कल्याण हो" कहते, लेकिन उनके मन में बहुत ही भयानक कपट भरा हुआ था। असल में, बाबा ढोंगीदास कोई साधु नहीं, बल्कि एक बहुत बड़े 'डाकुओं के गिरोह का सरदार' था।

असलियत का पर्दाफाश: बाबा ने गाँव में कुछ दिन रहकर यह अच्छी तरह देख लिया था कि किस सेठ के घर में कितना सोना रखा है और गाँव का अनाज गोदाम कहाँ है।

अमावस की काली रात थी। पूरा गाँव गहरी नींद में सो रहा था। बाबा ढोंगीदास ने अपने भगवा कपड़े उतारे और काले कपड़े पहन लिए। उसने अपने साथियों (डाकुओं) को जंगल से बुला लिया। बाबा के हाथ में अब माला नहीं, बल्कि एक बहुत ही तेज़ धार वाली 'छुरी' और चाबियों का गुच्छा था।

बाबा और उसके डाकू साथी चुपके से गाँव के सबसे बड़े सेठ की हवेली में घुसे। वे तिजोरी तोड़ने ही वाले थे कि तभी गाँव के 'चौकीदार' की नज़र उन पर पड़ गई। चौकीदार ने तुरंत ज़ोर-ज़ोर से सीटी बजा दी और चिल्लाने लगा: "जागते रहो! चोर आए हैं!"

आवाज़ सुनकर पूरा गाँव डंडे और मशालें लेकर जाग गया। गाँव वालों ने चारों तरफ से हवेली को घेर लिया।

जब गाँव वालों ने मशाल की रोशनी में डाकुओं के सरदार का चेहरा देखा, तो उनके होश उड़ गए! वह कोई और नहीं, बल्कि दिन भर "राम-राम" जपने वाला वही 'बाबा ढोंगीदास' था, और उसके हाथ में एक बड़ी सी 'छुरी' चमक रही थी।

गाँव के सरपंच ने गुस्से में बाबा को पकड़ लिया और गाँव वालों से कहा: "अरे भाइयो! इसे देखो, यही है वह पाखंडी जिसे हम भगवान मान रहे थे। दिन के उजाले में इसके होंठों पर भगवान का नाम होता था और रात के अँधेरे में इसके हाथों में हथियार। ऐसे ही कपटी और धोखेबाज़ लोगों के लिए हमारे बुजुर्गों ने कहा है— 'मुँह में राम, बगल में छुरी!'"

गाँव वालों ने उस पाखंडी बाबा की जमकर धुनाई की और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

🎉 कहानी समाप्त

📖 मुहावरों की कहानियाँ की और कहानियाँ

📖 मुहावरों की कहानियाँ5 मिनट

"नाच न जाने आँगन टेढ़ा"

अपनी कमी छिपाने के लिए दूसरों पर या परिस्थितियों पर दोष मढ़ना।

पढ़ें →
📖 मुहावरों की कहानियाँ5 मिनट

"अंधों में काना राजा"

मूर्खों के बीच थोड़ा सा पढ़ा-लिखा या ज्ञानी इंसान भी बहुत महान माना जाता है।

पढ़ें →
📖 मुहावरों की कहानियाँ5 मिनट

"अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत"

समय निकल जाने के बाद पछताने से या रोने से कोई फायदा नहीं होता, इसलिए हर काम समय पर करना चाहिए।

पढ़ें →
📖 मुहावरों की कहानियाँ5 मिनट

"जिसकी लाठी उसकी भैंस"

जिसके पास ताक़त या सत्ता होती है, जीत उसी की होती है और उसी का कब्ज़ा मान लिया जाता है।

पढ़ें →
📖 मुहावरों की कहानियाँ5 मिनट

"बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद"

मूर्ख या अज्ञानी इंसान किसी मूल्यवान या गुणवान चीज़ की कद्र नहीं कर सकता, क्योंकि उसे उसकी परख नहीं होती।

पढ़ें →
📖 मुहावरों की कहानियाँ5 मिनट

"थोथा चना बाजे घना"

'थोथा' मतलब खाली। जिस इंसान में गुण या ज्ञान कम होता है, वह अपनी अहमियत दिखाने के लिए दिखावा बहुत ज़्यादा करता है और बहुत बड़ी-बड़ी डिंगें मारता है।

पढ़ें →