राजा की दाढ़ी और तेनाली का न्याय — मासूमियत की पहचान

एक दिन महाराजा कृष्णदेवराय राजदरबार में पधारे। उनका चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था। दरबार में आते ही उन्होंने अपने सिंहासन पर बैठते हुए एक कड़क आवाज़ में पूछा:
"मेरे मंत्रियो! आज सुबह एक बहुत ही भयंकर अपराध हुआ है। किसी ने मेरे चेहरे पर हाथ डालने और मेरी 'दाढ़ी' खींचने की जुर्रत की है! एक चक्रवर्ती सम्राट की दाढ़ी खींचना राजद्रोह के समान है। मैं आप सबसे पूछना चाहता हूँ कि ऐसे अपराधी को क्या सज़ा मिलनी चाहिए?"
यह सुनते ही पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। महाराज की दाढ़ी खींचना! यह तो सचमुच बहुत बड़ा अपराध था।
दरबारियों के कठोर फैसले: महाराज को खुश करने और अपना न्याय-ज्ञान दिखाने के लिए सभी मंत्री भड़क उठे।
राजगुरु ने कड़क आवाज़ में कहा: "महाराज! जिसने भी आपके राजसी चेहरे को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है, उसके दोनों 'हाथ काट' दिए जाने चाहिए!"
सेनापति ने अपनी मूंछों पर ताव देते हुए कहा: "नहीं महाराज! हाथ काटना बहुत छोटी सज़ा है। ऐसे दुस्साहसी अपराधी को हाथी के पैरों तले कुचलवा देना चाहिए या 'फांसी' पर लटका देना चाहिए, ताकि राज्य में कोई भी ऐसा करने की हिम्मत न करे!"
अन्य मंत्रियों ने भी किसी ने कोड़े मारने, तो किसी ने कालकोठरी में डालने की सलाह दी। महाराज इन सभी जवाबों को सुन रहे थे, परंतु उनके चेहरे पर कोई संतुष्टि नहीं थी।
तेनालीरामा का अनोखा न्याय: अंततः महाराज ने अपने सबसे चतुर वज़ीर की ओर देखा। "तेनालीरामा! तुम चुप क्यों हो? तुम्हारी नज़रों में इस अपराधी की क्या सज़ा होनी चाहिए?"
तेनालीरामा अपनी जगह से उठे। वे मुस्कुराए और अत्यंत कोमल स्वर में बोले: "महाराज! मेरी राय में तो उस अपराधी को सज़ा के तौर पर एक थाल भरकर 'रंग-बिरंगी मिठाइयां' और 'सुंदर खिलौने' दिए जाने चाहिए!"
यह सुनकर पूरे दरबार में हड़कंप मच गया। राजगुरु ज़ोर से चिल्लाए: "तेनालीरामा! क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है? महाराज का अपमान करने वाले को सज़ा देने के बजाय तुम उसे मिठाइयां और खिलौने देने की बात कर रहे हो?"
महाराज ने भी हैरानी से पूछा: "तेनाली! तुम ऐसा बेतुका न्याय क्यों कर रहे हो?"
तेनालीरामा ने अत्यंत स्नेहपूर्ण और तार्किक अंदाज़ में समझाया: "महाराज! क्या इस पूरी दुनिया में किसी दुश्मन, किसी अपराधी या किसी आम इंसान की इतनी हिम्मत है कि वह विजयनगर के सम्राट के इतने करीब आ सके और आपकी दाढ़ी तक अपना हाथ पहुँचा सके?"
तेनालीरामा ने आगे कहा: "पूरी दुनिया में केवल एक ही इंसान ऐसा है जो बिना किसी डर के आपकी छाती पर खेल सकता है, आपके इतने करीब आ सकता है और मासूमियत में आपकी दाढ़ी खींच सकता है... और वह कोई और नहीं, बल्कि आपका नन्हा 'पोता' (राजकुमार) है! चूँकि अपराधी एक नन्हा और मासूम बच्चा है, इसलिए उसके लिए मिठाइयां और खिलौने ही सबसे सही सज़ा है!"
महाराज का ठहाका: यह अचूक और सटीक जवाब सुनकर महाराज कृष्णदेवराय का सारा बनावटी गुस्सा गायब हो गया और वे ज़ोर-ज़ोर से ठहाके लगाकर हंसने लगे।
उन्होंने कहा: "तुम बिल्कुल सही कह रहे हो तेनाली! आज सुबह जब मैं अपने नन्हे पोते को खिला रहा था, तो उसने खेल-खेल में मेरी दाढ़ी ज़ोर से खींच ली थी। मैं तो बस अपने दरबारियों की समझदारी की परीक्षा ले रहा था।"
महाराज ने तेनालीरामा की इस अद्भुत बुद्धिमत्ता और स्थिति को गहराई से समझने की कला की जमकर तारीफ की। जो मंत्री हाथ काटने और फांसी देने की बातें कर रहे थे, वे सब शर्म के मारे बगलें झांकने लगे।
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