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🎭 तेनाली राम

तेनालीरामा और घमंडी जादूगर — खुली आँखों का अंधापन

लोक परंपरा — तेनालीराम5 मिनट का पठन
तेनालीरामा और घमंडी जादूगर — खुली आँखों का अंधापन

एक बार विजयनगर साम्राज्य में एक बहुत ही प्रसिद्ध और घमंडी विदेशी जादूगर आया। वह काले जादू और हाथ की सफाई में माहिर था। उसने आते ही पूरे शहर में अपने जादू के करतब दिखाए और लोगों को हैरान कर दिया।

धीरे-धीरे उसके अहंकार की सीमा पार हो गई और वह महाराज कृष्णदेवराय के दरबार में पहुँच गया। उसने दरबार में कई अद्भुत करतब दिखाए— हवा में उड़ना, खाली हाथ से सोने के सिक्के निकालना, और आग के गोलों को निगल जाना।

सभी दरबारी उसकी कला देखकर सन्न थे।

जादूगर की खुली चुनौती: अपने जादू का प्रदर्शन करने के बाद, जादूगर ने सीना तानकर विजयनगर के अष्टदिग्गजों (विद्वानों) को एक खुली चुनौती दी: "महाराज! आपके दरबार में दुनिया के सबसे चतुर लोग बैठते हैं। मेरी चुनौती यह है कि मैं वह हर काम अपनी 'खुली आँखों' से कर सकता हूँ, जो आपके विद्वान अपनी 'बंद आँखों' से कर सकते हैं! क्या कोई है जो मेरी इस चुनौती को स्वीकार करे?"

यह बहुत ही अजीब चुनौती थी। सभी विद्वान सोचने लगे। जो काम बंद आँखों से किया जा सकता है (जैसे सोना, सोचना, गाना, लेटना), वह काम खुली आँखों से करना तो और भी आसान है! कोई भी ऐसा काम नहीं सूझ रहा था जो बंद आँखों से तो हो सके, परंतु खुली आँखों से न हो सके।

राजगुरु और अन्य सभी विद्वानों ने हार मानकर अपना सिर झुका लिया। जादूगर अहंकार से हंसने लगा और विजयनगर के दरबार का मज़ाक उड़ाने लगा।

तेनालीरामा की एंट्री: तभी तेनालीरामा अपनी जगह से उठे और बोले: "जादूगर महोदय! मैं तुम्हारी चुनौती स्वीकार करता हूँ। मैं अपनी बंद आँखों से एक ऐसा काम करूँगा, जिसे तुम अपनी खुली आँखों से किसी भी कीमत पर नहीं कर पाओगे!"

जादूगर ने घमंड से कहा: "चलो दिखाओ! अगर मैं नहीं कर पाया, तो मैं अपना सारा जादू छोड़ दूँगा और जीवन भर तुम्हारा गुलाम बनकर रहूँगा।"

तेनालीरामा ने दरबार के एक सेवक को अपने पास बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। सेवक तुरंत दौड़कर बाहर गया और एक छोटी सी कटोरी लेकर लौटा। उस कटोरी में 'लाल मिर्च का तेज़ पाउडर' भरा हुआ था।

लाल मिर्च का खेल: जादूगर लाल मिर्च देखकर घबरा गया। तेनालीरामा ने कटोरी हाथ में ली और जादूगर के सामने खड़े हो गए।

तेनालीरामा ने ज़ोर से कहा: "अब ध्यान से देखना!" तेनालीरामा ने अपनी आँखें कसकर 'बंद' कर लीं। फिर उन्होंने कटोरी में से एक मुट्ठी लाल मिर्च का पाउडर उठाया और उसे अपनी बंद आँखों के ऊपर रगड़ लिया!

कुछ सेकंड बाद, तेनालीरामा ने एक गीला तौलिया लिया, अपनी आँखों के ऊपर लगी सारी लाल मिर्च को अच्छी तरह से पोंछ कर साफ किया और फिर अपनी आँखें खोल लीं। उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ क्योंकि आँखें बंद थीं।

अब तेनालीरामा ने उस लाल मिर्च की कटोरी को जादूगर की ओर बढ़ाया और मुस्कुराते हुए कहा: "अब तुम्हारी बारी है, जादूगर महोदय! मैंने अपनी 'बंद आँखों' पर लाल मिर्च डाली है। अब तुम अपनी चुनौती के अनुसार... अपनी 'आँखें पूरी तरह खुली' रखो, और यह लाल मिर्च का पाउडर अपनी खुली आँखों में डालो!"

जादूगर की करारी हार: यह सुनते ही जादूगर के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसका सारा घमंड पल भर में टूट गया।

अगर वह लाल मिर्च को अपनी खुली आँखों में डालता, तो वह जीवन भर के लिए अंधा हो जाता। वह समझ गया कि तेनालीरामा ने उसे उसी के शब्दों के जाल में फंसा लिया है। जो काम (मिर्च डालना) बंद आँखों से सुरक्षित तरीके से किया जा सकता था, वह खुली आँखों से करना आत्महत्या के समान था।

जादूगर ने डर के मारे लाल मिर्च की कटोरी फेंक दी और तेनालीरामा के पैरों में गिर पड़ा। उसने विजयनगर के दरबार से माफी मांगी और अपना सारा सामान उठाकर चुपचाप वहाँ से भाग गया।

महाराज कृष्णदेवराय तेनालीरामा की इस अद्भुत और हाज़िरजवाबी से भरी चाल पर ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। उन्होंने एक बार फिर अपनी अक्ल से विजयनगर का मान बचा लिया था।

🎉 कहानी समाप्त

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