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🎭 तेनाली राम

कुएं में चाँद — मूर्खों की टोली और राजा की सीख

लोक परंपरा — तेनालीराम5 मिनट का पठन
कुएं में चाँद — मूर्खों की टोली और राजा की सीख

महाराजा कृष्णदेवराय के दरबार में हाल ही में कुछ नए मंत्री शामिल हुए थे। ये मंत्री अक्ल के कच्चे थे, परंतु महाराज की दिन-रात चापलूसी करके उन्होंने उनका दिल जीत लिया था। तेनालीरामा को यह बात खटक रही थी। वे जानते थे कि संकट के समय ये चापलूस और मूर्ख मंत्री राज्य का बेड़ा गर्क कर देंगे।

एक रात पूर्णिमा का समय था। आसमान में पूरा चाँद खिला हुआ था। तेनालीरामा ने महाराज कृष्णदेवराय को महल के बाहर बगीचे में टहलने के लिए आमंत्रित किया।

बगीचे के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा और गहरा कुआँ था। जब महाराज और तेनालीरामा कुएं के पास पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि वे सभी 'नए मंत्री' कुएं के चारों ओर खड़े हैं और बहुत घबराए हुए हैं।

कुएं में चाँद: महाराज ने छिपकर उनकी बातें सुनीं। एक मंत्री कुएं में झांकते हुए रो रहा था: "अरे भाइयो! देखो कितना बड़ा अनर्थ हो गया है। आसमान का 'चाँद' टूटकर हमारे कुएं में गिर गया है!" (दरअसल, शांत पानी में चाँद की परछाई दिख रही थी)।

दूसरे मंत्री ने कहा: "अगर चाँद कुएं में ही रह गया, तो कल से रात में कभी रोशनी नहीं होगी। महाराज हमसे नाराज़ हो जाएंगे। हमें जल्दी से इस चाँद को बाहर निकालना चाहिए!"

तीसरा मंत्री एक लंबी रस्सी और उसमें एक लोहे का बड़ा सा कांटा बांधकर ले आया। उसने कहा, "मैं इस कांटे को चाँद में फंसाकर उसे बाहर खींच लूँगा!"

महाराज यह बेवकूफी देखकर अपना सिर पीटने वाले थे, परंतु तेनालीरामा ने उन्हें रोक दिया और चुपचाप तमाशा देखने को कहा।

मूर्खों की मेहनत: तीसरे मंत्री ने रस्सी कुएं में फेंकी। पानी के अंदर जाकर लोहे का कांटा कुएं की दीवार के एक भारी पत्थर में बुरी तरह फंस गया।

मंत्री ने रस्सी खींची, तो वह हिली नहीं। उसने खुशी से चिल्लाकर कहा: "भाइयो! कांटा चाँद में फंस गया है! परंतु चाँद बहुत भारी है, जल्दी आओ और मेरी मदद करो।"

सभी मूर्ख मंत्री एक लाइन में खड़े हो गए। उन्होंने रस्सी को कसकर पकड़ा और "ज़ोर लगा के हईशा!" कहते हुए पूरी ताकत से रस्सी को खींचने लगे।

उन्होंने इतनी ज़ोर से खींचा कि कुएं के अंदर फंसा हुआ वह पत्थर अपनी जगह से उखड़ गया। जैसे ही पत्थर निकला, कांटे पर से ज़ोर अचानक कम हुआ और रस्सी झटके से ढीली हो गई।

धड़ाम! धड़ाम!

संतुलन बिगड़ने के कारण सभी मंत्री चारों खाने चित्त होकर पीठ के बल ज़मीन पर गिर पड़े।

गिरने के बाद, जब उन्होंने दर्द से कराहते हुए अपनी आँखें खोलीं, तो उनका चेहरा सीधे 'आसमान' की तरफ था। आसमान में पूरा चाँद चमक रहा था।

यह देखकर सभी मंत्री खुशी से उछल पड़े और नाचने लगे: "वाह! वाह! हमारी मेहनत सफल हो गई! हमने इतनी ज़ोर से चाँद को खींचा कि वह सीधा कुएं से निकलकर वापस आसमान में जाकर चिपक गया! हमने विजयनगर को बचा लिया!"

तेनालीरामा की सीख: महाराज कृष्णदेवराय अपनी हंसी नहीं रोक पाए और ज़ोर से ठहाका लगा बैठे।

तेनालीरामा ने महाराज की ओर देखकर अत्यंत गंभीरता से कहा: "देख लीजिए महाराज! ये हैं वे आपके नए 'बुद्धिमान' मंत्री, जो आपकी चापलूसी करते हैं। जो लोग परछाई को हकीकत मान लेते हैं और अपनी ही मूर्खता पर जीत का जश्न मनाते हैं... वे संकट के समय विजयनगर का क्या हाल करेंगे, इसका अंदाज़ा आप खुद लगा सकते हैं।"

महाराज की आँखें खुल गईं। उन्हें समझ आ गया कि चापलूसी करने वाले हमेशा बुद्धिमान नहीं होते। अगले ही दिन महाराज ने उन सभी मूर्ख मंत्रियों को राज्य के महत्वपूर्ण पदों से हटा दिया।

🎉 कहानी समाप्त

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