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🎭 तेनाली राम

लाल मोर का रहस्य — ठग का पर्दाफाश और जादुई बारिश

लोक परंपरा — तेनालीराम5 मिनट का पठन
लाल मोर का रहस्य — ठग का पर्दाफाश और जादुई बारिश

विजयनगर के महाराजा कृष्णदेवराय को दुर्लभ और अनोखे पक्षियों का बहुत शौक था। उनके शाही चिड़ियाघर में दुनिया भर के कई दुर्लभ पक्षी मौजूद थे। एक दिन दरबार में एक बहेलिया आया। उसके पास एक बड़ा सा पिंजरा था, जिसे उसने कपड़े से ढक रखा था।

बहेलिए ने महाराज को प्रणाम किया और कहा: "महाराज! मैं विंध्याचल के घने जंगलों से आपके लिए एक ऐसा जादुई पक्षी पकड़ कर लाया हूँ, जो पूरी दुनिया में किसी और राजा के पास नहीं है। यह एक 'लाल मोर' है!"

बहेलिए ने पिंजरे से कपड़ा हटाया। पिंजरे के अंदर सचमुच एक चटक लाल रंग का मोर बैठा था। उसके पंख लाल रंग में चमक रहे थे।

महाराज और सभी दरबारी उस लाल मोर को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। महाराज ने पूछा: "यह अद्भुत मोर तुमने कहाँ से पकड़ा? इसकी क्या कीमत है?"

बहेलिए ने लालच दिखाते हुए कहा: "हुज़ूर! इसे पकड़ने में मुझे अपनी जान दांव पर लगानी पड़ी। यदि आप मुझे 5,000 सोने के सिक्के दें, तो यह मोर आपका हुआ।"

महाराज इतने खुश थे कि उन्होंने तुरंत खजांची को 5,000 सिक्के देने का आदेश दे दिया।

तेनालीरामा का शक: तेनालीरामा भी दरबार में बैठे थे। उन्हें मोर को देखकर कुछ अजीब लगा। उन्होंने मोर के पास जाकर उसे ध्यान से देखा और उसे सूंघा। मोर के पंखों से किसी प्राकृतिक खुशबू के बजाय 'रंग और तेल' की हल्की-हल्की गंध आ रही थी। तेनाली समझ गए कि यह कोई दुर्लभ मोर नहीं, बल्कि एक रंगा हुआ आम मोर है।

तेनालीरामा ने महाराज से कहा: "महाराज! 5,000 सिक्के तो बहुत ज़्यादा हैं। मुझे कुछ दिन का समय दीजिए, मैं ऐसे ही चार और लाल मोर केवल 1,000 सोने के सिक्कों में ला सकता हूँ!"

महाराज हैरान हुए। उन्होंने बहेलिए को सिक्के देने से रोक दिया और तेनालीरामा को चार लाल मोर लाने के लिए दो हफ्ते का समय दिया। बहेलिया घबरा गया, परंतु वह कुछ बोल नहीं सका।

तेनाली की खोज: तेनालीरामा ने शहर के सबसे बेहतरीन चित्रकारों की तलाश शुरू की। जल्द ही उन्हें एक ऐसा चित्रकार मिल गया जिसने कबूल किया कि कुछ दिन पहले एक बहेलिए ने उसे एक साधारण मोर को लाल रंग से रंगने के लिए भारी रकम दी थी।

तेनालीरामा ने उस चित्रकार से कहा: "तुम तुरंत चार और साधारण मोरों को उसी चटक लाल रंग से रंग दो!"

दरबार में पर्दाफाश: दो हफ्ते बाद तेनालीरामा चार 'लाल मोरों' के साथ दरबार में हाज़िर हुए। महाराज इतने सारे लाल मोर देखकर बहुत खुश हुए। ठग बहेलिया भी वहीं मौजूद था और पसीने-पसीने हो रहा था।

तेनालीरामा ने महाराज से कहा: "महाराज! ये लाल मोर बहुत सुंदर हैं, परंतु इन्हें रोज़ नहलाना पड़ता है। मैं अभी आपको इन्हें नहला कर दिखाता हूँ।"

तेनालीरामा ने सेवकों को पानी से भरी बाल्टियां लाने का इशारा किया। जैसे ही सेवकों ने उन लाल मोरों पर पानी डाला... दरबार का फर्श लाल रंग से भर गया! पानी पड़ते ही मोरों का सारा 'जादुई लाल रंग' धुल गया और वे अपने असली रूप (नीले-हरे रंग के साधारण मोर) में आ गए।

महाराज गुस्से से आगबबूला हो गए। उन्होंने बहेलिए के लाए हुए पहले मोर पर भी पानी फिंकवाया, उसका रंग भी तुरंत उतर गया।

तेनालीरामा ने हंसते हुए कहा: "महाराज! लाल मोर जंगलों में नहीं, बल्कि विजयनगर के चित्रकारों के कारखानों में पाए जाते हैं। इस ठग ने आपकी पक्षी-प्रेम की कमज़ोरी का फायदा उठाया।"

महाराज ने तेनालीरामा की पैनी नज़र की तारीफ की। उन्होंने उस ठग बहेलिए को जेल में डलवा दिया और तेनालीरामा को 1,000 सोने के सिक्के इनाम में दिए।

🎉 कहानी समाप्त

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