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🎭 तेनाली राम

तीन पुतलियों की परख — असली विद्वान की पहचान और राजा की पहेली

लोक परंपरा — तेनालीराम5 मिनट का पठन
तीन पुतलियों की परख — असली विद्वान की पहचान और राजा की पहेली

एक बार विजयनगर के राजदरबार में एक विदेशी व्यापारी आया। वह अपने साथ एक सुंदर संदूक लाया था। व्यापारी ने महाराज कृष्णदेवराय को प्रणाम किया और संदूक में से तीन बिल्कुल एक जैसी दिखने वाली लकड़ी की पुतलियां बाहर निकालीं।

तीनों पुतलियां आकार, रंग, रूप, कपड़े और वज़न में बिल्कुल समान थीं। बाहर से देखने पर उनमें रत्ती भर भी अंतर नहीं था।

व्यापारी ने कहा: "महाराज! ये कोई साधारण पुतलियां नहीं हैं। ये तीनों इंसानों के तीन अलग-अलग 'स्वभावों' को दर्शाती हैं। इनमें से एक पुतली सबसे 'निकृष्ट' (सबसे बुरी) है, दूसरी पुतली 'मध्यम' (सामान्य) है, और तीसरी पुतली 'सर्वश्रेष्ठ' (सबसे अच्छी) है। मैं आपके दरबार के विद्वानों को चुनौती देता हूँ कि वे बिना इन्हें तोड़े या काटे, यह बताएँ कि कौन सी पुतली कैसी है?"

विद्वानों की हार: दरबार के सभी मंत्री और विद्वान आगे आए। उन्होंने पुतलियों को घुमा-फिरा कर देखा, उनका वज़न तौला, उन्हें सूंघा, परंतु किसी को भी उनमें कोई अंतर दिखाई नहीं दिया। राजगुरु ने भी हार मान ली।

जब विजयनगर की साख दांव पर लगी, तो महाराज ने तेनालीरामा को आगे आने का आदेश दिया।

तेनालीरामा का जादुई परीक्षण: तेनालीरामा ने पुतलियों को ध्यान से देखा। उन्हें पुतलियों के 'कान' में एक बहुत ही बारीक सा छेद दिखाई दिया।

तेनालीरामा ने तुरंत एक 'पतला और लंबा तार' मंगवाया।

पहली पुतली: तेनालीरामा ने वह तार पहली पुतली के कान में डाला। तार अंदर गया और पुतली के 'मुँह' से बाहर निकल आया!

दूसरी पुतली: तेनालीरामा ने वही तार दूसरी पुतली के कान में डाला। इस बार तार पुतली के 'दूसरे कान' से बाहर निकल गया!

तीसरी पुतली: अंत में, तेनालीरामा ने तार तीसरी पुतली के कान में डाला। तार अंदर गया और पुतली के पेट (सीने) में जाकर 'गहराई में समा गया'। वह तार कहीं से बाहर नहीं निकला!

पुतलियों का मनोवैज्ञानिक रहस्य: तेनालीरामा ने मुस्कुराते हुए महाराज और उस व्यापारी की ओर देखा। उन्होंने कहा:

"महाराज! रहस्य सुलझ गया है। ये पुतलियां वास्तव में इंसानों की तीन श्रेणियों को दर्शाती हैं।"

तेनालीरामा ने विस्तार से समझाते हुए कहा: "पहली पुतली (जिसके कान से तार मुँह में आया) वह 'सबसे बुरी' श्रेणी का इंसान है। यह उन लोगों को दर्शाती है जो कानों से कोई गुप्त या ज्ञान की बात सुनते हैं और उसे अपने मुँह से दूसरों के सामने (चुगली करके) उगल देते हैं। ऐसे लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।"

"दूसरी पुतली (जिसके एक कान से तार दूसरे कान से निकल गया) वह 'मध्यम' इंसान है। यह उन लोगों को दर्शाती है जो ज्ञान की बात एक कान से सुनते हैं और दूसरे कान से निकाल देते हैं। ऐसे लोग न तो नुकसान पहुँचाते हैं और न ही कुछ सीखते हैं।"

"और तीसरी पुतली (जिसके कान में गया तार सीने में उतर गया) वह दुनिया का 'सर्वश्रेष्ठ' इंसान है! यह उन ज्ञानी और भरोसेमंद लोगों को दर्शाती है, जो ज्ञान या रहस्य की बातें अपने कानों से सुनते हैं और उसे हमेशा के लिए अपने हृदय (दिल) में सुरक्षित रख लेते हैं। वे न तो चुगली करते हैं और न ही ज्ञान को भूलते हैं।"

व्यापारी का नतमस्तक होना: विदेशी व्यापारी तेनालीरामा के इस अचूक और गहरे दार्शनिक विश्लेषण को सुनकर सन्न रह गया। उसने ज़मीन पर झुककर तेनालीरामा को प्रणाम किया और कहा: "विजयनगर के अष्टदिग्गज सचमुच दुनिया में सबसे श्रेष्ठ हैं!" महाराज कृष्णदेवराय ने खुश होकर वे तीनों कीमती पुतलियां तेनालीरामा को इनाम में दे दीं।

🎉 कहानी समाप्त

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