राजा की शर्त और लहसुन की खेती — शाही अहंकार और किसान की अक्ल

विजयनगर के महाराजा कृष्णदेवराय को अपनी बुद्धिमत्ता और खेती-किसानी के ज्ञान पर बहुत गर्व था। एक बार वे भेष बदलकर अपने राज्य के गाँवों का दौरा कर रहे थे। उनके साथ केवल तेनालीरामा थे।
रास्ते में उन्होंने देखा कि एक बूढ़ा किसान अपने खेत में बहुत मेहनत से कुछ बीज बो रहा था। महाराज ने किसान के पास जाकर पूछा, "बाबा! तुम इस खेत में क्या बो रहे हो?"
किसान ने बिना महाराज को पहचाने जवाब दिया, "बेटा, मैं इसमें लहसुन बो रहा हूँ। यह ज़मीन लहसुन की खेती के लिए बहुत अच्छी है।"
महाराज को अपना ज्ञान बघारने की सूझी। उन्होंने कहा, "बाबा, तुम गलत तरीके से बीज बो रहे हो। लहसुन ऐसे नहीं, बल्कि क्यारियां बनाकर बोया जाता है। तुम मेरी बात मानो, फसल बहुत अच्छी होगी।"
बूढ़े किसान ने मुस्कुराकर कहा, "बेटा, मैं पिछले 40 साल से खेती कर रहा हूँ। मुझे पता है मेरी ज़मीन में क्या और कैसे उगता है। तुम अपना काम करो।"
अहंकार और 100 मोहरों की शर्त: यह सुनकर महाराज का अहंकार जाग उठा। उन्होंने अपने असली रूप में आते हुए कहा: "मैं तुम्हारा राजा हूँ! और मैं कहता हूँ कि मेरा तरीका सही है। चलो, शर्त लगाते हैं। यदि तुम्हारे तरीके से बोए हुए लहसुन से मेरे तरीके से ज़्यादा पैदावार हुई, तो मैं तुम्हें 100 सोने की मोहरें दूँगा। परंतु यदि तुम हार गए, तो तुम्हें अपना यह खेत छोड़ना पड़ेगा!"
किसान राजा की बात सुनकर घबरा गया, परंतु उसने शर्त स्वीकार कर ली।
जब फसल पकने का समय आया, तो तेनालीरामा को पता चला कि किसान की फसल किसी बीमारी के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसान बहुत दुखी था। उसे लगा कि अब उसका खेत राजा छीन लेगा। तेनालीरामा ने किसान को सांत्वना दी और कहा, "बाबा, तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हारी मदद करूँगा। बस जैसा मैं कहूँ, वैसा करना।"
फसल की जांच और तेनाली की चाल: कुछ दिन बाद, महाराज पूरे दरबारियों के साथ उस खेत का मुआयना करने पहुँचे। महाराज बहुत खुश थे क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि खेत में लहसुन के पौधे बहुत कमज़ोर और सूखे हुए थे।
महाराज ने घमंड से कहा, "देखा बाबा! मैंने कहा था ना कि तुम्हारा तरीका गलत है। अब तुम शर्त हार चुके हो और यह खेत मेरा है!"
तभी तेनालीरामा ने कहा, "ठहरिए महाराज! लहसुन तो ज़मीन के अंदर उगता है। ऊपर से पौधे देखकर हम फसल का अंदाज़ा कैसे लगा सकते हैं? पहले खेत को खोदकर लहसुन बाहर तो निकालिए!"
महाराज ने तुरंत मज़दूरों को खेत खोदने का आदेश दिया।
खेत में निकला 'जादू': मज़दूरों ने जैसे ही फावड़ा मारा और मिट्टी हटाई, सभी की आंखें फटी की फटी रह गईं।
ज़मीन के नीचे से लहसुन की कलियों के बजाय, बड़े-बड़े और चमकदार 'सोने के सिक्के' निकलने लगे! पूरे खेत में जगह-जगह मिट्टी के नीचे से सोने के सिक्के निकल रहे थे।
महाराज हक्के-बक्के रह गए। उन्होंने पूछा, "यह क्या है? इस खेत में लहसुन की जगह सोने के सिक्के कैसे उग आए?"
तेनालीरामा ने तुरंत हाथ जोड़कर कहा: "महाराज! यह इस बूढ़े किसान की 40 साल की मेहनत और ईमानदारी का फल है। इसने लहसुन बोया था, परंतु इसकी ज़मीन ने उसे 'सोने' में बदल दिया! अब आप ही बताइए, लहसुन की कीमत ज़्यादा होती है या इन सोने के सिक्कों की? क्या इस किसान के तरीके ने सबसे बेहतरीन पैदावार नहीं दी?"
महाराज समझ गए कि यह तेनालीरामा की ही कोई चाल है। वास्तव में, तेनालीरामा ने रात के अंधेरे में खेत में जगह-जगह 100 सोने के सिक्के (जो उन्होंने खुद अपने पास से दिए थे) गाड़ दिए थे।
महाराज कृष्णदेवराय अपनी हार पर हंस पड़े। उन्होंने समझ लिया कि राजा को कभी अपने ज्ञान का घमंड करके किसी गरीब की रोज़ी-रोटी (खेत) पर दांव नहीं लगाना चाहिए। महाराज ने किसान को वे 100 सोने के सिक्के भी दिए और उसका खेत भी उसे वापस कर दिया।
🎭 तेनाली राम की और कहानियाँ
सोने के आम — पंडितों का लालच और तेनाली का अचूक इलाज
पंडितों ने महाराज कृष्णदेवराय से सोने के आम बनवाने को कहा। तेनालीरामा ने गर्म लोहे की सलाखें दिखाकर उनकी पोल खोली और पंडितों को सबक सिखाया।
पढ़ें →शाही बैंगन की चोरी — एक जादुई बारिश और बच्चे की गवाही
तेनालीरामा ने शाही बाग से बैंगन चुराए। जब महाराज ने पूछताछ की, तो तेनाली ने अपने बेटे की 'जादुई बारिश' वाली गवाही से बचा लिया।
पढ़ें →तेनालीरामा और बिल्लियों की भूख — चूहों का आतंक और उबलता हुआ दूध
चूहों के आतंक से निपटने के लिए महाराज ने हर घर को बिल्ली और गाय दी। तेनालीरामा ने बिल्ली को खौलता दूध पिलाकर उसकी भूख बढ़ा दी और सारे चूहे खत्म कर दिए।
पढ़ें →आधी इनाम का हिस्सेदार — दरबान का लालच और कोड़ों की सज़ा
दरबान ने तेनालीरामा से इनाम का आधा हिस्सा मांगा। तेनाली ने इनाम में 100 कोड़े मांगकर दरबान को ही 50 कोड़े लगवा दिए।
पढ़ें →राजा की पेंटिंग — तस्वीर का दूसरा पहलू और तेनाली की 'अमूर्त' कला
महाराज ने चित्रकार की घोड़े की पेंटिंग की प्रशंसा की। तेनालीरामा ने खाली कैनवास पर 'घोड़े की पूंछ' बनाकर महाराज के ही तर्क से उन्हें चुप करा दिया।
पढ़ें →घोड़े का व्यापारी — मूर्खों की सूची और राजा का अहंकार
महाराज ने अरबी व्यापारी को 5,000 सोने के सिक्के दे दिए। तेनालीरामा ने 'मूर्खों की सूची' में महाराज का नाम सबसे ऊपर लिखकर उन्हें सबक सिखाया।
पढ़ें →