रंगीन पानी का रहस्य — तेनालीरामा और बेईमान रंगरेज़ की हार

विजयनगर में एक बहुत ही मशहूर और चतुर 'रंगरेज़' (कपड़े रंगने वाला) रहता था। वह कपड़ों पर बहुत ही पक्के और सुंदर रंग चढ़ाता था। परंतु वह एक नंबर का धोखेबाज़ और घमंडी इंसान था। वह अक्सर लोगों से पैसे तो ले लेता, परंतु उनके कीमती रेशमी कपड़े खराब कर देता या चुरा लेता।
एक दिन वह रंगरेज़ महाराज कृष्णदेवराय के दरबार में पहुँचा। उसके पास एक बड़ा सा मटका था, जिसमें कुछ अजीब सा रंगीन पानी भरा हुआ था।
रंगरेज़ ने महाराज को प्रणाम किया और बड़ी चालाकी से कहा: "महाराज! मैंने कई वर्षों की तपस्या से एक 'जादुई रंग' तैयार किया है। यदि आप मुझे अपना सबसे कीमती रेशमी कपड़ा दें, तो मैं उसे इस जादुई रंग में डुबोकर ऐसा रंग दूँगा, जो दुनिया के किसी राजा के पास नहीं होगा।"
रंगरेज़ की पेचीदा शर्त: महाराज ने उत्सुक होकर पूछा, "यह कौन सा रंग है?"
रंगरेज़ ने अपनी कुटिल चाल चलते हुए कहा: "हुज़ूर! इस रंग की खासियत यही है कि यह न तो लाल है, न ही पीला, न नीला, न हरा, न सफेद, न काला... और न ही दुनिया का कोई और जाना-पहचाना रंग है! यह एक बिल्कुल नया और रहस्यमयी रंग है। आप बस मुझे कपड़ा और 500 सोने के सिक्के दे दीजिए।"
महाराज यह सुनकर चकित रह गए कि ऐसा कौन सा रंग हो सकता है? परंतु वे उस रंगरेज़ की बातों में आ गए और उसे एक बहुत ही कीमती रेशमी कपड़ा और 500 मोहरें दे दीं।
रंगरेज़ ने कपड़ा लिया और कहा, "महाराज, आप यह कपड़ा मुझसे वापस लेने के लिए अपना कोई मंत्री भेज दीजिएगा।"
तेनालीरामा का पलटवार: दरबार खत्म होने के बाद, महाराज ने तेनालीरामा को बुलाया और कहा, "तेनाली! मुझे लगता है कि यह रंगरेज़ मुझे धोखा दे रहा है। ऐसा कौन सा रंग होता है जो लाल, पीला, हरा या नीला कुछ भी नहीं है? तुम जाकर उससे मेरा कपड़ा वापस लाओ।"
तेनालीरामा समझ गए कि रंगरेज़ ने एक शब्दों का जाल बुना है ताकि वह राजा का कीमती कपड़ा और मोहरें हड़प सके।
अगले दिन, तेनालीरामा उस रंगरेज़ की दुकान पर पहुँचे। रंगरेज़ ने तेनाली को देखकर कहा, "आइए वज़ीर जी! क्या आप महाराज का कपड़ा लेने आए हैं?"
तेनालीरामा ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, बिल्कुल! परंतु महाराज ने मुझे एक बहुत ही विशेष संदेश के साथ भेजा है।"
रंगरेज़: "कैसा संदेश?"
रंगरेज़ को उसी के जाल में फंसाना: तेनालीरामा ने अत्यंत गंभीर और कुटिल मुस्कान के साथ कहा: "महाराज ने आदेश दिया है कि मैं तुम्हारा रंगा हुआ जादुई कपड़ा यहाँ से लेकर जाऊँ... परंतु एक शर्त है!"
तेनालीरामा ने रंगरेज़ की ही भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा: "महाराज ने कहा है कि मैं यह कपड़ा लेने न तो सोमवार को आऊँ, न मंगलवार को, न बुधवार को, न गुरुवार को, न शुक्रवार को, न शनिवार को और न ही रविवार को आऊँ! इन सातों दिनों को छोड़कर, मैं दुनिया के किसी भी 'नए और रहस्यमयी दिन' आकर तुमसे वह कपड़ा ले जाऊँगा। तब तक तुम कपड़ा सुरक्षित रखना!"
यह सुनते ही रंगरेज़ के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह हक्का-बक्का रह गया। सप्ताह में 7 दिनों के अलावा कोई आठवां दिन होता ही नहीं है, तो तेनालीरामा कपड़ा लेने कैसे आएंगे?
रंगरेज़ समझ गया कि तेनालीरामा ने उसके 'असंभव रंग' की शर्त को एक 'असंभव दिन' की शर्त से काट दिया है। वह अपनी हार मान गया और उसने तुरंत महाराज का कीमती कपड़ा और 500 मोहरें तेनालीरामा को वापस लौटा दीं। तेनाली ने महाराज का खज़ाना भी बचा लिया और उस बेईमान रंगरेज़ का पर्दाफाश भी कर दिया।
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