शेख चिल्ली का खज़ाना

शेख चिल्ली दिन में खुली आँखों से तो सपने देखता ही था, लेकिन रात को सोते समय भी उसका दिमाग खयाली पुलाव पकाने से बाज़ नहीं आता था। उसकी असल ज़िंदगी में चाहे कितनी भी गरीबी हो, लेकिन सपनो की दुनिया में वह हमेशा एक बहुत बड़ा बादशाह ही हुआ करता था।
एक रात सर्दियों का समय था। शेख चिल्ली अपनी पुरानी खटिया पर एक फटी हुई रज़ाई ओढ़कर गहरी नींद में सो रहा था। सोते-सोते उसे एक बहुत ही सुहाना और शानदार सपना आने लगा।
सपने में शेख चिल्ली ने देखा कि वह जंगल के रास्ते से जा रहा है और अचानक उसके पैर ज़मीन में दबे एक लोहे के कुंडे से टकराते हैं। जब वह ज़मीन खोदता है, तो नीचे से एक बहुत बड़ा, पुराना और भारी संदूक निकलता है। जब वह उस संदूक का ताला तोड़कर उसे खोलता है, तो उसकी आँखें चौंधिया जाती हैं।
वह संदूक ऊपर तक सोने के सिक्कों, चमकते हुए हीरों, पन्नों और कीमती ज़ेवरों से भरा हुआ था!
सपने के अंदर शेख चिल्ली की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उसने सोचा: "वाह शेख! आज तो तेरी किस्मत खुल गई। अब तू दुनिया का सबसे अमीर आदमी बन गया है। इस खज़ाने से तू एक बहुत बड़ा महल बनाएगा और पूरी ज़िंदगी आराम से बैठकर खाएगा।"
सपने में ही, शेख चिल्ली को डर सताने लगा कि कहीं कोई चोर या डाकू आकर उसका यह खज़ाना लूट न ले। इसलिए उसने उस खज़ाने के संदूक को कसकर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसके ऊपर बैठ गया। वह सपने में बहुत ही सतर्क होकर चारों तरफ देख रहा था और अपने खज़ाने की रखवाली कर रहा था।
उसी समय, हकीकत की दुनिया में सुबह हो चुकी थी। सूरज निकल आया था। शेख चिल्ली की पत्नी सुबह जल्दी उठकर घर के काम-काज में लग गई थी। घर में चूल्हा जलाने के लिए लकड़ियाँ खत्म हो गई थीं।
पत्नी ने देखा कि शेख चिल्ली अभी तक घोड़े बेचकर सो रहा है। उसने पास जाकर शेख चिल्ली को आवाज़ दी, "अजी सुनते हो! सुबह हो गई है, उठ जाओ। घर में चूल्हा जलाने के लिए एक भी लकड़ी नहीं है। जाओ, जंगल से जाकर कुछ लकड़ियाँ काट लाओ।"
शेख चिल्ली अपने सपने में पूरी तरह खोया हुआ था और अपने खज़ाने को चोरों से बचा रहा था। पत्नी ने जब उसे ज़ोर से हिलाकर जगाने की कोशिश की, तो शेख चिल्ली की नींद अचानक टूट गई।
उसकी आँखें खुलीं। सामने न कोई जंगल था, न कोई ज़मीन और न ही कोई सोने-हीरों से भरा संदूक। वह अपने उसी टूटे-फूटे घर की पुरानी खटिया पर लेटा हुआ था और सामने उसकी पत्नी उसे लकड़ियाँ काटने के लिए उठा रही थी।
शेख चिल्ली को जब यह अहसास हुआ कि उसका वह बेशकीमती खज़ाना और सोने के सिक्के सब गायब हो गए हैं, तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसे लगा कि उसकी पत्नी ने ही उसे जगाकर उसका सारा खज़ाना लुटवा दिया है।
शेख चिल्ली अपनी खटिया से एकदम उछलकर खड़ा हुआ और उसने अपनी पत्नी पर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना शुरू कर दिया।
"अरे सत्यानाशी! तूने यह क्या कर दिया? तूने मुझे क्यों जगाया? मैं अभी-अभी दुनिया का सबसे अमीर आदमी बन चुका था। मेरे पास सोने और हीरों से भरा एक बहुत बड़ा संदूक था और मैं उसकी रखवाली कर रहा था। तेरे एक बार जगाने से मेरा वह सारा करोड़ों का खज़ाना गायब हो गया! तूने मुझे सड़क पर ला दिया!"
शेख चिल्ली इतना बौखला गया था कि उसने पास पड़ी हुई एक झाड़ू उठाई और गुस्से में अपनी पत्नी के पीछे भागने लगा।
"जल्दी से मुझे वापस सुला! मुझे वही सपना दोबारा देखना है! मेरा खज़ाना वहीं जंगल में असुरक्षित पड़ा है, कोई चोर उसे लूट ले जाएगा। जल्दी मेरे ऊपर रज़ाई डाल और मुझे सुला!" शेख चिल्ली ज़ोर-ज़ोर से रोते हुए चिल्ला रहा था।
उसकी पत्नी अपना सिर पीटते हुए घर के आँगन में भाग रही थी। पड़ोसियों ने जब यह तमाशा देखा और शेख चिल्ली के 'सपने के खज़ाने' के लुटने की बात सुनी, तो वे हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। कई दिनों तक शेख चिल्ली अपने उस 'सपनों के खज़ाने' के खो जाने का मातम मनाता रहा।
😄 शेखचिल्ली की और कहानियाँ
शेख चिल्ली और अंडों की टोकरी (सपनों का महल)
शेख चिल्ली बाज़ार में अंडों की टोकरी सिर पर रखकर खयाली पुलाव पकाने लगा। सपनों में उसने मुर्गियों से लेकर महल तक बना लिया, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि...
पढ़ें →जिस डाल पर बैठा, उसी को काटना
शेख चिल्ली पेड़ की सूखी डाल काटने गया, लेकिन अपनी बेवकूफी में उसी डाल के आखिरी सिरे पर बैठकर कुल्हाड़ी चलाने लगा।
पढ़ें →कौवा कान ले गया!
जब कुछ शरारती लड़कों ने शेख चिल्ली से कहा कि कौवा उसका कान ले गया है, तो शेख बिना अपना कान चेक किए कौवे के पीछे भागने लगा।
पढ़ें →गधों की गिनती का चक्कर
शेख चिल्ली ने 10 गधे खरीदे। जब वह गधे पर बैठकर गधों को गिनता तो 9 निकलते, और नीचे उतरकर गिनता तो 10! उसे लगा कोई जादू है।
पढ़ें →शेख चिल्ली और तेल का मटका
शेख चिल्ली सिर पर तेल का मटका रखकर मज़दूरी के दो रुपयों से अमीर बनने के सपने देखने लगा और ख्यालों में लाठी चलाते हुए मटका फोड़ दिया।
पढ़ें →अँधेरे की चीज़ उजाले में ढूँढना
शेख चिल्ली का सिक्का एक अँधेरी गली में गिर गया, लेकिन वह उसे वहाँ ढूँढने के बजाय लालटेन की रोशनी में ढूँढने लगा क्योंकि वहाँ उजाला था!
पढ़ें →